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अयोध्या फैसले से असंतुष्ट मुस्लिम पक्ष के पास कौन से दो रास्ते बचे हैं, जान लीजिए

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अयोध्या भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. अपने फैसले में अदालत ने कहा है कि विवादित ज़मीन पर रामलला का दावा माना गया है. मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही कहीं और पांच एकड़ ज़मीन दी जाएगी. पांचों जजों की खंडपीठ ने सर्वसम्मति से ये फैसला लिया. अदालत के इस फैसले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से प्रतिक्रिया आई. बोर्ड के वकील ज़फरयाब जिलानी ने कहा कि वो फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन इससे संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने कहा कि बोर्ड अपनी आगे की रणनीति पर विचार करेगा.

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क्लिक करके पढ़िए दी लल्लनटॉप पर अयोध्या भूमि विवाद की टॉप टू बॉटम कवरेज.

पढ़ें: अयोध्या फैसले से ज़फरयाब जिलानी संतुष्ट नहीं, कहा- कोर्ट में गलत तथ्‍य पेश किए गए

ज़फरयाब के कहे में ये लाइन भी थी-

हम फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. फैसले में बहुत अधिक विरोधाभास है. हम इसकी समीक्षा की मांग करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट पक्ष के पास रिव्यू पीटिशन यानी पुनर्विचार याचिका दायर करने अधिकार है. ज़फरयाब जिलानी की बातों से लग रहा है कि वो इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे. तो इसी संदर्भ में हम आपको बता रहे हैं कि पुनर्विचार याचिका क्या होती है.

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क्या होता है रिव्यू पिटीशन?
पुनर्विचार याचिका. यानी अंग्रेज़ी में रिव्यू पिटीशन. इसमें अदालत के दिए किसी फैसले पर पक्षकार कोर्ट से आग्रह करता है कि वो अपने निर्णय पर फिर से विचार करे. इसे दाखिल करने की एक मियाद होती है. अगर रिव्यू पिटीशन डालनी है, तो फैसला दिए जाने के 30 दिन के भीतर डाली जानी होगी. कोई भी पक्षकार फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है.

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पिटीशन दाखिल होने के बाद की क्या प्रक्रिया है?
याचिका दाखिल होने के बाद गेंद होती है अदालत के पाले में. कोर्ट तय करेगा कि वो पुनर्विचार याचिका को कोर्ट में सुने या फिर चैंबर में. बेंच अपने स्तर पर ही याचिका खारिज कर सकती है. या फिर इससे ऊपर के बेंच में इसे ट्रांसफर कर सकती है. हालांकि कोर्ट के फैसले से जुड़ा अब तक का इतिहास बताता है कि बेंच अपने स्तर पर ही याचिका पर फैसला लेता है. रिव्यू पिटीशन में सुप्रीम कोर्ट को फैसले की गलतियों के बारे में बताना होता है. इसमें वकीलों की जिरह की जगह फैसले के रेकॉर्ड्स पर विचार होता है. कोर्ट अपने अधिकार के तहत याचिका को तुरंत सुनने, बंद कमरे में सुनने या खुली अदालत में सुनने का फैसला करेगी.

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रिव्यू पिटीशन के बाद भी बचेगा एक मौका
पुनर्विचार याचिका के अलावा भी एक मौका होता है- क्यूरेटिव पिटीशन का. सुप्रीम कोर्ट की ओर से पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाए जाने के बाद इस विकल्प का नंबर आएगा. कोर्ट के फैसले के खिलाफ यह दूसरा और अंतिम विकल्प है. हालांकि क्यूरेटिव पिटीशन पुनर्विचार याचिका से थोड़ा अलग है. इसमें फैसले की जगह मामले से जुड़े उन मुद्दों या विषयों को चिह्नित करना होता है, जिसमें उन्हें लगता है कि इन पर ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है. इस क्यूरेटिव पिटीशन पर भी बेंच सुनवाई कर सकता है. या फिर इसे खारिज कर सकता है. फैसला पूरी तरह से कोर्ट के ऊपर है. इस स्तर पर फैसला होने के बाद केस खत्म हो जाता है. इसके बाद जो भी निर्णय आता है, वही सर्वमान्य होता है.


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