इस साल जनवरी की रिकॉर्ड ऊंचाई से सोने की कीमतों में भारी गिरावट आ चुकी है. गोल्ड के दाम 10 महीने के निचले स्तर पर आ गए. शनिवार, 31 अक्टूबर को दिल्ली के सराफा बाजार में सोने की कीमत 3,200 गिरकर 1 लाख 42 हजार रुपये प्रति दस ग्राम रह गई.
सोना 10 महीने में सबसे सस्ता, चांदी 55% लुढ़की, क्या अब खरीदारी का मौका?
दुनियाभर के कई केन्द्रीय बैंक अपने फॉरेक्स रिजर्व से सोना बेच रहे हैं. इसके अलावा सोने के तीन बड़ी खपत वाले देशों अमेरिका, चीन और भारत में सोने की ज्वेलरी की मांग घटी है

इस तरह से जनवरी के करीब 1 लाख 80 हजार 779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर से सोने के दाम करीब 21% या 38,779 रुपये तक से गिरे हैं. इंटरनेशनल मार्केट में जनवरी में 5,595 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जाने के बाद सोना अपने पीक से 30% से ज्यादा गिरकर 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया.
वहीं, इस साल जनवरी में करीब 4 लाख 20 हजार 48 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चांदी अब लगभग 55% नीचे है. शनिवार को दिल्ली सराफा बाजार में चांदी का भाव 1 लाख 86 हजार रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई.
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक ईरान युद्ध को लेकर जारी तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से सोने पर दबाव और बढ़ गया है. इससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और इस साल के आखिर में अमेरिका में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ गई हैं.
अपनी हालिया मीटिंग में अमेरिका के केन्द्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बैंक ने तीन साल में पहली बार इंटरेस्ट रेट बढ़ाए हैं. इन्वेस्टर्स को उम्मीद है कि आने वाली मीटिंग्स में भी सख्ती का ट्रेंड जारी रहेगा. इसके अलावा ज्वेलरी की डिमांड भी कम हुई है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के डेटा से पता चलता है कि दूसरी तिमाही के दौरान अमेरिका में ज्वेलरी की डिमांड 25%, भारत में 15% और चीन में 28% घटी है. वहीं, दुनियाभर के कई केन्द्रीय बैंक सोना बेच रहे हैं.
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जनवरी के रिकॉर्ड हाई से सोने के दाम तेजी से गिरे हैं. मार्केट एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि गिरावट का सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ है. बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) को उम्मीद है कि अगले तीन महीनों में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे रहेगा.
फाइनेंशियल सर्विस प्रोवाइडर आरमनी (RMoney) की सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट एंड रिसर्च मैनेजर मौमिता सामंता ने लल्लनटॉप से इस पर बातचीत में कहा है कि साल की शुरुआत से ही सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से शुरू किए गए टैरिफ युद्ध के बीच सोने की कीमतें बढ़कर 1 लाख 80 हजार 779 रुपये प्रति दस ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं. लेकिन फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से कच्चा तेल उबाल मारने लगा और अमेरिका के केन्द्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने सितंबर 2026 में तीन साल में पहली बार ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की.
ब्याज दरों की इस बढ़ोतरी ने सोने की कीमतों में आगे तेजी आने की राह मुश्किल कर दी है. इससे सोने की कीमतें गिरकर 1 लाख 39 हजार 889 प्रति दस ग्राम के निचले स्तर तक आ गईं. हालांकि, तेल की सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते मिलने और अमेरिका-रूस के बीच समझौते की खबरों से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई. इसके बावजूद ब्रेंट क्रूड का 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना सोने की कीमतों पर दबाव डाल रहा है.
तकनीकी नजरिए से देखें तो सोने की कीमतों में आगे तेजी के लिए 1 लाख 45 हजार प्रति दस ग्राम के स्तर से ऊपर टिके रहना जरूरी है. इसके बाद कीमतें 1 लाख 47 हजार प्रति दस ग्राम तक पहुंच सकती हैं. हालांकि, सोने में अच्छी खासी तेजी तभी देखने को मिलेगी, जब कीमतें 1 लाख 51 हजार 500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार करेंगी.
वहीं, अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं और दिसंबर में अमेरिका का केन्द्रीय बैंक ब्याज दरों में फिर 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा करता है तो सोने की कीमतें दोबारा गिरकर 1 लाख 39 हजार 800 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर तक गिर सकती हैं.
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