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Covaxin को WHO के एक्सपर्ट पैनल से इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिली

कोविड-19 की रोकथाम के लिए भारत में बने टीके कोवैक्सीन (Covaxin) को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तरफ से आपातकालीन उपयोग (EUL) के लिए रेकमेंड किया गया है. WHO के तकनीकी सलाहकार समूह ने 3 नवंबर को कोवैक्सीन को EUL स्टेटस देने की मंजूरी दे दी. इसके साथ ही Covaxin उन छह वैक्सीन में शामिल हो गई है, जिन्हें कोरोना महामारी के नियंत्रण के लिए WHO से आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिली है.

सरकारी सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया है कि फिलहाल केवल वयस्कों के लिए कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली है. इसे बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने बच्चों को ये वैक्सीन लगाने के लिए अभी WHO में अप्लाई नहीं किया है. तकनीकी सलाहकार समूह से मंजूरी मिलने के बाद WHO अब कोवैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल डेटा का आंकलन कर रहा है. हालांकि संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी के हवाले से एक सूत्र ने इंडिया टुडे को बताया है कि कोवैक्सीन के फायदे इसके नुकसान से कहीं ज्यादा हैं.

सरकार ने जताई खुशी

कोवैक्सीन को डब्ल्यूएचो से मिली मंजूरी पर केंद्र सरकार ने खुशी जताई है. स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने इसका श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी को देने में देर नहीं की. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है,

यह समर्थ नेतृत्व की निशानी है,
यह मोदी जी के संकल्प की कहानी है,
यह देशवासियों के विश्वास की ज़ुबानी है,
यह आत्मनिर्भर भारत की दिवाली है.

भारत में बनी कोवैक्सीन को इमरजेंसी उपयोग सूची में शामिल करने के लिए डब्ल्यूएचओ का धन्यवाद.

मंजूरी मिलने से होगा क्या?

इंडिया टुडे की मिलन शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 15 करोड़ लोगों को कोवैक्सीन लगी है. इन सभी के लिए ये एक अच्छी खबर है. कोवैक्सीन को WHO की मंजूरी मिलने में हुई देरी से लाखों लोगों को नुकसान हुआ. दूसरे देशों में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स, भारत के बाहर काम करने वाले लाखों लोग जिन्हें कोवैक्सीन लगी है वे इस अप्रूवल का इंतजार कर रहे थे. WHO की मंजूरी मिलने से पहले कोवैक्सीन लगवाने वालों को दूसरे देशों की यात्रा के बाद क्वांरटीन में रहना पड़ता था. वो भी खुद के खर्चे पर. उन्हें निटेगिव कोविड रिपोर्ट दिखानी पड़ती थी.

आमतौर पर WHO से इमरजेंसी अप्रूवल प्राप्त वैक्सीन को दूसरे देश भी मान्यता दे देते हैं. हालांकि इसके कुछ अपवाद भी हैं. जैसे कि यूरोप में ईएमए और अमेरिका में एफडीए से मंजूरी मिलने के बाद ही दूसरे देश उनकी कोरोना वैक्सीन आयात करने लगे थे. खैर, WHO की मंजूरी के बाद कौवैक्सीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा निर्यात किया जा सकेगा. जिन भारतीयों ने कौवैक्सीन लगवाई है, उन्हें क्वारंटीन नहीं होना होगा. कोवैक्सीन को अब विदेश यात्रा के लिए वैक्सीन पासपोर्ट में स्वीकृत वैक्सीन के रूप में मान्यता मिल जाएगी.

इससे पहले बीती 12 अक्टूबर को खबर आई कि Central Drugs Standard Control Organisation माने CDSCO की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने बच्चों के लिए कोवैक्सीन टीके को आपातकालीन अनुमति देने का फैसला कर लिया है. CDSCO ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी DCGI की एक शाखा है. ये भारत में दवाओं और मेडिकल उपकरणों को मंज़ूरी देने का काम करता है. यहां से अप्रूवल मिलने के बाद ही देश में किसी दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है. बता दें कि CDSCO की अनुमति के बाद भारत में कोवैक्सीन का टीका 2 साल से 18 साल तक के बच्चों दिया जा सकेगा.

फिलहाल कौवैक्सीन केवल वयस्कों को लगाई जा रही है. भारत बायोटेक ने टीके को आपातकालीन उपयोग वाली सूची (EUL) में शामिल करने के लिए इसी साल 19 अप्रैल को WHO को डेटा उपलब्ध कराया था. तब WHO के एक प्रवक्ता ने कहा था कि यदि समिति संतुष्ट होती है तो हम अगले 24 घंटों के भीतर किसी सिफारिश की उम्मीद करते हैं. कंपनी को उम्मीद थी कि जल्द ही अप्रूवल मिल जाएगा. लेकिन मामला टल गया. उसके बाद 26 अक्टूबर को भी कहा गया कि अगले 24 घंटे में मंजूरी पर विचार करेंगे. लेकिन फिर से भारत बायोटेक से डाटा मांग लिया गया. अब फाइनली टीके को संगठन की मंजूरी मिल गई है.

WHO कोरोना संकट के मद्देनजर अब तक छह टीकों को इमरजेंसी अप्रूवल दे चुका है. इन वैक्सीनों को फाइज़र-बायोएनटेक, एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन, मॉडेर्ना और सिनोफार्मा कंपनियों ने बनाया है.

कोवैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल मिलने के इंतजार के दौरान डब्लूएचओ के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा था कि किसी भी वैक्सीन को इस्तेमाल की मंजूरी देने से पहले उसका पूरी तरह से मूल्यांकन करना जरूरी होता है. इसकी सिफारिश की प्रक्रिया में कभी-कभी अधिक समय लग सकता है. उनका कहना था कि दुनिया को सही सलाह ही दी जानी चाहिए, भले ही इसमें एक दो सप्ताह अधिक लग जाएं.

बताते चलें कि CDSCO ने कोवैक्सिन की सेल्फ लाइफ 12 महीने तक बढ़ा दी है. यानी अब कोवैक्सिन को उसके निर्माण की तारीख के 12 महीने बाद तक इस्तेमाल किया जा सकेगा. भारत बायोटेक ने बताया कि उसकी कोरोना वैक्सीन की सेल्फ लाइफ से जुड़ा डेटा CDSCO के पास भेजा गया था, जिसकी जांच के बाद ये मंजूरी मिली है.


कोविशील्ड और कोवैक्सीन के मिक्स डोज को लेकर ICMR की स्टडी क्या कहती है?

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