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गुजरात सरकार ने पीएम मोदी की फसल बीमा योजना को सस्पेंड क्यों कर दिया?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY). मोदी सरकार की बहुप्रचारित योजना. अब गुजरात में एक साल के लिए यह योजना सस्पेंड कर दी गई है. PMFBY में प्रीमियम की मोटी रकम को इसकी वजह बताया गया है. मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने 10 अगस्त को यह ऐलान किया. उन्होंने इसकी जगह ‘मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना’ (MMKSY) लागू की. रुपाणी ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को सुरक्षा मिलती है. लेकिन इस साल इंश्योरेंस कंपनियों ने प्रीमियम यानी बीमा कराने की फीस काफी ज्यादा रखी है. इससे राज्य के खजाने पर बोझ पड़ेगा. इसलिए इस साल गुजरात में यह योजना लागू नहीं होगी.

तो अब यह जान लेते हैं कि मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना क्या है? यह कैसे काम करेगी? और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से कितनी अलग है?

पहले बात प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की

-13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना लॉन्च की थी.

-फसल बीमा योजना के तहत किसानों को फसल बोने के दस दिनों के भीतर बीमा कराना होता है. बाढ़, बारिश, ओला या अन्य किसी प्राकृतिक आपदा से यदि फसल को नुकसान पहुंचता है तो किसान को बीमा का लाभ दिया जाता है.

-किसी भी किसान को खरीफ के लिए कुल बीमा की राशि का 2 फीसदी प्रीमियम देना पड़ता है. खरीफ में धान, बाजरा, मूंगफली, मूंग, ग्वार जैसी फसलें आती हैं.

-रबी की फसल के लिए कुल बीमा राशि का 1.5 फीसदी प्रीमियम देना पड़ता है. रबी में गेहूं, जौ, चना, मेथी, सरसों जैसी फसलें आती हैं.

फसल बीमा योजना लागू करने का मकसद किसानों को आर्थिक मदद देना था.
फसल बीमा योजना लागू करने का मकसद किसानों को आर्थिक मदद देना था.

-अगर कोई नकदी फसल या बागवानी की फसल है तो इसके लिए किसान को कुल बीमा राशि का 5 फीसदी प्रीमियम देना पड़ता है. नकदी फसलों में कपास, जूट जैसे नाम शामिल होते हैं. बाकी का पैसा केंद्र और राज्य सरकारें इंश्योरेंस कंपनियों को देती हैं. दोनों का हिस्सा आधा-आधा होता है.

इसे ऐेसे समझिए-

राजू जयपुर जिले के एक किसान हैं. उन्होंने एक हेक्टेयर में बाजरा बोया. इंश्योरेंस कंपनी ने इसके लिए 10 हजार रुपये बीमित राशि तय की. यानी बाजरे की फसल बाढ़, सूखे से खराब हो गई तो राजू को 10 हजार रुपये मिलेंगे. इसके लिए राजू के बैंक खाते से दो प्रतिशत प्रीमियम काटा जाएगा. यानी लगभग 200 रुपये का प्रीमियम राजू को देना पड़ेगा. प्रीमियम में बाकी पैसा सरकार देती है. सरकार का हिस्सा बीमित रकम का लगभग छह प्रतिशत होता है. यानी सरकार राजू के बाजरे के इंश्योरेंस के लिए करीब 600 रुपये देगी. इस तरह कुल प्रीमियम 800 रुपये हो गया.

यहां यह बात ध्यान रखें कि प्रीमियम की रकम इंश्योरेंस कंपनियां तय करती हैं. यह फसल, जिले और राज्य के हिसाब से अलग-अलग होती है. पहले यह योजना हर किसान के लिए अनिवार्य थी. लेकिन फरवरी 2020 में सरकार ने इसे ऐच्छिक कर दिया. यानी किसान के मन को भाए तो लो, नहीं तो मत लो.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (फोटो: पीटीआई)
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी (फोटो: पीटीआई)

गुजरात ने इसे क्यों सस्पेंड कर दिया?

गुजरात सरकार का कहना है कि इस बार खरीफ की फसल के लिए इंश्योरेंस कंपनियों ने प्रीमियम ज्यादा रखा है. इससे राज्य और केंद्र पर मिलाकर 5700 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. आमतौर पर गुजरात खरीफ की फसल के दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 1700 से 1800 रुपये प्रीमियम में चुकाता था. इतना ही पैसा केंद्र भी देता था. लेकिन इस बार यह आंकड़ा 2700 से 2800 करोड़ रुपये के बीच हो गया है. साथ ही सरकार कह रही है कि किसान भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से खुश नहीं हैं.

जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए प्रीमियम भरा, उनके पैसों का क्या?

गुजरात सरकार का कहना है कि वह पैसा किसानों को वापस मिल जाएगा. इंश्योरेंस कंपनियां प्रीमियम की रकम को किसानों के बैंक खातों में जमा कर देंगी.

फसल बीमा योजना के बारे में मोदी सरकार ने दावा किया था कि इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी.
फसल बीमा योजना के बारे में मोदी सरकार ने दावा किया था कि इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी.

अच्छा, यह मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना क्या है?

यह एक अस्थाई योजना है. जो केवल एक साल के लिए ही है. इसके तहत गुजरात सरकार राज्य के सभी 56 लाख किसानों की फसलों को कवर करेगी. वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 15-16 लाख किसान ही अपनी फसलों का बीमा कराते थे. मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना कई मायनों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से अलग है. नीचे दी गई टेबल में आप यह अंतर देख सकते हैं.

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कैसे लागू होगी मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना

इसके लिए एक वेबसाइट बनाई जाएगी. इसमें जमीनों के रिकॉर्ड लिंक किए जाएंगे. किसानों को सबसे पहले ई-ग्राम सेंटर पर जाना होगा. वहां पर योजना की वेबसाइट के जरिए किसान ऑनलाइन एप्लीकेशन भरनी होगी. इसके बाद जिला कलेक्टर सूखा, भारी बारिश या बेमौसम बारिश से प्रभावित पंचायत और गांवों की लिस्ट तैयार करेगा. फिर यह लिस्ट राजस्व विभाग को भेजी जाएगी. इसके बाद जिला विकास अधिकारी के नेतृत्व में सर्वे टीम बनाई जाएगी. 15 दिन में इन्हें रिपोर्ट देनी होगी. रिपोर्ट के आधार पर नुकसान तय होगा और फिर प्रभावित किसानों के खाते में पैसे जमा किए जाएंगे.

अब देखना होगा कि यह योजना कैसे फलीभूत होगी. क्योंकि अक्सर सरकारी योजनाएं गाजे-बाजे के साथ आती हैं, फिर विफलता का स्मारक बन जाती हैं.


Video: PM नरेंद्र मोदी सरकार ने किसान के लिए PMFBY में बड़े बदलाव किए हैं

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