भारत के 30 रिटेल निवेशकों ने आरोप लगाया है कि उनके स्टॉक बिना उनकी जानकारी और इजाज के बेच दिए गए. उन शेयर्स को बेचने से मिली रकम से बड़ी संख्या में चीनी कंपनियों के शेयर खरीदे गए. इससे उन्हें करोड़ों का नुकसान हुआ है. मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है.
निवेशकों के 100 करोड़ रुपये डूबे, एप्पल-टेस्ला के शेयर बेच खरीदे चीनी कंपनियों के स्टॉक
भारतीय रिटेल निवेशकों ने आरोप लगाया है कि उनके स्टॉक उनसे बिना पूछे बेच दिए गए. और उससे मिली रकम से बड़ी संख्या में दूसरे शेयर खरीदे गए. इससे उन्हें करोड़ों का नुकसान हुआ है. वहीं, फिनटेक प्लेटफॉर्म ने इसकी ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया है.

निवेशकों का दावा है कि बेंगलुरु स्थित फिनटेक प्लेटफॉर्म ‘स्टॉकल सिक्योरिटीज’ ने ऐसा किया किया है. करीब 30 भारतीय निवेशकों ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनकी अनुमति के बिना उनके अमेरिकी स्टॉक पोर्टफोलियो तक पहुंच बनाई. एप्पल, टेस्ला जैसी कंपनियों के शेयर बेच दिए. आरोप है कि इससे मिली रकम का इस्तेमाल बहुत कम कारोबार वाले शेयर खरीदने के लिए किया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित निवेशकों को शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है. मगर दावा है कि नुकसान और अधिक हो सकता है. इस स्कैम के बारे में डिटेल में समझते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, ये ट्रांसेक्शन 15 अक्टूबर, 2026 को हुए थे. एप्पल (Apple), टेस्ला (Tesla), अमेज़न (Amazon), अल्फाबेट (Alphabet), एनवीडिया (Nvidia) और एएमडी (AMD) जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों में निवेशकों की होल्डिंग्स को कथित तौर पर उनकी सहमति के बिना बेच दिया गया. इसके बाद, इस पैसे का इस्तेमाल इन स्टॉक्स की तुलना में कम जानी-मानी कंपनियों के शेयर खरीदने में किया गया. जब इन शेयरों की कीमत गिरी तब निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा.
एक और विवाद स्कैम की ज़िम्मेदारी को लेकर है. स्टॉकल और अमेरिका स्थित क्लियरिंग ब्रोकर, ड्राइववेल्थ आमने सामने आ गए. विवाद इस बात को लेकर है कि सुरक्षा में चूक कहां हुई और इस समस्या को सुलझाने के लिए कौन जिम्मेदार होना चाहिए.
कैसे बेचे गए स्टॉक?एक निवेशक ने मनी कंट्रोल को बताया कि मेरे 10 अमेरिकी स्टॉक बेच दिए गए. स्टॉक को कुल 335,768 डॉलर में बेचा गया. इस रकम से 1.05 डॉलर प्रति शेयर की औसत कीमत पर नए शेयर खरीदे गए. इसमें ज्यादातर शेयर चीनी कंपनी झिबाओ (Zhibao) टेक्नोलॉजी इंकॉर्पोरेशन के हैं, जिसे शॉर्ट में ZBAO कहते हैं.
आरोप है कि शेयर खरीदे जाने के कुछ दिन बाद ZBAO के शेयर की कीमत में लगभग 60% की गिरावट आई. 23 अक्टूबर को ये 0.42 डॉलर पर बंद हो गया. निवेशक ने मनीकंट्रोल को बताया कि इन लेनदेन की वजह से उन्हें लगभग 450,000 डॉलर का नुकसान हुआ है. भारतीय रुपये में इसकी कीमत करीब 4.26 करोड़ है.
उन्होंने आगे बताया कि 18 अक्टूबर को स्टॉकल की पेरेंट कंपनी ने उन्हें उनके अकाउंट में कुछ संदिग्ध एक्टिविटी के बारे में बताया. फिर निवेशक ने सेबी (SEBI) में शिकायत दर्ज कराई और उनसे हस्तक्षेप की मांग की. साथ ही अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) से भी संपर्क किया.
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स्कैम का ज़िम्मेदार कौन?स्टॉकल ने मनीकंट्रोल को बताया कि इस एक्टिविटी के पीछे की वजहों की जांच कर रहे हैं. किस तरीके से इसे अंजाम दिया गया, हम इसकी भी पड़ताल कर रहे हैं. कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि शुरुआती आकलन से फिशिंग होने की आशंका है. ऐसा लग रहा है कि ग्राहक का ईमेल अकाउंट और उसके क्रेडेंशियल्स (लॉगिन जानकारी) से छेड़छाड़ की गई हो. कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि स्टॉकल प्लेटफॉर्म ब्रीच नहीं हुआ है.
दूसरी तरफ, ड्राइववेल्थ ने अक्टूबर 30 को निवेशक को लिखी एक चिट्ठी में बताया कि गलती उनकी नहीं है. स्टॉकल के इंटरफ़ेस से किसी थर्ड पार्टी ने ब्रीच किया है. ड्राइववेल्थ का ये भी आरोप है कि स्टॉकल ठीक से मामले को संभल नहीं पा रहा और उसकी वजह से सिक्योरिटी फेलियर हुआ है.
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