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बिहार का एक गांव, जहां कभी नहीं जाती है बिहार पुलिस

बिहार के बक्सर जिले में एक गांव है कथकौली. ये गांव ऐतिहासिक है. वो इसलिए क्योंकि 1764 में बक्सर का जो युद्ध हुआ था, वो इसी गांव में हुआ था. लेकिन इस गांव का वर्तमान भी बेहद शानदार है. आजादी के बाद से अब तक इस गांव में कभी पुलिस नहीं पहुंची है और इसकी इकलौती वजह गांव के लोगों का आपसी भाईचारा है.

बात तब की है, जब भारत में अंग्रेजों का शासन था. उनके साम्राज्य का दायरा बढ़ता ही जा रहा था. छल से, बल से या फिर धन से, हर कीमत पर अंग्रेज भारत पर पूरी तरह से कब्जा चाहते थे. इसके लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे थे. इसी कड़ी में उनकी सबसे बड़ी और सफल कोशिश थी 1764 का बक्सर का युद्ध, जिसके बाद पूरे भारत पर अंग्रेजों की हुकूमत हो गई.

वो तारीख थी 22 अक्टूबर. साल था 1764. एक तरफ थी ईस्ट इंडिया कंपनी के हेक्टर मुनरो की पूरी फौज और सामने थी बंगाल के नवाब मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की सेना. खूब लड़ाई हुई और जब नतीजा आया तो अंग्रेज जीत गए थे. इसके बाद इलाहाबाद की संधि हुई और अंग्रेजों की हुकूमत पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा और बांग्लादेश तक कायम हो गई.

बक्सर के युद्ध के बाद से ही भारत पर अंग्रेजों का शासन हो गया था. (फोटो : alchetron.com)

इस कहानी को बताने का एक मकसद है. मकसद ये है कि जिस जगह पर दोनों सेनाओं के बीच लड़ाई हुई थी, आज वो एक मुकम्मल गांव है. उस गांव का नाम है कथकौली, जो बक्सर जिला मुख्यालय से करीब 5 किमी की दूरी पर है. इस गांव में करीब 700 लोग रहते हैं, जिन्होंने अपने पुरखों से उस लड़ाई के बारे में काफी कुछ सुना है. सभी एक ही समुदाय के हैं, जो खेती-बाड़ी करके जीवन-यापन करते हैं. पीढ़ियां गुजर गईं हैं, लेकिन मुंहजबानी किंवदंतियां आज भी पिछली पीढ़ी के लोग अगली पीढ़ी को बता देते हैं. बताया जाता है कि लड़ाई के बाद जब भारतीय सैनिक मारे गए, तो उस वक्त उनके धर्म के लिहाज से उनका अंतिम संस्कार किया गया. हिंदुओं को गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया गया, जबकि मुस्लिमों को गांव के पास के एक कुंए में दफनाया गया और फिर उस कुएं को भरकर वहां पर एक पेड़ लगा दिया गया.

गांव के बाहर लगा बरगद का पेड़ आज भी शहीदों की कहानी बयां करता है. (फोटो : livehindustan.com)

और बात अब इस गांव के वर्तमान की.

फिलहाल बिहार के पांच जिले दंगे की चपेट में हैं. सियासत अपने चरम पर है और हिंदू-मुस्लिम की खाई चौड़ा करने की हर कोशिश की जा रही है. ऐसे में इस गांव का शानदार इतिहास इसके शानदार वर्तमान की भी गवाही देता है. वजह ये है कि ये एक ऐसा गांव है, जिसके यहां से आजतक एक भी मुकदमा पुलिस थाने या कचहरी तक नहीं पहुंचा है.

बिहार के कई जिले इन दिनों दंगों की चपेट में हैं.

शायद इसपर यकीन करना मुश्किल हो, लेकिन दीवानी या फौजदारी किसी तरह के मुकदमों के लिए गांव के लोग कभी पुलिस के पास नहीं गए. गांव में जब भी विवाद हुआ, यहां के बड़े-बूढ़ों ने सबकी रजामंदी से इस विवाद को सुलझा लिया. पीढ़ियों से यही सिलसिला चला आ रहा है. ये गांव बक्सर जिले के औद्योगिक थाने में आता है, लेकिन खुद पुलिस को भी नहीं मालूम है कि ये गांव उनके इलाके में आता है. और मालूम होता भी कैसे. जब कोई शिकायत या मुकदमा दर्ज करने के लिए थाने जाएगा, तभी तो पुलिस को पता चलेगा. कोई थाने तक नहीं गया, तो पुलिस को भी पता नहीं चला.

किसी भी तरह के विवाद को गांव के लोग आपस में ही सुलझा लेते हैं. यही वजह है कि गांव के किसी भी आदमी ने अब तक थाना-कचहरी का चक्कर नहीं लगाया है.

बिहार के अखबार हिंदुस्तान की एक खबर के मुताबिक पुलिस को इस गांव के बारे में करीब 10 साल पहले पता चला था. उसकी वजह ये थी कि गांव में परवेज आलम के घर उनके कुछ रिश्तेदार आए थे. ये सभी रिश्तेदार पाकिस्तान के थे, जिसकी वजह से परवेज को पुलिस को सूचना देनी पड़ी. जब परवेज थाने पहुंचे, तब जाकर पुलिस को पता चला कि कथकौली नाम का कोई गांव औद्योगिक थाने में है. ये गांव आज भी हर तरह से पिछड़ा है. शिक्षा से लेकर, सड़क, बिजली-पानी और हर उस बुनियादी सुविधा से अलग-थलग है, जो एक गांव में होनी चाहिए. गांव के लोगों को इसका मलाल भी है, लेकिन सरकार से. आपस में तालमेल इतना कि सियासतदानों की हर कोशिश के बाद भी इन लोगों ने कभी पुलिस-कचहरी का मुंह नहीं देखा.

ये शहीद स्तंभ है, जो अंग्रेजों ने अपने सैनिकों की मौत के बाद बनवाया था. देश में जब भी कोई नया वायसराय आता था, तो इस स्तंभ के सामने सिर झुकाकर ही जाता था.

आज जब बिहार और बंगाल के लोग दंगे की आग में झुलस रहे हैं, इस गांव की कहानी हर उस आदमी के लिए सबक है, जो इंसान से दंगाई में तब्दील होता जा रहा है. ये सबक हर उस नेता के लिए है, जो वोट के लिए कुछ भी कहने और करने में गुरेज नहीं करते. और ये सबक हमारे और आपके लिए है, जो बात-बात पर देख लेने की धमकी देते हुए पुलिस थाने के चक्कर लगाते हैं और इस चक्कर में अपनी जिंदगी बर्बाद कर देते हैं.


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