क्या कोई प्राइवेट कंपनी आपके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) या इंप्लायी प्रॉविडेंट फंड (EPF) रिकॉर्ड से फाइनेंशियल जानकारियां हासिल कर सकती है? इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया है. प्राइवेट वेरिफिकेशन कंपनियां बैकग्राउंड चेक के नाम पर संवेदनशील जानकारी चुरा रही हैं. इन डिटेल का इस्तेमाल कंपनियां अपने फायदे के लिए कर रही हैं. कोर्ट ने सरकार को इन आरोपों की जांच का निर्देश दिया है.
बैकग्राउंड चेक के बहाने कंपनियां चुरा रहीं आपका पर्सनल डेटा? सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका में दावा किया गया है कि बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के नाम पर कंपनियां बड़ा खेल कर रही हैं. इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा गया कि EPFO/UAAN रिकॉर्ड और पैन कार्ड से जुड़ी डिटेल्स के साथ छेड़छाड़ हो रही है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई हो रही थी. इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि ईपीएफओ/यूएएन रिकॉर्ड और पैन से जुड़ी डिटेल्स की जांच और वेरिफिकेशन का एक धंधा चल रहा है. बैकग्राउंड चेक के लिए कंपनियां प्राइवेट वेरिफिकेशन फर्मों की मदद ले रही हैं. हालांकि, अदालत ने किसी खास कंपनी के अवैध रूप से ऐसे रिकॉर्ड तक पहुंच बनाने के मामले की पुष्टि नहीं हुई.
लेकिन इस पूरे मामले ने लाखों भारतीयों के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है. सवाल ये है कि क्या निजी कंपनियां सरकारी एजेंसियों के पास मौजूद संवेदनशील रोजगार और फाइनेंशियल डिटेल्स हासिल कर सकती हैं?
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट कंपनियों द्वारा संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी के कथित दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की . साथ ही, सरकार से इस मुद्दे की जांच करने को कहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत ने कहा कि सरकार को संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की मदद से इस समस्या का समाधान करने की कोशिश करनी चाहिए. अदालत ने सरकार और अन्य अधिकारियों को याचिकाकर्ता के एप्लिकेशन पर विचार करने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया. यह कार्रवाई चार महीने के भीतर की जानी चाहिए.
इसमें किस प्रकार का डेटा शामिल है?आयकर रिटर्न (आईटीआर) में आयकर विभाग के पास करदाता द्वारा दाखिल की गई वित्तीय जानकारी होती है. फॉर्म 26एएस और एआईएस यानी एनुअल वार्षिक सूचना विवरण सहित दूसरे टैक्स संबंधी रिकॉर्ड में भी व्यक्ति की आय और वित्तीय लेनदेन के बारे में संवेदनशील जानकारी हो सकती है .
ईपीएफओ के रिकॉर्ड कर्मचारियों के पीएफ अकाउंट से जुड़े होते हैं. वहीं, पीएफ खाताधारक का UAN यानी यूनिवर्सल अकाउंट नंबर की वजह से नौकरी बदलने पर भी बार-बार पीएफ अकाउंट नहीं खोलना पड़ता है . UAN के जरिए कर्मचारी के पीएफ डिटेल्स पता लगाना आसान है.
क्या कंपनियां आपके डेटा तक पहुंच सकती हैं?सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह नहीं कहा है किसी व्यक्ति का पैन या यूएएन डिटेल होने भर से किसी निजी कंपनी को उस नागरिक की संवेदनशील जानकारी मिल जाती है. न ही आईटीआर, भविष्य निधि रिकॉर्ड या नौकरी या रोजगार की पूरी जानकारी मिलती है.
कंपनियां डेटा वेरिफिकेशन क्यों करती हैं?कर्मचारियों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भर्ती प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा है. कंपनियां यह जांचना चाहती हैं कि क्या नौकरी के आवेदक ने पहले किसी कंपनी के साथ काम किया था या भर्ती प्रक्रिया के दौरान दी गई जानकारी सटीक है या नहीं.
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