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WHO ने कोरोना पर राहत देने वाली बात की तो दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने कहा, “अरी मोरी मईया!”

WHO के वैज्ञानिक ने कहा है कि कोरोना के जो बिना लक्षण वाले केस हैं, उनकी खोज और रोकथाम में बहुत समय लगाया जा रहा है. लेकिन ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है. क्योंकि बिना लक्षण वाले केस यानी asymptomatic केसों से दूसरे लोगों में कोरोना फैल सकता है, इस बारे में पुख़्ता सबूत उपलब्ध नहीं हैं. WHO के इस बयान के बाद वैज्ञानिकों ने पलटकर WHO से ही सबूत मांग लिए हैं.

कौन हैं वैज्ञानिक? डॉ. मारिया वैन कारख़ोव. डॉ. मारिया के ज़िम्मे कोरोना की टेक्निकल टीम है. उन्होंने कहा है,

“ऐसा शायद ही मुमकिन है कि बिना लक्षण वाले कोरोना पॉज़िटिव किसी और को कोरोना का इंफ़ेक्शन दे सकते हैं. ऐसे में सरकारों को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए कि लक्षण वाले कोरोना मरीज़ों में कोरोना की रोकथाम कैसे की जाए.”

उन्होंने आगे कहा,

“हमें पता चला कि कई सारे ऐसे देश हैं, जिन्होंने क़ायदे से कांटैक्ट ट्रेसिंग पर ज़ोर दिया. उन्हें बिना लक्षण वाले केस मिले. उन्होंने उन केसों की कांटैक्ट ट्रेसिंग की. लेकिन उनके बीच उन्हें इन्फ़ेक्शन नहीं मिला. और ऐसा होना बहुत ही दुर्लभ है. और इसके बारे में प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. बिना लक्षण वाले केसों की तुलना में जो लक्षण वाले व्यक्ति हैं, उनसे ज़्यादा फैलता है कोरोना.”

अब इस बयान के बाद वैज्ञानिक भी अपना सिर खुजाने लगे हैं. आशीष झा हॉर्वर्ड ग्लोबल हेल्थ इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर हैं. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहते हैं,

“WHO जो कह रहा है, उससे वायरस और उसके संक्रमण को लेकर पूरी समझ एकदम से बदल जाती है. ये कोई छोटी बात नहीं है. WHO की कही बात के बहुत सारे परिणाम हो सकते हैं. ऐसे में WHO को अपनी बात की सही संदर्भ के साथ व्याख्या करनी चाहिए.”

आशीष झा आगे कहते हैं,

“बिना लक्षण वाले केसों की वजह से ही तो ये बीमारी इतनी कठिन है. लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो इसकी वजह से पूरा गेम ही चेंज हो जाता है.”

अमेरिका के बॉस्टन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में रिसर्च कर रही डॉ. अवंतिका सिंह भी कुछ ऐसा ही कहती हैं. 

“किसी भी व्यक्ति में सिम्प्टम आने के पहले उस व्यक्ति से इन्फ़ेक्शन फैलने का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है. WHO को इस बारे में और विस्तार से बात करनी चाहिए. और सबूतों के साथ. क्योंकि इससे तो पूरा वायरस के स्प्रेड को लेकर जो हमारी सोच है, वो ही बदल जाती है.”

यानी WHO ने बताया कि साहब! इन्फ़ेक्शन नहीं फैल सकता तो वैज्ञानिकों ने कहा, “क्या मज़ाक़ कर रहे हैं?”


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