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लॉकडाउन में हर बड़े देश की इकॉनमी गोते खा रही है तो चीन कैसे उछल रहा है?

31 अगस्त, 2020 को GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े आए. फाइनेंशियल इयर 2020-21 की पहली तिमाही मतलब अप्रैल, मई और जून तीन महीनों के. ये आंकड़े हमारे लिए बहुत, बहुत चिंता बढ़ाने वाले हैं. क्योंकि देश में प्रॉडक्शन और सर्विस सेक्टर की ग्रोथ दिखाने वाला ये ग्राफ माइनस 23.90 फीसदी नीचे चला गया है.

अब सवाल ये उठता है कि क्या ऐसा भारत के साथ ही हुआ है? बाकी देशों का क्या हाल है. और इस ऐतिहासिक गिरावट की वजह क्या रही? आगे बढ़ने से पहले देशों की जीडीपी ग्रोथ दिखाने वाला ये ग्राफ देख लीजिए.

Gdp Graph
भारत और बाकी कुछ बड़े देशों की ग्रोथ रेट. (फोटो क्रेडिट- Business Today)

इस ग्राफ में आपने एक बात पर ध्यान दिया? सभी बड़े देशों की इकॉनमी माइनस में है. सभी G7 देशों का ग्रोथ रेट ज़ीरो से नीचे है. अमेरिका तो नंबरों में भारत से भी निचले पायदान पर है. लेकिन गौर कीजिए, चीन की जीडीपी प्लस में है. 3.2 फीसदी. जून से ही चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी तेजी दिखने लगी है. उसका आयात-निर्यात भी बढ़ा है. ऐसा क्यों है कि जब बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष कर रही हैं, तो चीन– जहां से कोरोना फैलना शुरू हुआ था– वो पॉज़िटिव ग्रोथ रेट हासिल कर रहा है?

इस पर इंडिया टुडे मैग्ज़ीन के एडिटर अंशुमान तिवारी बताते हैं–

“चीन में लॉकडाउन नेशनवाइड नहीं था. उन्होंने शुरू से ही हॉटस्पॉट्स को लॉकडाउन करने की रणनीति अपनाई. हमने दुनिया का सबसे बड़ा लॉकडाउन कर दिया. चीन में वो सेक्टर बंद थे, वो एरिया बंद थे, जहां प्रोडक्शन होता है. अब आप सोचिए कि इस तरह टुकड़ों में लॉकडाउन करके भी चीन की ग्रोथ रेट करीब 6 फीसदी से गिरकर 3 फीसदी पर आ गई.”

भारत की गिरावट बाकी देशों से भी बुरी

चीन का ग्रोथ रेट इसलिए नेगेटिव नहीं हुआ, क्योंकि उसने लॉकडाउन पर अलग पॉलिसी अपनाई. लेकिन फिर भारत की ग्रोथ रेट यूरोपीय देशों से भी ख़राब रही. ऐसा क्यों? इस पर बात करते हुए बिज़नेस टुडे के एडिटर राजीव दुबे कहते हैं–

“देखिए, इकॉनमिस्ट्स ने लगातार इस बारे में सचेत किया था. लगातार 16 तिमाही से हमारी जीडीपी घटती जा रही है. कहां 2016 में हम साढ़े 8-साढ़े 9 फीसदी के करीब थे, कहां अब गिरते-गिरते यहां आ गए. 48 महीनों तक हमने सिर्फ जीडीपी को गिरते देखा और उस पर कोई ख़ास कदम नहीं उठाए गए. जो कदम उठाने थे, वो ख़पत बढ़ाने के लिए उठाने थे. जबकि सरकार डिमांड बढ़ाने की कोशिश करती रही. 16 तिमाहियों तक हम गिरते रहे, फिर कोविड ने हमें हिट किया, इसीलिए हमारी गिरावट इतनी ज़्यादा रही.”

इन बातों के कन्क्लूडिंग नोट के तौर पर अंशुमान तिवारी ने बहुत अहम बात कही. उन्होंने कहा कि अव्वल तो हमारी कंपनियां अब 2-3 साल से पहले अपनी ग्रोथ वापस पाने की उम्मीद में ही नही दिख रही हैं. फिर उसके बाद भी जो भारत हमारे सामने होगा, वो वैसा नहीं होगा, जैसा फरवरी-मार्च 2020 तक था. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू में शाम को लोग बड़ी-बड़ी मार्केट में टहलते, खर्च करते दिखते थे. बड़े-बड़े रेस्टोरेंट, शॉप्स, लोगों की बेतहाशा ऑनलाइन शॉपिंग.. ये सब नजारे शायद ही अब दिखें.


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