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कैबिनेट मंत्री बोले, 'हम सब मस्त हो गए थे, पता नहीं था कोरोना फिर लौटेगा'

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से देशभर में अब तक कुल 37 लाख से अधिक एक्टिव केस दर्ज किए हैं. देशभर में कोविड से सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्यों में उत्तराखंड नौवें नंबर पर है. इसी बीच उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी (Ganesh Joshi) का एक लापरवाही भरा बयान आया है. गणेश जोशी ने कहा है कि उन्हें और राज्य सरकार को इस बात का इल्म (अंदाजा) ही नहीं था कि कोरोना की दूसरी लहर भी आ सकती है. इसके साथ ही उन्होंने अपनी ही पार्टी की पिछली सरकार को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

देहरादून से आजतक संवाददाता दिलीप सिंह से बात करते हुए गणेश जोशी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत पर आरोप लगाए. उन्होंने कहा,

”त्रिवेंद्र सरकार में कोरोना को लेकर बड़ी लापरवाही हुई और समय पर सही व्यवस्था रखते तो ऐसे दिन न देखने पड़ते.”

कम्युनिटी फॉर सोशल डेवलपमेंट के आंकलन से सामने आया है कि हिमालयी राज्यों में सबसे अधिक मृत्यु दर उत्तराखंड में है. उत्तराखंड में प्रति लाख पर मरने वालों की संख्या करीब 37 है. जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में यह मात्र आठ और हिमाचल में 28 है. जोशी ने इस बातचीत में आगे कहा,

”अगर कोरोना के दौरान ठीक व्यवस्था की जाती तो अब ऐसे दिन ना देखने पड़ते, त्रिवेंद्र सरकार में लापरवाही हुई है. जिसके चलते अब कोरोना का कहर देखने को मिल रहा है.”

खुद राज्य की पिछली त्रिवेंद्र सरकार के सदस्य रहे गणेश जोशी ने ये भी माना कि कोरोना की पहली लहर के बाद सभी लापरवाह हो गए. उन्होंने कहा,

”त्रिवेंद्र सरकार में सब लापरवाह हो गए जिसका परिणाम हमें भुगतना पड़ रहा है. हमें अंदाजा नहीं था कि कोरोना की दूसरी लहर आयेगी. हम सब मस्त हो गये थे और हमे इसका भी ध्यान नहीं रहा कि कोरोना फिर वापस आयेगा.”

साधु-संतों के दवाब में नहीं हुआ त्रिवेंद्र रावत का इस्तीफा!

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का भी इस हालात के बीच एक बयान आया है. रावत ने कहा है कि उन्हें साधु-संतों के दबाव की वजह से अपनी कुर्सी नहीं छोड़नी पड़ी.

रावत ने टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) से बात करते हुए कहा कि ऐसा नहीं था कि साधु समाज और अखाड़ें उनसे नाराज़ थे. उन्होंने कहा,

‘कोविड 19 को लेकर स्थितियां जितनी गंभीर रहीं, अखाड़े इसे जानते थे, और कुंभ मेले के आयोजन के लिए जो भी उचित स्वरूप हो सकता था, उस पर साधु समाज राज़ी था.’

कुंभ में बिगड़े हालातों की वजह से उन्हें पद से हटाने पर त्रिवेंद्र रावत ने कहा,

‘हम केंद्र सरकार की हर गाइडलाइन का पालन कर रहे थे. हमारी सरकार ‘प्रतीकात्मक कुंभ’ के पक्ष में थी, जिस पर साधु समाज ने भी सहमति जताई थी और प्रधानमंत्री तक ने इसे लेकर संतोष जताया था. इसलिए मुझे नहीं लगता है कि कुंभ की वजह से मुझे पद से हटाया गया.’

बता दें कि उत्तराखंड, जो अप्रैल तक दोहरे अंकों में मौत की सूचना दे रहा था, यहां10 मई को कोविड -19 से 168 मौतें हुईं. वहीं राज्य में 10 मई को कोरोना के 5541 नए मामले सामने आए थे. इसके साथ ही राज्य में अब एक्टिव केस की संख्या 74480 पहुंच गई है.


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