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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की बहू को पुलिस ने क्यों गिरफ्तार कर लिया?

पुलिस की टीम पर हमला करवाने का आरोपी विकास दुबे अभी तक फरार है. कानपुर पुलिस ने विकास की बहू, पड़ोसी और डोमेस्टिक हेल्प को गिरफ्तार कर लिया है. तीनों के ऊपर एनकाउंटर वाली रात को विकास का साथ देने का आरोप है. बहू का नाम शमा, पड़ोसी का नाम सुरेश वर्मा और डोमेस्टिक हेल्प का नाम रेखा है.

‘इंडिया टुडे’ के रंजय सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि घटना वाली रात कानपुर देहात के बिकरू गांव में इन तीनों ने विकास दुबे और उसके साथियों की मदद की थी. पुलिसवालों की लोकेशन के बारे में ये तीनों सारी जानकारी विकास को दे रहे थे.

यहां तक कि एक पुलिसवाले ने जब जान बचाने के लिए विकास की बहू शमा के घर का दरवाज़ा खटखटाया, तो उसने दरवाज़ा नहीं खोला.

तीन गाड़ियां बरामद हुईं

विजय नगर इलाका, काकादेव थाना क्षेत्र के तहत आता है. रंजय सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को यहां से 6 जुलाई को तीन लावारिस लग्ज़री गाड़ियां मिलीं. तीनों काले रंग की हैं, नंबर प्लेट नहीं है. पुलिस ने गाड़ियों को लेकर छानबीन की तो, पता चला कि ये कारोबारी जय वाजपेयी की हैं. जय वाजपेयी वही है, जिसकी विकास दुबे के साथ की कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं. जय को स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने हिरासत में ले लिया है, पूछताछ चल रही है.

पुलिस भी घेरे में

इधर पुलिसवालों पर भी शिकंजा कस रहा है. चौबेपुर थाने के स्टेशन अफसर रहे विनय तिवारी सस्पेंड हो गए हैं. मामले की जांच कर रही STF के DIG अनंत देव पर भी जांच बैठ गई है. अनंत देव पहले कानपुर के एसएसपी थे. जांच के आदेश दिए हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने. उन्होंने कहा है कि विकास दुबे के खिलाफ जब पहले भी शिकायतें आई थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी?

‘अमर उजाला’ की ख़बर के मुताबिक, पांच महीने पहले चौबेपुर के जरारी गांव में तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र ने लाखों रुपए का जुआ का धंधा पकड़ा था. आरोप है कि ये सब थानेदार विनय तिवारी के संरक्षण में चल रहा था. इसकी पूरी रिपोर्ट देवेंद्र मिश्रा ने तत्कालीन एसएसपी अनंत देव को भेजी थी. लेकिन तब एसएसपी की तरफ से इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया. इसके बाद से ही सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा और चौबेपुर एसओ विनय तिवारी की अनबन शुरू हो गई थी.

इसे एक तरह से तत्कालीन एसएसपी अनंत देव की लापरवाही भी माना जा रहा है कि शुरुआती शिकायतें आने पर ही विनय तिवारी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

200 पुलिसवालों पर शक

‘इंडिया टुडे’ के शिवेंद्र श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों से पता चला है कि पुलिस महकमे के अंदर विकास की मदद करने वाले लोग हैं. सूत्रों के मुताबिक, चौबेपुर, बिल्हौर, ककवन और शिवराजपुर थाने समेत करीब 200 पुलिसवाले शक के दायरे में हैं. इन पुलिसवालों ने समय-समय पर या तो विकास की मदद की है या फिर उससे फायदा लिया है. इन पुलिसवालों के मोबाइल CDR खंगाले जा रहे हैं. जानकारी मिली है कि ये पुलिसवाले विकास के गुर्गों की तरह काम करते थे. जांच कर रही STF टीम सभी बिंदुओं पर काम कर रही है.

वहीं इस घटना में बीट दारोगा के.के. शर्मा भी निलंबित हुए हैं. उन्होंने पुलिस की पूछताछ में बताया कि 2 जुलाई की शाम 4 बजे विकास ने फोन पर धमकी दी थी. कहा था कि थानेदार को समझा लो, नहीं तो बिकरू गांव से लाश उठेंगी. के.के. शर्मा ने बताया कि वो विकास की धमकी से सहम गए थे, इसलिए बाद में मुठभेड़ में भी शामिल नहीं हुए थे.

लेटर पर कानपुर SSP ने क्या कहा?

इस बीच एक लेटर की कॉपी वायरल हुई. इसे कथित तौर पर देवेंद्र मिश्र ने तत्कालीन एसएसपी अनंत देव को लिखा था. इसमें विकास दुबे और विनय तिवारे के बीच कनेक्शन की बात कही गई थी. इस लेटर पर मौजूदा SSP दिनेश कुमार ने कहा कि जो लेटर वायरल हो रहा है, उसका उनके ऑफिस में कोई रिकॉर्ड नहीं है, किसी रजिस्टर में ज़िक्र नहीं है. आगे कहा कि फिर भी उस लेटर की सत्यता की जांच होगी. ये बयान मौजूदा SSP ने 6 जुलाई की रात को दिया.

विकास दुबे कहां है?

फरार है. घटना को पांच दिन हो गए हैं. यूपी पुलिस अब तक 100 से ज़्यादा जगहों पर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की तलाश कर चुकी है. उसे पकड़ने के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान की पुलिस से भी मदद मांगी गई है. विकास के 50 से ज़्यादा करीबियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. विकास दुबे पर 60 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं.

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वीडियो देखें: कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे की पूरी कहानी जान लीजिए

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