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कश्मीरी पंडितों को फिर मिली धमकी, लेटर में नाम-पता और मोबाइल नंबर तक दर्ज

Jammu Kashmir: घाटी में महीने भर के भीतर कश्मीरी पंडितों को दूसरा धमकी भरा लेटर मिला है. ऐसा माना जा रहा है कि ये लेटर ‘United Liberation Council’ की ओर से जारी किए गए हैं. इस संगठन को ‘Lashkar-E-Taiba’ का ही एक हिस्सा माना जा रहा है.

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कश्मीरी पंडितों को फिर मिला धमकी भरा लेटर. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • अगस्त 2026 में जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को आतंकवादियों की ओर से दो धमकी भरे लेटर मिले हैं, जिनमें उनके नाम, मोबाइल नंबर और रहने के स्थानों की जानकारी शामिल है।
  • लेटर मिलने की पृष्ठभूमि में आतंकवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) का संदेह है, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा माना जाता है और इसका मकसद कश्मीरी पंडितों को डराना है।
  • पहले धमकी मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने का निर्देश दिया है और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं।

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर से कश्मीरी पंडितों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. अगस्त (2026) महीने के भीतर ही ‘आतंकवादियों’ की ओर से दो धमकी भरे लेटर मिल चुके हैं. लेटर में कई कश्मीरी पंडितों के नाम, मोबाइल नंबर, घाटी में उनके रहने और काम करने के जगहों का जिक्र है. पहले आए लेटर में कश्मीरी पंडितों को ‘अपना तरीका बदलने’ की भी बात कही गई थी. दशकों बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब ‘आतंकवादियों’ की ओर से कश्मीरी पंडितों को ऐसे धमकी भरा लेटर मिला है.

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धमकी भरा लेटर मिला

रविवार, 23 अगस्त को एक महीने के भीतर दूसरी बार कश्मीरी पंडितों के नाम पर लेटर आया. इसमें प्रवासी कश्मीरी पंडितों की निजी जानकारी लिखी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, लेटर में कम से कम आधे दर्जन कश्मीरी पंडितों का नाम और उनकी पर्सनल जानकारियां शामिल की गई हैं. साथ ही उन्हें ‘वाइट कॉलर आतंकवादी’ बताया गया है. लेटर में कश्मीरी पंडितों को ‘दिल्ली में अपने आकाओं के लिए काम करने वाला गद्दार’ भी बताया गया है. इस पर 'अहमद बिलाल' नाम के शख्स का साइन है, जिसने लेटर में लिखा है,

जैसा कि पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है. आप कहीं भी हों और कहीं भी जाएं. हम आपकी हर हरकत पर नजर रख रहे हैं.

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घाटी छोड़ने वाले 'टारगेट'

लेटर में कश्मीरी पंडितों में भी अंतर किया गया है. जैसे- जो कश्मीरी पंडित घाटी छोड़कर गए थे, उन्हें ही खासतौर पर ‘निशाने’ पर लिया गया है. साथ ही उन लोगों को भी चेतावनी दी गई है, जो ‘कश्मीर में RSS का एजेंडा' लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, महीने भर के भीतर 2 लेटर मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां एक्टिव हो गई हैं. वो लेटर की जांच में जुट गई हैं. साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिरी इन लेटर्स को भेजने के पीछे किन आतंकवादी संगठन का हाथ है.

ULC पर संदेह

माना जा रहा है कि ये लेटर ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ (ULC) की ओर से जारी किया गया है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है यह ग्रुप ‘लश्कर-ए-तैयबा’ का ही एक हिस्सा है. सामने आए इन दोनों ही लेटर्स को कश्मीरी पंडितों को डराने-धमकाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. खासकर उन लोगों को, जो प्रधानमंत्री जॉब पैकेज के तहत अलग-अलग सरकारी विभागों में काम करने के लिए घाटी में वापस लौटे हैं. 

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छुट्टी पर भेजने का निर्देश

पहला लेटर सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने सभी विभागों में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने का निर्देश जारी किया. इसके अलावा कश्मीरी पंडितों को सुरक्षित जगहों पर सतर्कता के साथ रहने के लिए भी कहा. अधिकारियों ने ULC के बारे बताया कि यह संगठन पहली बार जुलाई 2026 में तब सामने आया था, जब उसने बुरहान वानी के एनकाउंटर वाले दिन एक पोस्टर जारी किया था. 

इससे पहले 7 अगस्त को आतंकवादियों की ओर से कश्मीरी पंडितों को धमकी देने वाला पहला लेटर सामने आया था. इसमें 6 कश्मीरी पंडितों के नाम और फोन नंबर थे. इस धमकी के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सरकारी विभागों को कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजने का निर्देश दिया था. इस लेटर में यूएलसी ने कश्मीर पुलिस को भी धमकी दी थी.

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