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2003-04 ऑस्ट्रेलिया टूर से पहले सौरव गांगुली ने इरफान पठान को क्यों रिजेक्ट किया?

सौरव गांगुली. दादा के नाम से मशहूर पूर्व कैप्टन गांगुली यंग प्लेयर्स को सपोर्ट करने के लिए मशहूर हैं. उन्होंने हमेशा ही नए प्लेयर्स को मौके दिए और उन्हें आगे बढ़ाया. लेकिन अब पूर्व इंडियन ऑलराउंडर इरफान पठान ने इस बारे में अलग खुलासा किया है. पठान ने साल 2003 के ऑस्ट्रेलिया टूर को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने सौरव गांगुली का विश्वास जीता. साल 2003 के ऑस्ट्रेलिया टूर के वक्त पठान सिर्फ 19 साल के थे. उस वक्त ऑस्ट्रेलिया टेस्ट और वनडे, दोनों फॉर्मेट में दुनिया की नंबर एक टीम थी.

गांगुली इस टूर पर इरफान पठान को नहीं ले जाना चाहते थे. उन्होंने यह बात टूर के अंत में पठान को भी बताई थी. पठान ने इस बातचीत में अपने आइडल्स, वसीम अकरम और कपिल देव के बारे में भी बात की. इस टूर के बारे में बात करते हुए पठान ने ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप के यूट्यूब चैनल ‘स्पोर्ट्स तक’ से कहा,

‘वो एक जबरदस्त, यादगार दौरा था. मैं पहली बार इसी टूर पर वसीम अकरम से मिला था, जो मेरे आइडल थे. क्रिकेट में मेरे दो आइडल थे- कपिल देव और वसीम अकरम. कपिल देव, ऑलराउंडर. बेस्ट लीडर और गज़ब की स्विंग कराते थे. इंडिया में खेलना आसान नहीं था. देखिए पाकिस्तान में फिर भी आपके पास कूकाबूरा बॉल रहती है. एसजी का बॉल इतना तेज नहीं निकलता था. अभी अलग बात है, इसकी सीम बढ़ गई है, तो पेस बोलर्स की मदद करती है. लेकिन पहले ऐसा नहीं था.

उस जमाने में कपिल पाजी ने अपना जो नाम बनाया, वो काबिलेतारीफ है. उनको मैं काफी फॉलो करता था. फिर वसीम अकरम भी थे. वहां उनसे मिला, तो बहुत खुश था मैं. बहुत सी पॉजिटिव बातें भी की. ऑस्ट्रेलिया का टूर बड़ा टफ रहता है.

दादा के बारे में बात करते हुए इरफान ने टूर के आखिरी दिनों को याद किया. उन्होंने कहा,

दादा ने टूर के लास्ट दिनों में कहा था कि यार इरफान तुझे शायद नहीं पता होगा, लेकिन मैं ये तुझे बोलना चाहता हूं- इरफान, मैं नहीं चाहता था कि इस टूर पर तू आए. सेलेक्शन में मैंने मना कर दिया था. इसलिए नहीं कि मैंने तेरी बोलिंग देखी थी. बल्कि इसलिए क्योंकि मैं ऑस्ट्रेलिया के एक मुश्किल दौरे पर एक ऐसे खिलाड़ी को नहीं लाना चाहता था, जो 19 साल का हो. ऑस्ट्रेलिया का दौरा बड़ा मुश्किल है. लेकिन जब मैंने तुझे देखा, तो मैं एकदम श्योर था कि तू अच्छा करेगा. इसीलिए मैंने तुझे इतना सपोर्ट किया.’


इरफान ने आगे कहा,

‘इसके बाद दादा ने खूब सपोर्ट किया. दादा की एक बात बड़ी अच्छी थी कि अगर कोई लड़का उनको अच्छा लगता था, तो वो खूब सपोर्ट करते थे. उन्हें किसी और बात से फर्क नहीं पड़ता था. अगर उन्हें लगे कि लड़का टीम के लिए जान लगा रहा हो, तो वह उसे फुल सपोर्ट करते थे. दादा को फिर इससे फर्क नहीं पड़ता था कि ये कौन है या कहां से है.’

इस टूर की बात करें, तो इरफान ने दो टेस्ट मैचों में चार विकेट निकाले थे. लेकिन असली कमाल उन्होंने त्रिकोणीय वनडे सीरीज में किया. यहां इरफान ने 10 मैचों में 16 विकेट लिए. वह इस सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बोलर थे.


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