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कोरोना के बिना लक्षण वाले मरीज़ों पर WHO ने अब क्या कहा है?

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) की एक वैज्ञानिक हैं मारिया वैन कारख़ोव. मारिया WHO की आउटब्रेक इन्वेस्टीगेशन टास्क फ़ोर्स की प्रमुख हैं. इन्होंने कहा था कि कोरोना के जो बिना लक्षण वाले केस हैं, उसके खोज और रोकथाम में बहुत वक्त लग रहा है. लेकिन ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है. क्योंकि बिना लक्षण वाले केस यानी एसिम्प्टोमैटिक केसों से दूसरे लोगों में कोरोना फैल सकता है, इसको लेकर कोई  पुख़्ता सबूत उपलब्ध नहीं हैं.

मारिया के कहने का मतलब ये था कि एसिम्प्टोमैटिक रोगियों से किसी और के संक्रमित होने का खतरा काफी कम होता है. इस बात के बाद लोगों ने राहत की सांस ली. लेकिन कई एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों ने इस पर सवाल दाग दिए. कई मेडिकल एक्सपर्ट्स ने तो मारिया के इस बयान को मज़ाक बताया था. सोशल साइट्स पर भी हंगामा हो गया.

मारिया ने सफाई ने क्या कहा?

मामला बढ़ने पर WHO ने मारिया के उस बयान को वापस ले लिया है, जिसपर उनकी खिंचाई हुई. मारिया ने सफाई देते हुए कहा कि उनका पिछला बयान सिर्फ 2-3 स्टडी पर आधारित था. यह कहना एक एक गलतफहमी होगा कि दुनिया में बिना लक्षण वाले मरीज़ों से संक्रमण बहुत कम फैलता है. इसको लेकर अभी काफी कुछ पता करना बाकी है. उन्होंने कहा कि वह WHO के किसी पॉलिसी का ऐलान नहीं कर रही थीं. सिर्फ सवालों के जवाब दे रही थीं. स्टडी के सिर्फ एक छोटे से हिस्से की बात कर रही थीं.

एसिम्प्टोमैटिक केस क्या है?

ऐसे लोग जिन्हें कोई बीमारी होती है लेकिन उनमें उसके कोई लक्षण नहीं होते वो एसिम्टोमैटिक कहलाते हैं. कोरोना वायरस के केस में इससे इन्फेक्टेड वो लोग जिन्हें सर्दी, खांसी, बुखार न हो, सांस लेने में कोई परेशानी न हो, वो एसिम्टोमैटिक कहलाएंगे. ज्यादातर मामलों में ऐसे लोगों को पता ही नहीं होता है कि वो संक्रमित हैं. ऐसे मे वो कोई परहेज़ नहीं रखते, लोगों से मिलते-जुलते हैं. इससे वायरस दूसरे लोगों में फैलने का खतरा और बढ़ जाता है.


विडियो- COVID-19 से ज़्यादा जानलेवा हैं सरकारों की ये गलतियां

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