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जांच में पता चला, UP में पांच हज़ार से भी ज्यादा फर्ज़ी शिक्षक हो सकते हैं

उत्तर प्रदेश का ‘अनामिका शुक्ला’ मामला. इसके सामने आने के बाद अब फर्ज़ी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक बने लोग घिरते जा रहे हैं. राज्य का शिक्षा विभाग ऐसे लोगों के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ाता जा रहा है. हाल ही में छह फर्ज़ी शिक्षकों को पैसे वसूली के लिए नोटिस भेजा गया. ये सभी नकली डॉक्यूमेंट्स के आधार पर नौकरी कर रहे थे. फर्ज़ीवाड़े का मुकदमा तो पहले से दर्ज है और जांच भी चल रही है, लेकिन अब विभाग नौकरी के दौरान सैलरी के तौर पर मिले पैसों की रिकवरी करना चाहता है, इसी मकसद से ये नोटिस भेजा गया है. पैसे वापसी के लिए 20 जून तक का वक्त दिया है. अगर तब तक पैसे नहीं मिले, तो फिर इन लोगों के खिलाफ एक और नया मुकदमा हो जाएगा. इस बात की जानकारी ‘आज तक’ से जुड़े शिवेंद्र श्रीवास्तव ने दी.

आखिर ये जांच चल कबसे रही है?

फर्ज़ीवाड़े की खबर ‘अनामिका शुक्ला‘ मामले के बाद आग की तरह फैली, लेकिन फर्ज़ी शिक्षकों के मामले की जांच उत्तर प्रदेश में पिछले दो साल से चल रही है. स्पेशल टास्क फोर्स (STF) इसकी जांच कर रही है. शुरुआत जून 2018 से हुई थी. सबसे पहले मथुरा ज़िले में फर्ज़ी शिक्षकों और अन्य विभागों में नौकरियां करने वालों को पकड़ा गया था. क्लर्क महेश शर्मा, 13 टीचर्स और दो कम्प्यूटर ऑपरेटर की गिरफ्तारी हुई थी. फिर कड़ियां मिलती गईं, और जांच बाकी ज़िलों तक पहुंच गई.

यूपी पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, राज्य में पांच हज़ार से भी ज्यादा फर्ज़ी शिक्षक होंगे. अभी तक जिन ज़िलो में मामले सामने आए हैं, उनमें सबसे आगे मथुरा है. 85 मामलों के साथ. सब मिलाकर 126 FIR की जा चुकी है. 250 लोग गिरफ्तार भी हो गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि अभी और भी सैंकड़ों लोगों की गिरफ्तारी होनी बाकी है, मामला काफी बड़ा और फैला हुआ है.

अधिकारी क्या कहते हैं?

STF आईजी अमिताभ यश से शिवेंद्र श्रीवास्तव ने बात की. उन्होंने बताया,

‘SIT ने अनावरण (पर्दाफाश) किया था, जिसमें चार हज़ार केस ऐसे निकले थे, जिनकी बी.एड की डिग्री आगरा यूनिवर्सिटी से धोखाधड़ी वाली थी. उस पर SIT काम कर रही है. इसके अलावा STF ने अपनी रिसर्च की, 700 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से अधिकांश के खिलाफ केस भी लिखा जा चुका है और उन्हें बर्खास्त भी किया जा चुका है. जो अलग-अलग तरीके से फर्ज़ी तरीके से नौकरी कर रहे थे.’

किस तरह के लोग इन धोखाधड़ी में शामिल हैं?

अमिताभ यश ने बताया कि छोटे-छोटे नेटवर्क्स ज़िलों में हैं, जो इस तरह के काम करते रहे हैं. इन लोगों को खोजा जा रहा है, कई लोगों को जेल भेजा जा चुका है, लगातार काम चल रहा है.

शिक्षा विभाग के अधिकारी मिले हैं?

STF आईजी से पूछा गया कि क्या शिक्षकों वाले फर्ज़ीवाड़े में शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं? जवाब में उन्होंने कहा,

‘इस पर कमेंट करना अभी उचित नहीं है, लेकिन लिपकिय (clerk) स्तर पर कुच त्रुटियां अवश्य नज़र आती हैं. खासकर के जो दस्तावेज वैरिफिकेशन के लिए भेजना होता है, उनको न भेज करके या तो स्थानीय स्तर पर वैरिफाई करा लिया जाता है, या बिना वैरिफिकेशन के ही वैरिफाइड मान लिया जाता है. या उन पर फेक स्टैंप या साइन डालकर वैरिफाई करा लिया जाता है.’

आंकड़ों पर बात हो गई, अब बताते हैं कि ये लोग फर्ज़ी शिक्षक बनते कैसे हैं?

कई तरीके हैं. सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है फर्ज़ी मार्कशीट बनवाकर मेरिट के आधार पर नौकरी पा लेना.

दूसरा चर्चित तरीका है, किसी दूसरे व्यक्ति के दस्तावेज़ इस्तेमाल करना. ‘अनामिका शुक्ला’ केस इसका एक उदाहरण है.

तीसरा है फर्ज़ी स्थानांतरण पत्र (ट्रांसफर लेटर) बनवाकर किसी भी स्कूल में सहायक अध्यापक (असिस्टेंट टीचर) बन जाओ. फिर स्कूल के अंदर ही अपनी एक फर्ज़ी सर्विस फाइल बनाकर सरकारी दस्तावेज़ों में शामिल करवा दो.

चौथा है आरक्षित सीटों पर नौकरियां पाना. जाली दस्तावेज बनाकर खुद को उस सीट का हकदार बताना.

पांचवां है अपनी जगह पर अपने दस्तावेज़ों पर किसी और को नौकरी पर रख दो और खुद कहीं और नौकरी करने लगो.

छठवां है, सिर्फ कागज़ों मे ही नौकरी दिखाकर सैलरी पाते रहो. ऐसे मामले मे कोई असली टीचर पढ़ाने जाता ही नहीं है.

सातवां है, फर्जी नियुक्ति पत्र बनवाकर सीधे नौकरी पा लो और फिर धीरे-धीरे विभाग से असली मेरिट लिस्ट और काउंसलिंग के दस्तावेज गायब कर दो.

[ऐसे अभी तक कुल आठ तरीकों का पता STF ने लगाया है. तरीके सिर्फ ये बताने के लिए बताए हैं कि लोग कैसे फर्जी टीचर बन रहे हैं. आपको ट्राई नहीं करना है, वरना लेने के देने पड़ जाएंगे.]


वीडियो देखें: 69 हज़ार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में पुलिस ने तीन टॉपर्स को अरेस्ट किया

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