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काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनी थी ज्ञानवापी मस्जिद? सर्वेक्षण से सामने आएगा सच

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के विवाद में कोर्ट ने पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया है. फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज आशुतोष तिवारी ने गुरुवार, 8 अप्रैल को अपने फैसले में कहा कि पुरातत्व विभाग 5 लोगों की टीम बनाकर पूरे परिसर की स्टडी कराए. सर्वेक्षण का खर्च राज्य सरकार उठाएगी.

क्या है मामला?

काशी विश्वनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. यहां काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी अगल-बगल हैं. मंदिर पक्ष का दावा है कि औरंगजेब के शासनकाल में काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर उसी परिसर के एक हिस्से में ज्ञानवापी मस्जिद बना दी गई थी. उसका दावा है कि मंदिर के अवशेष पूरे परिसर में आज भी मौजूद हैं. वहीं अंजुमन इंतजामियां मस्जिद कमेटी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल प्रतिवाद में दावा किया गया कि वहां पर मस्जिद अनंत काल से कायम है.

Kashi Vishwnath
काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद दोनों अगल-बगल हैं.

वाराणसी के स्थानीय वकील विजय शंकर रस्तोगी ने दिसंबर 1991 में सिविल जज की अदालत में इसे लेकर आवेदन दायर किया. उन्होंने स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर के ‘वाद मित्र’ के रूप में याचिका दायर की. 2019 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों से संपूर्ण मंदिर और मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण करने का अनुरोध किया गया.  जनवरी 2020 में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने ASI के सर्वेक्षण कराए जाने की मांग पर अपना विरोध दर्ज किया था. 2 अप्रैल 2021 को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. जिस पर अब सर्वेक्षण का आदेश आया है.

इस फैसले पर मंदिर पक्ष के वकील ने कहा,

2019 में मंदिर पक्ष की ओर से कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश किया गया था. निवेदन किया गया था कि ज्ञानवापी में पुरातन विश्वनाथ मंदिर मौजूद था. उसे 1669 में गिराकर उसके एक भाग पर ये ढांचा बनाया गया है. पुरातन मंदिर के सारे अवशेष उस परिसर में ढांचे के नीचे मौजूद हैं. ज्योतिर्लिंग को पत्थर की पटियों से ढक दिया गया है. पुरातत्व विभाग इसका खनन करे और साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत करे. मंदिर पक्ष के आवेदन को स्वीकार कर लिया गया है. कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया है. ये हिन्दू पक्ष के लिए बड़ी जीत है. अगर साक्ष्य आ जाएगा कि मंदिर के अवशेष पुरातन हैं तो फैसला आने में देर नहीं होगी.

वहीं, मस्जिद पक्ष के वकील मोहम्मद तौफीक खां ने प्रतिक्रिया में कहा कि कोर्ट ने सर्वे करने का आदेश पारित किया है. जजमेंट की कॉपी को पढ़ने के बाद ही हम फैसला लेंगे कि आगे क्या करना है. मेरा मानना है कि इस स्टेज पर सर्वे कमिशन जारी नहीं होना चाहिए था. हालांकि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं.


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