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विदेश जाने वाले भारतीय लोग क्यों Covishield की वैक्सीन लगवाना चाहते हैं?

कोरोना वायरस से बचाव के लिए भारत में बनी भारत बायोटेक की वैक्सीन “कोवैक्सीन” (Covaxin) को लेकर विदेश जाने वाले भारतीय लोगों में संशय का माहौल है. दरअसल WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोवैक्सीन को अब तक मान्यता नहीं दी है और तो और कोवैक्सीन के इस्तेमाल को दुनिया के सिर्फ़ 8 देशों ने अब तक मंज़ूरी दे है. इन 8 देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूएई, रूस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड या यूरोप का कोई भी देश शामिल नहीं है. इन देशों में सबसे ज़्यादा तादाद में भारतीय लोग पढ़ने या काम करने के लिहाज़ से जाते हैं. हालांकि अभी तक किसी भी देश ने ऐसा नहीं कहा है कि कि वो कोवैक्सीन की डोज़ लिए किसी व्यक्ति को उनके देश में आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

Covaxin
सोर्स- https://covid19.trackvaccines.org/vaccines/9/

वहीं सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया की “कोविशील्ड” (Covishield) जोकि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी द्वारा बनाई वैक्सीन है, उसे 39 देशों ने मंज़ूरी दी है. वहीं ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका (Oxford Astrazeneca) की वैक्सीन को अब तक ब्रिटेन के अलावा 100 देशों ने मंज़ूरी दी है. इस वजह से भारतीय लोग जो विदेशों में काम करने या पढ़ने के लिहाज़ से जाना चाहते हैं वो कोविशील्ड वैक्सीन लगाने की ज़द्दोज़हत में जुटे हैं. कोविशील्ड और ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका दोनों वैक्सीन को WHO की मान्यता प्राप्त है.

Covishield
सोर्स-https://covid19.trackvaccines.org/vaccines/48/

मुख्य रूप से चिंतित लोगों में वे छात्र शामिल हैं जो यूजी और पीजी कार्यक्रमों के लिए विदेश पहुंचना चाहते हैं, जो आमतौर पर अगस्त-सितंबर के दौरान शुरू होते हैं. कई देशों में होटल क्वॉरंटीन करने का भी नियम है और क्योंकि होटलों का किराया बहुत महंगा है, इस वजह से कोविशील्ड का टीका लगवाना बहुत ज़रूरी हो जाता है.

इंडिया टुडे ने कुछ ऐसे छात्रों से बात कि जो अगले कुछ महीनों में अपनी उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले हैं. बैंगलोर के कृष्ण प्रसाद अपनी मास्टर डिग्री के लिए कनाडा जाने वाले हैं और कोविशील्ड वैक्सीन के टीके के लिए एक स्लॉट बुक करना चाहते हैं. वो कहते हैं, “मैं कोविशील्ड वैक्सीन स्लॉट की तलाश कर रहा हूं क्योंकि यह कनाडा सरकार की वेबसाइट में स्वीकृत टीकों की सूची में है.”

यूके और आयरलैंड जैसे अधिकांश देशों में कोविशील्ड एकमात्र ऐसा टिका है जो भारत में दिया जा रहा है और इसे उन देशों में भी मान्यता मान्यता प्राप्त है. भारत से आयरलैंड जाने वाले यात्रियों को कोविशील्ड टीकाकरण की ज़रूरत होती है ताकि उन्हें होटल में क्वॉरंटीन होने से छूट मिल सके.

मुंबई के आशीष कुमार अगले महीने ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं और वह भी कोविशील्ड का टीका लगाना चाहते हैं, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया ने अभी तक कोवैक्सीन को मान्यता नहीं दी है. आशीष नहीं चाहते हैं कि वो ऑस्ट्रेलिया पहुंचे और आखिरी मिनट में कोई अड़चन या समस्या हो. वो कहते हैं, “मुझे लगता है कि कोविशील्ड का टीका लेना सेफ़ होगा, क्योंकि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज़्यादा देशों की मंज़ूरी मिली है. आधिकारिक ज़रूरतों की बात अगर आएगी तो आसानी होगी.”

दुनियाभर में वैक्सीन से जुड़ी जानकारी देने वाली वेबसाइट covid19.trackvaccines.org के मुताबिक़ अब तक दुनियाभर में कुल 15 वैक्सीन को मंज़ूरी मिली है. इन वैक्सीन में सबसे ज़्यादा देशों में ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को 101 देशों में मंज़ूरी मिली है, जोकि भारत में कोविशील्ड के नाम से बिकती है.

ये वेबसाइट अपने बारे में कहती है, “COVID19 वैक्सीन ट्रैकर को दुनियाभर में COVID19 वैक्सीन के विकास और स्वीकृतियों के बारे में स्पष्ट, सुलभ और व्यापक अपडेट देने के लिए डिज़ाइन किया गया है.”

ये वेबसाइट कनाडा के मैकगिल यूनिवर्सिटी में जनसंख्या और वैश्विक स्वास्थ्य के स्कूल में महामारी विज्ञान और बायो स्टैटिस्टिक्स विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर निकोल ई बस्ता और प्रोफेसर एरिका ईएम मूडी के नेतृत्व में चलाई जाती है. इसमें महामारी विज्ञान, टीकाकरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, संक्रामक रोगों, बायो स्टैटिस्टिक्स से संबंधित विशेषज्ञों की टीम है. वेबसाइट का दावा है कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा का इस्तेमाल कर इस साइट को COVID19 वैक्सीन टेस्टिंग और अप्रूवल के डेटाबेस के तौर पर तैयार किया है.


 

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