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'पाताल-लोक' सीरीज़ की किस बात को लेकर प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा को नोटिस भेजा गया है?

15 मई, 2020 को रिलीज़ हुई नौ एपिसोड की वेब सीरीज़ ‘पाताल-लोक’. इसे अनुष्का शर्मा ने प्रोड्यूस किया है. कहानी लिखी है सुदीप शर्मा ने. इसमें एक डायलॉग को लेकर विवाद हो गया है. वीरेन श्री गुरुंग, वकील हैं, गिल्ड के सदस्य हैं. मुफ्त कानूनी सलाह देते हैं. और प्रणय राय एंड एसोसिएट्स के चैंबर्स से जुड़े हैं. उन्होंने अनुष्का शर्मा को एक कानूनी नोटिस भेजा है. शो में इस्तेमाल हुए एक डायलॉग को लेकर.

द क्विंट की खबर के मुताबिक, श्री गुरुंग ने कहा कि ‘पाताल-लोक’ के दूसरे एपिसोड में एक शब्द का इस्तेमाल किया गया है. यह पूरे नेपाली समुदाय का अपमान करता है. उन्होंने कहा,

एक वीडियो क्लिप में पूछताछ के दौरान लेडी पुलिस ऑफिसर नेपाली कैरेक्टर पर जातिवादी गाली का इस्तेमाल करती है. अगर केवल नेपाली शब्द का इस्तेमाल किया गया होता, तो इसमें कोई समस्या नहीं थी. लेकिन इसके बाद का जो शब्द है, वह अस्वीकार्य है. चूंकि अनुष्का शर्मा इस शो की निर्माता हैं, इसलिए हमने उन्हें नोटिस दिया है. अनुष्का शर्मा से की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

गोरखा समुदाय भी नाराज

‘द हिन्दू’ की एक खबर के मुताबिक, गोरखा समुदाय ने ‘पताल-लोक’ के इस डायलॉग पर आपत्ति जताई है. उसने इस शब्द को हटाने की मांग की है. 18 मई को उनकी ओर से एक ऑनलाइन याचिका चलाई गई. इसमें केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, अमेजन प्राइम वीडियो और सीरीज की निर्माता अनुष्का शर्मा को संबोधित करते हुए कहा गया है कि ‘पताल-लोक’ के इस डायलॉग में गोरखा महिलाओं को गलत चित्रित किया गया है.

‘पाताल-लोक’ की कास्टिंग के कलाकार
‘पाताल-लोक’ की कास्टिंग के कलाकार

उन्होंने कहा कि इस शब्द को म्यूट किया जाना चाहिए, सबटाइटल ब्लर किया जाना चाहिए और एडिटेड वीडियो को सभी के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए. इसके अलावा, गोरखाओं ने बिना शर्त माफी मांगने की बात कही है.

गोरखा युवा परिषद का क्या कहना है?

भारतीय गोरखा युवा परिषद ने याचिका में कहा है कि पात्रों में से एक का नाम मैरी लिंगदोह है, जो मेघालय के खासी समुदाय के लिए एक सामान्य उपनाम है. एक पुलिसवाले द्वारा उसका अपमान किया जाना पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति रूढ़िवादिता को दिखाता है. गोरखा सबसे बड़ा नेपाली-भाषी समुदाय है और यह शब्द पूरे कबीले को प्रभावित करता है.

भारतीय गोरखा युवा परिषद के अध्यक्ष नंदा किरती देवन ने ‘द हिंदू’ को बताया कि जिस तरह से इस शब्द का इस्तेमाल किया गया है, वह रिग्रेसिव था. उन्होंने कहा कि हमें क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर इस तरह की चीजों से बचना चाहिए.

नंदा का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से समुदाय पहले ही नस्लभेदी कमेंट झेल रहा है. ‘पताल-लोक’ का यह डायलॉग न केवल उनकी परेशानियों को बढ़ाएगा, बल्कि महिलाओं के रेप के प्रयासों को उकसाएगा. उन्होंने कहा कि इस सीरीज की प्रोड्यूसर और ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन की तरफ से कई जवाब नहीं मिलता है, तो इस मामले को अदालत में ले जाएंगे.


पाताल लोक: वेब सीरीज़ रिव्यू

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