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मसरत आलम भट: हुर्रियत का नया नेता, जो सैयद अली शाह गिलानी से भी ज्यादा कट्टर है

कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को नया लीडर मिलने की खबरें आ रही हैं. मसरत आलम भट. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सैयद अली शाह गिलानी की मौत के छह दिन बाद मंगलवार 7 अगस्त को कथित रूप से ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (APHC) ने एक बयान जारी किया. इसमें मसरत आलम भट को नया हुर्रियत नेता बनाए जाने की घोषणा की गई है. हालांकि इस बयान की तस्दीक नहीं हो पाई है. ये भी कहा जा रहा है कि इस बयान के पीछे पाकिस्तान का हाथ हो सकता है. 7 सितंबर को पाकिस्तान रेडियो ने एक ट्वीट में दावा किया था कि APHC ने मसरत आलम भट को चेयरमैन नियुक्त किया है. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले में पाकिस्तान का दखल हो सकता है. मसरत आलम भट उसका करीबी माना जाता है.

कौन है मसरत आलम भट?

कट्टर अलगाववादी नेता है. बताया जाता है कि मसरत आलम इस मामले में सैयद अली शाह गिलानी से भी दो कदम आगे है. उस पर आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद देने का आरोप है, जिसके चलते भट 2019 से तिहाड़ जेल में बंद है.

2010 में कश्मीर के माछिल सेक्टर में सेना और आतंकियों की मुठभेड़ हुई थी. उसके बाद उस इलाके में विद्रोह शुरू हो गया था. बताया जाता है कि उसमें मसरत ने काफी अहम भूमिका निभाई थी.

मसरत के खिलाफ अब तक कुल 27 FIR दर्ज हो चुकी हैं. इनमें से ज्यादातर में या तो उसे बरी कर दिया गया है या जमानत पर छोड़ दिया गया है. 1 मार्च 2015 को मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही कुछ दिन बाद मसरत को जेल से रिहा कर दिया गया था. ये खबर जब दिल्ली पहुंची तो संसद में जमकर हंगामा हुआ.

17 अप्रैल 2015 को मसरत ने एक विरोध प्रदर्शन में पाकिस्तानी झंडा लहराया था, जिसके बाद केंद्र की तरफ से दबाव पड़ने पर मसरत को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन कश्मीर के अलगाववादी सोच वाले लोग मसरत को इतना पसंद करते थे कि उन्होंने घाटी में उसकी गिरफ्तारी को लेकर जमकर विरोध किया. हालात इतने बिगड़ गए थे कि 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री मुफ्ती ने मसरत को छोड़ दिया. इसके बाद 23 अप्रैल 2015 को भारत सरकार ने पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट का इस्तेमाल कर मसरत को फिर गिरफ्तार कर लिया.

गिलानी से ज्यादा कट्टर

मसरत आलम 1990 में मुश्ताक अहमद भट्ट के चलाए एक आतंकी संगठन हिजबुल्लाह से जुड़ा. 1993 में 26 अलगाववादी संगठनों ने मिलकर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को बनाया. सालों बाद सैयद गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से खफा होकर तहरीक-ए-हुर्रियत नाम का नया संगठन बनाया तो मसरत भी उनके साथ रहा. जल्दी ही मसरत गिलानी का विश्वासपात्र बन कर उभरा.

2008-10 के दौरान संगठन में मसरत आलम का कद काफी बढ़ गया था. 2010 में माछिल एंकाउंटर के बाद कश्मीर में विद्रोह शुरू हो गया. गिलानी के काफी मना करने के बाद भी उस विद्रोह में मसरत ने लोगों को पत्थरबाजी के लिए उकसाया था. वो अपने भड़काऊ विचारों के कारण कश्मीर के युवाओं में काफी लोकप्रिय हो गया था. बताया जाता है कि तहरीक-ए-हुर्रियत में काफी हद तक गिलानी से ज्यादा मसरत को पसंद किया जाने लगा था. मसरत के इन कामों को देखकर पाकिस्तान ने भी उसे समर्थन दिया और आज वो गिलानी के बाद संगठन का नेता है.

Separatist Leader Geelani Quits Hurriyat
सैयद अली शाह गिलानी लंबे वक्त तक हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन रहे. 2019 में उन्होंने ये पद छोड़ दिया था. उनकी एक पुरानी तस्वीर. (साभार- पीटीआई)

2019 में NIA ने पाया कि कश्मीर में सक्रिय जमात-उद-दावा, दुख्तरान-ए-मिल्लत और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों को मसरत आर्थिक मदद दे रहा था. अक्टूबर 2019 में NIA ने टेरर फंडिंग के आरोप में मसरत के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. लेकिन गिरफ़्तारी की भनक लगते ही मसरत छिप गया. करीब चार महीने तक तलाशी अभियान चलाए गए. यहां तक कि सरकार ने मसरत पर 10 लाख रुपये के इनाम की घोषणा भी की. आखिरकार उसे श्रीनगर के एक बाहरी इलाके से गिरफ्तार किया गया. तब से मसरत तिहाड़ जेल में बंद है.

1971 में श्रीनगर के जैनदार मुहल्ले में जन्मा मसरत आलम भट अब तक अपनी जिंदगी के 17 साल जेल में बिता चुका है. पाकिस्तान ने मंगलवार 8 सितंबर को मसरत को हुर्रियत का नेता चुना जाने वाला ट्वीट किया था. ऐसी खबरें हैं कि तब से कश्मीर में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है.

(आपके लिए ये स्टोरी हमारे साथी आयुष ने लिखी है.)


वीडियो- गिलानी की मौत के बाद कश्मीर में माहौल बिगाड़ने की साजिश कौन कर रहा है?

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