सोने की कीमतों में उछाल से इसकी तस्करी बढ़ी है. इकोनॉमिक की पत्रकार सुतानुका घोषाल की एक रिपोर्ट में उद्योग जगत के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि सोने की तस्करी बढ़ने से इसके वैध डीलरों और ज्वेलर्स को भारी नुकसान हो रहा है. इसकी वजह ये है कि तस्करी के तहत आए प्रति 10 ग्राम सोने पर 8,000 रुपये तक की छूट मिल रही है. मई में सोने पर आयात शुल्क 6% से बढ़कर 15% कर दिया गया था. इसके चलते सोने का अवैध बाजार और भी ‘आकर्षक’ हो गया है.
तस्करी वाला सोना कितना सस्ता? व्यापारियों की नींद उड़ गई है
सोेने की तस्करी बढ़ने से संगठित कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. भारत में हर साल करीब 700-800 टन सोने का आयात होता है

उद्योग जगत के अनुमानों के मुताबिक इस साल अवैध रास्तों से 100 टन से अधिक सोना भारत में आ सकता है. वहीं, पिछले कुछ दिनों से राजस्व खुफिया निदेशालय सोने की तस्करी करने वाले गिरोहों पर अपनी कार्रवाई तेज कर रहा है.
25 जुलाई को जारी ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश भर में खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए कई अभियानों में 27 किलोग्राम से ज्यादा विदेशों से तस्करी किया हुआ सोना जब्त किया गया. साथ ही 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
ये भी पढ़ें: चांदी 98 प्रतिशत चढ़ी, फिर भी निवेशकों को सिर्फ 18% रिटर्न क्यों मिला?
आयात शुल्क बढ़ने से तस्करी में इजाफासाल 2013 की शुरुआत में सोने के आयात शुल्क में 4% की बढ़ोतरी हुई थी. उस साल सोने का आयात पहली तिमाही में लगभग 10 टन बढ़ गया था. फिर साल 2014 की पहली तिमाही में सोने की तस्करी 7 गुना बढ़कर 70 टन पर पहुंच गई. इसके अलावा साल 2013 के आखिर और 2019 के बीच सोने पर आयात शुल्क 10% पर स्थिर होने के बावजूद भी तस्करी जारी रही. इस दौरान एक तिमाही में औसतन करीब 34 टन सोने का आयात हुआ.
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के अध्यक्ष राजेश रोकड़े ने कहा, “सोने की अवैध आमद से संगठित व्यापार को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है. सोने पर शुल्क बढ़ाने के बजाय निर्यात बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए. सरकार को सोने पर आयात शुल्क 15% से घटाकर 5% करने पर विचार करना चाहिए.”
वीडियो: आकाश आनंद को बसपा से निकाला, अशोक सिद्धार्थ की पोस्ट के बाद मायावती ने क्या कहा?













