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टाटा ट्रस्ट्स में सब ठीक नहीं? टेन्योर खत्म होने से पहले विजय सिंह SRTT से बाहर

आगामी 14 अगस्त को सर रतन टाटा ट्रस्ट में विजय सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा था. लेकिन उन्होंने उससे पहले ही इस्तीफा दे दिया है

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इसी साल मई में विजय सिंह ने टाटा एजुकेशन एवं डेवलपमेंट ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था (फोटो क्रेडिट: Aaj Tak)

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  • विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया, जो उनके कार्यकाल के खत्म होने से पहले आया है, जबकि उनका कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त होना था।
  • ट्रस्ट के भीतर मतभेद की खबरें और नियामकीय जांच, साथ ही महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर द्वारा जरूरी बैठकें रोकने की वजह से यह इस्तीफा आया है।
  • इस इस्तीफे के बाद, ट्रस्ट की बैठकों की अनुमति मांगने की प्रक्रिया चल रही है, क्योंकि बैठकों के न होने से 400 करोड़ रुपये के चैरिटेबल डिसबर्समेंट पर असर पड़ सकता है।

टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया. ये इस्तीफा उनके कार्यकाल के खत्म होने से पहले आया है. 14 अगस्त को ‘सर रतन टाटा ट्रस्ट’ में विजय सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा था लेकिन उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया.  इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर में यह जानकारी दी गई है. विजय सिंह इस ट्रस्ट से लंबे समय से जुड़े रहे हैं. फिलहाल, विजय सिंह ‘सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट’ के ट्रस्टी के रूप में एक और साल तक बने रहेंगे.

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विजय सिंह का यह इस्तीफा ऐसे समय में हुआ है जब ट्रस्ट के भीतर मतभेद की खबरें आई थीं. इसके अलावा ये ट्रस्ट नियामकीय (रेगुलेटरी) जांच का भी सामना कर रहा है. साथ ही सर रतन टाटा ट्रस्ट को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने जरूरी बैठकें करने से रोक रखा है. ट्रस्ट ने अपनी बैठकों को आयोजित करने की अनुमति मांगी है, जिसमें कहा गया कि मीटिंग न होने से करीब 400 करोड़ रुपये के चैरिटेबल डिसबर्समेंट (परोपकारी कामों के लिए होने वाले पेमेंट) पर असर पड़ने का खतरा हो सकता है.

TEDT से दे चुके इस्तीफा

ये फैसला ट्रस्टों के भीतर मतभेदों को उजागर करने वाले कई घटनाक्रमों के बाद आया है. इसी साल मई में, ट्रस्टी मेहली मिस्त्री की तरफ से दोबारा नियुक्ति का विरोध करने के बाद विजय सिंह और उनके साथी वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) से इस्तीफा दे दिया था. 

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मिस्त्री ने बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन के ट्रस्टी के रूप में सिंह और श्रीनिवासन की योग्यता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया था कि वे 1923 के ‘ट्रस्ट डीड’ की उन जरूरतों को पूरा नहीं करते हैं. इस डीड के अनुसार, ट्रस्टी का पारसी धर्म का पालन करने वाला और मुंबई का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है.

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टाटा सन्स में बड़ी हिस्सेदारी वाले ट्रस्ट

मामले से परिचित लोगों ने बताया कि टाटा संस की संभावित लिस्टिंग के पक्ष में सिंह के पहले के सार्वजनिक बयानों के बाद उन्हें सर रतन टाटा ट्रस्ट में दूसरे कार्यकाल के लिए साथी ट्रस्टियों का सर्वसम्मत समर्थन मिलने की संभावना भी कम थी. ‘सर रतन टाटा ट्रस्ट बोर्ड’ में चेयरमैन नोएल एन टाटा, वेणु श्रीनिवासन, विजय सिंह, जिमी एन. टाटा, जहांगीर एचसी और डेरियस खंबाटा शामिल हैं. सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट मिलकर टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी रखते हैं. 

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