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आधे पैसे में लोन सेटलमेंट करने से पहले ये लंबा नुकसान भी समझ लीजिए

लोन सेटलमेंट भी बैंक या NBFC का एक प्रोसेस है जो आरबीआई की गाइडलाइन के हिसाब से होता है. आपका लोन पट भी जाता है लेकिन आप और बड़े घाटे में चले जाते हैं. बताते कैसे.

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लोन सेटलमेंट के फायदे और नुकसान

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  • एक लोन जो समय पर चुकाया नहीं जाता, उसे सेटलमेंट का ऑफर दिया जाता है जिसमें लोन की राशि कम कर उसे निपटाने का प्रावधान होता है।
  • लोन न चुकाने पर लगातार कलेक्शन कॉल और खराब सिबिल स्कोर जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जिससे सेटलमेंट को विकल्प के रूप में पेश किया जाता है।
  • सेटलमेंट के बाद लोन का रिकॉर्ड सात वर्षों तक 'सेटल्ड' के रूप में रहता है, जिससे भविष्य में क्रेडिट स्कोर प्रभावित होता है और ऋण लेना कठिन होता है।

आपका एक लोन है जो आप किसी भी वजह से नहीं चुका पा रहे. बैंक से लेकर एजेंट कॉल पर कॉल किए जा रहे हैं. EMI बाउंस चार्ज लग रहा तो सिबिल स्कोर भी खराब हो रहा है. ऐसे में एक दिन आपको मिलता है सेटलमेंट का ऑफर. एजेंट बहुत प्यार से आपको लोन सेटल करने का ऑफर देता है. 2 लाख के लोन को सिर्फ 1 लाख में निपटाने का वादा करता है. एक लाख के लिए भी EMI भरने का जुगाड़ बताता है. आप मान जाते हैं और सेटलमेंट ऑफर का पेमेंट कर देते हैं. नहीं करना था!

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ना-ना कोई स्कैम नहीं है. लोन सेटलमेंट भी बैंक या NBFC का एक प्रोसेस है जो RBI की गाइडलाइन के हिसाब से होता है. आपका लोन पट भी जाता है, लेकिन आप और बड़े घाटे में चले जाते हैं. बताते कैसे.

सेटलमेंट शॉर्ट टर्म सुख है

लोन का सेटलमेंट करवाना शॉर्ट-टर्म मन की शांति जैसा है. यह लगातार कलेक्शन कॉल और ओवरड्यू नोटिस के तनाव को दूर करता है. लेंडर (बैंक/NBFC) छोटी राशि स्वीकार करके आपका अकाउंट बंद कर देता है. लेकिन यही सेटलमेंट आपका सिबिल स्कोर खराब नहीं बेकार कर देता है. दरअसल सेटलमेंट होने पर लोन देने वाला संस्थान सिबिल को आपकी रिपोर्ट में बंद की जगह "सेटल" के रूप में अपडेट करता है.

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"सेटल्ड" स्टेटस आपके सिबिल स्कोर को नुकसान पहुंचाता है, जिससे भविष्य में उधार लेना मुश्किल हो जाता है. सेटलमेंट का रिकॉर्ड अगले सात सालों तक आपकी रिपोर्ट में बना रहता है. जिसका मतलब है कि भविष्य में लोन के लिए आपका आकलन करने वाला कोई भी बैंक या फाइनेंशियल संस्थान उस इतिहास को देखेगा. एक ही लोन सेटलमेंट से भी आपके स्कोर में भारी कमी हो सकती है और सात वर्ष तक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को प्रभावित कर सकती है. माने लोन मिलने से रहा.

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सेटलमेंट नहीं तो क्या करें

बैंक आपके लोन को NPA (Non-Performing Asset) में डाले या फिर एजेंट आपको कॉल करके दरेरा दे या फिर सेटलमेंट का ऑफर दे, उसके पहले आप खुद ही बैंक के पास पहुंच जाइए. सेटलमेंट का सहारा लेने से पहले, आप अपने लोन को रीस्ट्रक्चर करने, लोन की अवधि में विस्तार या अस्थायी मोराटोरियम की मांग करने जैसे विकल्पों के बारे में बात कर सकते हैं.

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ध्यान रखिए, बैंक भी आपसे आधे या कम पैसे लेकर अपना घाटा नहीं करना चाहता. सेटलमेंट होने से उसे एक ग्राहक का भी नुकसान होता है. इसलिए वो भी आपको अपने साथ जोड़े रखना चाहता है. अगर कुछ महीने की मोहलत लेकर लोन को पटरी पर लाया जा सकता है तो क्या बुराई. सेटलमेंट को अंतिम विकल्प के तौर पर ही इस्तेमाल करें. 

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