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भीमा कोरेगांव केस: क्या सुरेंद्र गडलिंग के कंप्यूटर में 'सबूत' प्लांट किए गए?

ऐक्टिविस्ट स्टेन स्वामी की मौत के एक दिन बाद एक और मानवाधिकर कार्यकर्ता और वकील सुरेंद्र गडलिंग को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. चर्चित अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि सुरेंद्र गडलिंग के कंप्यूटर में आपत्तिजनक फाइलें जानबूझकर डाली गई थीं. रिपोर्ट के अनुसार, गडलिंग के कंप्यूटर में 16 फरवरी 2016 से साइबर हमला शुरू हुआ था. इसमें एक तय पैटर्न के तहत उनके कंप्यूटर में आपत्तिजनक फाइलें प्लांट की गईं, जिन्हें बाद में सबूत की तरह पेश किया गया. इन्हीं ‘सबूतों’ के आधार पर 6 अप्रेल 2018 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सुरेंद्र गडलिंग को हिरासत में लिया था. तब से वे जेल में हैं.

कौन है सुरेंद्र गडलिंग?

नागपुर के रहने वाले सुरेंद्र गडलिंग, स्टेन स्वामी की तरह एक मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील हैं. वे दलित-आदिवासियों के मुद्दों को उठाते रहे हैं. सुरेंद्र गडलिंग को गढ़चिरौली और गोंदिया जिलों में अवैध हत्याओं, पुलिस ज्यादतियों, फर्जी मामलों और दलितों-आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार के मामलों को उजागर करने के लिए जाना जाता है. गडलिंग उस फैक्ट फाइंडिंग टीम का भी हिस्सा थे, जिसने अप्रैल 2018 में गढ़चिरौली में पुलिस द्वारा 40 कथित माओवादियों को मार गिराने के मामले की जांच की थी. इसके बाद भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में उनका नाम सामने आया. NIA ने माओवादियों से संबंध होने के आरोप में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को जेल में डाल दिया था. इनमें सुरेंद्र गडलिंग भी शामिल हैं.

कैसे हुआ कथित साइबर हमले का खुलासा?

वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में अमेरिका के मैसच्युसेट्स स्थित डिजिटल फॉरेंसिक फर्म आर्सेनल कंसल्टिंग की जांच का हवाला दिया है. रिपोर्ट में सुरेंद्र गडलिंग के कंप्यूटर में मैलवेयर (एक ऐसा सॉफ्टवेयर जिससे कंप्यूटर में घुसपैठ की जाती है) हमलों का जिक्र किया गया है.

आर्सेनल कंसल्टिंग के चैयरमैन मार्क स्पेंसर के अनुसार,

भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किए गए दो ऐक्टिविस्ट रोना विल्सन और सुरेंद्र गडलिंग के कंप्यूटरों में साइबर हमला करने वाला हमलावर (यानी हैकर) एक ही था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2016 से नवंबर 2017 के बीच गडलिंग के कंप्यूटर से छेड़छाड़ की गई थी. इस दौरान उनके सिस्टम में कम से कम 14 आपत्तिजनक पत्र ‘प्लांट’ किए गए. वहीं, रोना विल्सन के सिस्टम को भी निशाना बनाया गया और वहां 30 फाइलें लगाई गईं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, NIA ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि मामला अभी विचाराधीन है.

दावों का आधार क्या है?

दरअसल, सुरेंद्र गडलिंग के कंप्यूटर हार्ड ड्राइव को पुलिस ने जब्त कर लिया था, लेकिन उसकी एक कॉपी उनके वकीलों को दी गई थी. इसी हार्ड ड्राइव कॉपी को गडलिंग के वकीलों ने आर्सेनल कंसल्टिंग के साथ साझा किया था. इसके बाद आर्सेनल ने जांच शुरू की. इसमें उसे पता चला कि हैकर ने फरवरी 2016 में ईमेल के जरिए गडलिंग के कंप्यूटर में मैलवेयर पहुंचाकर इसका इस्तेमाल किया. इस पूरे काम को 29 फरवरी 2016 तक अंजाम दे दिया गया.

वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, हमलावर ने मैलवेयर को गडलिंग के परिचितों और रिश्तेदारों के ईमेल के साथ पैक करके भेजा था. इसके जरिये गडलिंग के कंप्यूटर में ‘मटीरियल’ नाम से फोल्डर बनाया गया. दिसंबर 2016 से अक्टूबर 2017 के बीच इस फोल्डर में 14 आपत्तिजनक पत्र पहुंचाए गए. बाद में इन्हें माओवादी संगठनों और नेताओं से जुड़ा हुआ बताया गया.

आर्सेनल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फरवरी 2016 तक हमलावर ने ना केवल गडलिंग के कंप्यूटर में घुसपैठ की थी, बल्कि भीमा कोरेगांव मामले के कई आरोपियों के ईमेल अकाउंट्स से भी छेड़छाड़ की थी. गौरतलब है कि स्टेन स्वामी और सुधा भरद्वाज ने भी अपने कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ किए जाने की बात कही थी.

क्या है भीमा कोरेगांव मामला?

1 जनवरी 2018 को पुणे में दलित समाज के लोगों का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसी दौरान हिंसा भड़क गई थी. इसमें एक व्यक्ति की मौत हुई थी और कई लोग जख्मी हुए थे. मामले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें स्टेन स्वामी, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, सुरेंद्र गडलिंग और रोना विल्सन के अलावा अन्य ऐक्टिविस्ट, बुद्धिजीवी, कवि और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी शामिल हैं. कहा गया कि हिंसा के पीछे एल्गार परिषद नाम का एक कार्यक्रम जिम्मेदार था, जिसे हिंसा से एक दिन पहले आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम के आयोजकों पर माओवादी संगठनों से जुड़े रहने का आरोप लगाया गया और उन पर यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) की कई धाराएं लगाई गईं.

ये स्टोरी हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहे रौनक ने लिखी है.


वीडियो- भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी स्टैन स्वामी के निधन पर क्या सवाल उठे?

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