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रिकॉर्डतोड़ सोने की कीमतों ने बिगाड़ा बजट, 6 साल के निचले स्तर पर पहुंची खरीदारी

चीन के बाद भारत में सोने की खपत सबसे ज्यादा होती है. आमतौर पर भारत में धनतेरस और दिवाली के मौके पर गोल्ड की जमकर खरीदारी होती है. हालांकि, इस बार सोने के दामों में आई रिकॉर्ड ऊंचाई की वजह से खरीदारी कम हो रही है.

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सितंबर तिमाही में भारत का सोने का इंपोर्ट गिरा है (Courtesy: Aaj Tak)

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  • वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने 3 नवंबर को बताया कि इस साल सोने की मांग लगभग 650 टन रह जाएगी, जो 2020 के बाद सबसे कम है, क्योंकि ज्वेलरी और निवेश की मांग दोनों में गिरावट आई है।
  • भारत में सोने की कीमतों में 16.5% की वृद्धि हुई है, जिससे ज्वेलरी की खरीद कम हुई है और मानसून की कमी एवं महंगाई ने ग्रामीण क्षेत्रों में मांग को प्रभावित किया है।
  • सितंबर तिमाही में सोने के इंपोर्ट में कमी आई है, लेकिन दिसंबर तिमाही में दिवाली और शादियों के कारण सोने की मांग बेहतर होने की संभावना जताई गई है।

इस साल सोने के दाम तेजी से बढ़े हैं. इसका असर भारत की सोने की मांग छह साल के निचले स्तर पर आने की उम्मीद है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने मंगलवार 3 नवंबर को कहा कि सोना महंगा होने से ज्वेलरी की खरीद घटी है और निवेश मांग में भी कमी आई है. सोने-चांदी की कीमतों में आई इस तेजी की वजह से इस बार धनतेरस और दिवाली का त्योहार फीका रहने वाला है. 

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के बाद भारत सोने का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है. ईरान युद्ध और घरेलू परिस्थितियों की वजह से भारत में महंगाई बढ़ी है. पिछले साल नवंबर की तुलना में गोल्ड के दाम 16.5% तक महंगे हुए हैं. बढ़ी हुई कीमतों की वजह से लोगों ने ज्वेलरी खरीदना कम किया है. साथ ही अल नीनो के चलते भारत में मानसूनी बारिश में कमी रही है. इस वजह से फसलों का उत्पादन प्रभावित रहा है. इसका असर ग्रामीण इलाकों में भी सोने की मांग में कमी के तौर पर देखने को मिल रही है.

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मांग 650 टन रहने का अनुमान 

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (भारत) सचिन जैन ने कहा कि इस साल के पहले नौ महीनों में ज्वेलरी की मांग में गिरावट है. इससे कुल मांग घटकर लगभग 650 टन रह जाएगी. यह साल 2020 के बाद से सबसे कम है. साल 2020 में कोविड महामारी के कारण ज्वेलरी शॉप्स बंद होने से सोने की मांग में तेज गिरावट आई थी. सचिन जैन ने कहा कि सितंबर तिमाही में सोने की मांग साल-दर-साल 29% घटकर 162.5 टन रह गई

उन्होंने कहा कि दिसंबर तिमाही में डिमांड बेहतर होने की संभावना है, क्योंकि दिवाली और शादियों के मौसम जैसे खास त्योहारों से खरीदारी बढ़ेगी. अक्टूबर में नवरात्रि -दशहरा जैसे त्योहार और नवंबर में दिवाली का त्योहार है. इस दौरान सोना खरीदना शुभ माना जाता है. लेकिन खराब मॉनसून के बाद सोने की ऊंची कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कमजोरी से सोने की मांग पर असर पड़ने की संभावना है. 

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50% मांग ग्रामीण इलाकों से आती है

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक भारत की आधी से ज्यादा सोने की डिमांड ग्रामीण इलाकों से आती है. लाखों भारतीय परिवारों के लिए सोने सिर्फ ज्वेलरी नहीं है. यह भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का पारंपरिक साधन भी है.

इस साल मानसून ने एक दशक से ज्यादा समय में सबसे कम बारिश की, जिससे खेती का उत्पादन कम हुआ. किसानों की इनकम कम हुई है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (भारत) सचिन जैन ने कहा कि सितंबर तिमाही में भारत का सोने का इंपोर्ट गिरा. इसका एक कारण इस साल की शुरुआत में सरकार द्वारा कीमती धातु पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद तस्करी वाले सोने का आयात बढ़ा है.

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