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गुजरात के कोबरा कमांडो की मौत का मामला क्या है, जिसे लेकर परिवार सवाल उठा रहा है

गुजरात के रहने वाले एक कोबरा कमांडो की मौत के बाद परिवार उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहा है. दिल्ली से वड़ोदरा की ट्रेन यात्रा के दौरान जवान का शव मध्य प्रदेश के रतलाम में मिला था. परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका इंतजार किए बिना शव को दफना दिया. परिजनों ने पोस्टमॉर्टम पर सवाल उठाते हुए साजिश की आशंका जताई है. स्थानीय विधायक ने गृहमंत्री अमित शाह को लेटर तक लिखा है. हालांकि पुलिस हर तरह के आरोपों से इनकार कर रही है.

कोबरा कमांडो कौन होते हैं?

CoBRA कमांडोज. कोबरा माने Commando Battalion for Resolute Action. जिनका मोटो होता है. “Glory or Death”. कोबरा यूनिट का गठन ‘यूएस मेरिन कमांडो फोर्स’ की तर्ज पर हुआ था. कोबरा कमांडो भारत की उन 8 स्पेशलाइज फोर्सेज में से हैं, जिन्हें हर तरह की सिचुएशन में लड़ने की पूरी ट्रेनिंग दी जाती है. इनके पास हाईटेक वेपन सिस्टम और लेटेस्ट तकनीक होती है. चाहे गुरिल्ला वॉर हो या फील्ड इंजीनियरिंग, जमीन के नीचे बम छुपा हो, उसको खोज के डिफ्यूज करना हो या खाना न मिले और जंगल में सर्वाइव करना हो. कोबरा कमांडो हर सिचुएशन के लिए फिट होते हैं.

क्या है ये पूरा मामला?

इस खबर के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने इंडिया टुडे से जुड़े रतलाम के पत्रकार विजय मीणा और सोमनाथ जिले के पत्रकार कौशल वाई जोशी से बात की.

अजीत सिंह परमार. उम्र 24 साल. CRPF की कोबरा यूनिट में कमांडो थे. 205 बटालियन बिहार में. गुजरात में सोमनाथ के पास कोडिनार के रहने वाले थे. 13 नवंबर को छुट्टी पर आ रहे थे. अगस्त क्रांति राजधानी से. दिल्ली से वड़ोदरा तक का टिकट लिया था. दो महीने बाद अजीत की शादी थी. 13 नवंबर को रात 11 बजे अजीत सिंह ने अपनी मंगेतर हिना से फोन पर बात की. फिर उन्होंने कहा कि नींद आ रही है, वड़ोदरा पहुंचकर सुबह चार बजे कॉल करेंगे. लेकिन सुबह कोई कॉल नहीं आई. हिना ने सुबह 8.54 बजे कॉल किया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ.

14 नवंबर को ट्रेन जब मुंबई पहुंची तो एक सीट पर RPF को एक यात्री का मोबाइल फोन और बैग मिला. वहीं से परिवार को पता चला कि अजीत का सामान मुंबई पहुंच गया, मगर उनका अता-पता नहीं है.

दूसरी तरफ 14 नवंबर को सुबह करीब 10 बजे अजीत का शव पुलिस को मिला. वड़ोदरा से बहुत पहले मध्य प्रदेश के रतलाम में रेल की पटरी के पास.

रतलाम पुलिस ने शव की निशानदेही के लिए मीडिया, सोशल मीडिया का सहारा लिया. वहां से परिवार को 15 नवंबर को पता चला कि अजीत अब इस दुनिया में नहीं हैं.

Ajit Family Member
मीडिया से बात करते हुए जवान के परिजन.

परिवार के मुताबिक उनकी बात रतलाम पुलिस से 15 नवंबर की रात को हुई और उन्होंने 16 नवंबर की सुबह रतलाम पहुंच जाने की बात कही. रतलाम पहुंचने पर परिवार को पता चला कि अजीत को दफनाया जा चुका है. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने शव को लावारिस समझकर दफना दिया. जबकि नियम कहता है कि लावारिस शव भी 72 घंटे बाद दफनाया जाए.

पोस्टमॉर्टम पर परिजनों का क्या कहना है?

रिश्तेदार संदीप ने कहा,

‘आलोट थाना इंचार्ज दीपक जायसवाल ने हमसे पूछा कि कब तक पहुंच जाओगे, हमने बताया कि सुबह पहुंच जाएंगे. जब हम सुबह आलोट पहुंचे, तो इस मामले की जांच कर रहे पीएसआई चांडेल्य ने बताया कि हमने डेडबॉडी दफना दी है. हमने पूछा कि आपने डेडबॉडी इतनी जल्दी क्यों दफना दी. 14 तारीख को 10 बजे डेडबॉडी मिली. और शाम को दफना दिया. पुलिस ने बताया कि पोस्टमॉर्टम हो गया है. हमने रिपोर्ट मांगी. कहा गया कि चार घंटे में आ जाएगी. लेकिन रिपोर्ट नहीं आई. कहा गया कि दो दिन में आपको रिपोर्ट स्पीड पोस्ट कर दी जाएगी.’

संदीप शव को दफनाने पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाते हैं,

‘जहां डेडबॉडी को दफनाया गया था, हमने वहां खुदाई के दौरान देखा कि बॉडी को ठीक से दफनाया नहीं था. बॉडी देखकर हमें लगा कि बॉडी का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ है. अगर पीएम हुआ होता तो कपड़े वैसे नहीं होते. बॉडी पर किसी तरह का निशान नहीं था. हमने पैनल पीएम की मांग की.’

Ajit Parmar Body
घटना स्थल पर मौजूद पुलिस और परिजन, जहां जवान का शव दफनाया गया था.

पुलिस का क्या कहना है?

रतलाम के एसपी गौरव तिवारी ने परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, उनका कहना है,

13 और 14 की दरमियानी रात की घटना है. 14 तारीख की सुबह 10 बजे RPF ने आलोट पुलिस को खबर दी कि रेलवे ट्रैक किनारे एक डेडबॉडी पड़ी है. खबर मिलने के बाद थाना प्रभारी ने बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए रवाना किया. शिनाख्त के दौरान जेब से कोई आइडेंटिटी नहीं मिली और ना ही कपड़े से पता चला कि वो जवान है. पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने बॉडी को दफना दिया. जो भी हुआ रूल के हिसाब से ही हुआ. पुलिस ने सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से बॉडी के बारे में संदेश दिया कि कुछ पता चले तो आलोट थाने को बताएं.

उन्होंने आगे कहा,

RPF ने बताया कि मुंबई में एक व्यक्ति का सामान मिला है, लेकिन व्यक्ति गायब है. RPF ने परिवार को इस बारे में उसी के फोन से सूचना दी. परिजनों ने मिसिंग की रिपोर्ट दर्ज कराई है. फिर लोगों ने और पुलिस ने तलाश शुरू की. परिजनों ने 15 तारीख को थाना आलोट में संपर्क किया. फोटो के जरिए पहचान की. फिर यहां पहुंचे.

पोस्टमॉर्टम नहीं कराने के आरोप पर एसपी ने कहा,

मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कराया. डॉक्टर का स्पष्ट ओपिनियन है कि एक्सिडेंटल है. हेड इंजरी की वजह से मौत हुई है. लेकिन परिजनों ने मांग की कि डॉक्टरों के पैनल के जरिए पोस्टमॉर्टम हो. वीडियोग्राफी हो. उसके बाद हमने फिर से पोस्टमॉर्टम कराया. एडिशनल एसपी मामले की जांच करेंगे. को-पैसेंजर की डिटेल निकाल ली गई है. उनसे भी पूछताछ होगी. मुंबई RPF ने जो सामान जब्त किया है, उसे भी अपने कब्जे में लेंगे. अब तक कोई फैक्ट नहीं आया है, फिर भी हम इसकी जांच करेंगे.

एसपी ने बताया कि पैनल पोस्टमॉर्टम में भी मौत का कारण हेड इंजरी ही बताई गई है.

परिजनों का कहना है कि CRPF ने उनकी मदद नहीं की. कमांडो के भाई भरत ने कहा था,

‘हम लोगों ने चार दिन पहले CRPF कमांडिंग ऑफिसर को सूचना दी, लेकिन वो हमारे साथ कोऑपरेट नहीं कर रहे हैं. हम अपनी तरफ से जांच करके इधर पहुंचे हैं. उनकी तरफ से कोई सिंगल आदमी सपोर्ट करने के लिए नहीं आया. हमको फोन पर ही बता रहे हैं ऐसा करो, वैसा करो. हम लोगों ने मांग की है कि आप लोग यहां आएं, जवान को जो सम्मान मिलना चाहिए. लेकिन वो गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए मना कर रहे हैं. CRPF की ओर से लापरवाही हो रही है.’

Ajit Brother
कमांडो के बड़े भाई का आरोप है कि सीआरपीएफ ने उनकी हेल्प नहीं की.

रतलाम से परिजन शव लेकर गांव पहुंचे. सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. बड़ी संख्या में लोगों ने जवान के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया. अंतिम संस्कार के बाद परिजनों ने स्थानीय प्रशासन से मिलकर CBI जांच की मांग की. स्थानीय विधायक ने गृहमंत्री को लेटर लिख उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. सोशल मीडिया पर लोग लगातार पोस्ट लिखकर जांच की मांग कर रहे हैं. इस मामले में आलोट पुलिस की जांच जारी है.


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