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ट्रेनी से शुरुआत कर चेयरमैन बने, टाटा ग्रुप में एन चंद्रशेखरन की ऐसी रही यादगार पारी

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अचानक से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने ट्रेनी से इस समूह में सफर शुरू किया था और अब चेयरमैन की कुर्सी तक पहुंचे. अपने इस लंबे टेन्योर में उन्होंने ग्रुप को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाने का काम किया.

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चंद्रशेखरन ने साल 1987 में टाटा समूह से अपने कैरियर की शुरुआत की थी (फोटो क्रेडिट: India Today)

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  • एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2024 को टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया और वे फरवरी 2027 में खत्म होने वाले कार्यकाल के बाद पुनः आवेदन नहीं करेंगे।
  • चंद्रशेखरन ने समूह की कमान उस समय संभाली थी जब साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के कारण समूह में नेतृत्व संकट और भरोसे की कमी हुई थी।
  • उनके इस्तीफे के बाद टाटा समूह के शेयरों में गिरावट आई है और उनकी गैरमौजूदगी में समूह के नेतृत्व का नया रास्ता तलाशने की प्रक्रिया शुरू होगी।

एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) ने बुधवार 12 अगस्त को टाटा समूह (Tata Group) की पैरेंट कंपनी टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया. वे करीब दस साल से समूह के चेयरमैन बने हुए थे. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नमक से लेकर सॉफ्टवेयर बिजनेस में फैले टाटा ग्रुप को नया रूप दिया.

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि उनका कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है. लेकिन वे मौजूदा कार्यकाल खत्म होने पर दोबारा टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए आवेदन नहीं करेंगे.

टीसीएस में ट्रेनी इंजीनियर से शुरू कर टाटा संस के चेयरमैन बने

इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक चंद्रशेखरन ने टाटा समूह में करीब 40 साल काम किया. उन्होंने साल 1987 में टाटा समूह में कदम रखा था. तमिलनाडु के त्रिची स्थित 'रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज' के पूर्व छात्र चंद्रशेखरन ने 1987 में एक ट्रेनी/इंटर्न प्रोग्रामर के रूप में टीसीएस में काम शुरू किया था. अपनी मेहनत के बल वह साल 2009 में इस कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) बने. वे साल 2017 तक टीसीएस के सीईओ एंड एमडी रहे.

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टाटा संस की कमान संभालने वाले पहले गैर-पारसी 

इस बीच साल 2016 में वे टाटा समूह की पैरेंट कंपनी टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे. ये वह समय था जब साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था. इसके बाद जनवरी 2017 में चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया. चंद्रशेखरन टाटा समूह के 150 साल के कारोबारी साम्राज्य में पहले गैर पारसी थे जिन्हें टाटा संस की कमान मिली. उन्हें खुद रतन टाटा ने चुना था.

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मुश्किल समय में खेवनहार बने

चंद्रशेखरन ने साल 2017 में टाटा संस की कमान उस समय संभाली जब साइरस मिस्त्री को बाहर किये जाने के बाद समूह में उथल-पुथल मची थी. मिस्त्री को अचानक हटाए जाने के बाद समूह के प्रति लोगों में भरोसा घटा था और नेतृत्व संकट भी था. वे लंबे समय से टाटा समूह के भरोसेमंद व्यक्ति रहे थे.

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टाटा समूह ने की दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की

उनके कार्यकाल के दौरान टाटा समूह ने खूब तरक्की की. चंद्रशेखरन ने टाटा समूह में काफी लंबे वक्त तक काम किया. उनकी देखरेख में टाटा ग्रुप ने फिर से एयरलाइंस बिजनेस शुरू किया. एयर इंडिया खरीदी. सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और बैटरी के क्षेत्र में विस्तार किया. इसके अलावा समूह ने डिजिटल बिजनेस और इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी अपना ध्यान केंद्रित किया. 

इस विस्तार के लिए बड़े निवेश की जरूरत थी. हालांकि, टाटा ट्रस्ट के भीतर नए बिजनेस के प्रदर्शन और पैसे की जरूरत को लेकर मतभेद भी पैदा हुए. घाटे को कम करने के लिए चंद्रशेखरन ने कंपनी के घाटे में चल रहे टेलीकॉम बिजनेस (टाटा टेलीसर्विसेज ) को एयरटेल को बेचने के प्रोसेस की खुद निगरानी की थी.

इसके अलावा, मई 2018 में टाटा स्टील ने दिवालिया हो चुकी भूषण स्टील को 35,200 करोड़ रुपये में खरीदा .यह देश के कॉर्पोरेट इतिहास में अब तक के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक था. 
चंद्रशेखरन ने अपनी अगुवाई में मई 2021 में 9,500 करोड़ रुपये में बिग बास्केट खरीदी. कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में लगभग 9,900 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि घाटा बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ रुपये हो गया.

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चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह की मार्केट वैल्यू करीब 3 गुना बढ़ी

टाटा समूह द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार कुल राजस्व वित्त वर्ष 2020 में 7.89 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया. साथ ही टैक्स के बाद समूह का मुनाफा पांच गुना से अधिक बढ़कर 32,000 करोड़ रुपये से 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गया. 

टाटा समूह की शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप (शेयर बाजार में लिस्टेड शेयरों की कुल वैल्यू) वित्त वर्ष 2020 में 9.31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 24.39 लाख करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, वित्त वर्ष 2025 में यह 27.85 लाख करोड़ रुपये था.

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पत्नी ललिता के साथ मुंबई में रहते हैं चंद्रशेखरन

मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले 63 साल के चंद्रशेखरन अपनी पत्नी ललिता के साथ मुंबई में रहते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिजनेस और काम के अलावा फुर्सत के पलों में  फोटोग्राफी करना पसंद करते हैं. इसके अलावा, मैराथन रनर भी हैं और उन्हें म्यूजिक का काफी शौक है. 

माना जा रहा है कि चंद्रशेखरन के इस्तीफे का असर पूरे समूह पर पड़ेगा. वे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज , टाटा मोटर्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स सहित अन्य टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं. समूह पर पड़ने वाले असर की पहली झलक तब मिली जब उनके इस्तीफे के बाद कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली है. 

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