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VDO भर्ती 2018: UPSSSC के स्कैनिंग रूम से OMR शीट निकाल कर कहां-कहां ले गए दलाल?

24 मार्च 2021. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UPSSSC ने एक नोटिफिकेशन जारी किया. जिसमें बताया गया था कि ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और समाज कल्याण पर्यवेक्षक की भर्ती के लिए दिसंबर 2018 में आयोजित लिखित परीक्षा को रद्द कर दिया गया है. लिखित परीक्षा में धांधली की शिकायत हुई थी और इस पर जांच भी चल रही थी. लेकिन परीक्षा रद्द क्यों की गई, UPSSSC ने इसकी कोई वजह नहीं बताई थी. जिस पर काफी हंगामा भी हुआ. भर्ती में शामिल अभ्यर्थी UPSSSC और योगी सरकार से लगातार पूछ रहे थे कि आखिर भर्ती रद्द करने की वजह क्या है? ऐसे में अभ्यर्थियों के इस सवाल का जवाब दिया है लखनऊ SIT ने. एसआईटी ने परीक्षा में धांधली करने वाले 11 लोगों को गिरफ्तार कर इनके पास से 44 लाख रुपए बरामद किए हैं.

क्या है पूरा मामला?

यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 22 और 23 दिसम्बर 2018 को ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी और समाज कल्याण पर्यवेक्षक के पदों पर परीक्षा आयोजित की थी. 16 जिलों के 572 परीक्षा केंद्रों पर. ख़बरों के मुताबिक़ क़रीब 9 लाख अभ्यार्थियों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया. पद थे 1953. इस लिखित परीक्षा का रिज़ल्ट आया अगस्त 2019 के दरम्यान. रिज़ल्ट के बाद बारी आती है डॉक्यूमेंट वेरिफ़िकेशन की. लेकिन जब इसके बारे में काफी समय तक कोई अपडेट नहीं मिला, तो 6 फ़रवरी 2020 को छात्र आयोग के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गए. आयोग दबाव में था. छात्रों को मनाया गया और 29 फ़रवरी 2020 को वेरिफ़िकेशन का नोटिफ़िकेशन जारी कर दिया. पद थे कुल 1953, लेकिन डॉक्यूमेंट वेरिफ़िकेशन के लिए बुलाया गया 1553 लोगों को. जिन्हें नहीं बुलाया गया था, उनके लिए आयोग ने कहा कि जिन्हें नहीं बुलाया गया है, उन्हें जांच पूरी होने के बाद बुलाया जाएगा. तो सवाल उठा कि आयोग जांच किस चीज़ की कर रहा है?

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24 मार्च को इस परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की गई थी

योगी के मंत्री ने की धांधली की शिकायत

दरअसल भर्ती में धांधली की शिकायत आई थी. और ये शिकायत की थी योगी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र सिंह मोती ने. राजेंद्र सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ को रिजल्ट आने के अगले ही दिन चिट्ठी लिख शिकायत की थी. यानी 29 अगस्त 2020 को ही. इस चिट्ठी में राजेंद्र सिंह मोती ने दो अभ्यर्थियों के रोल नंबर शेयर किए. कहा कि ओएमआर शीट की कार्बन-कॉपी के हिसाब से इन दोनों ने लगभग पांच प्रश्न हल किए हैं. लेकिन जो अभ्यार्थियों की मूल ओएमआर कॉपी है, उसमें सभी प्रश्नों पर गोले बनाए गए हैं. यानी परीक्षा पूरी होने के बाद मूल ओएमआर शीट पर आंसर भरे गए थे. राजेंद्र सिंह मोती के मुताबिक़ दोनों अभ्यर्थी उत्तीर्ण थे. साथ ही कार्बन कॉपी और मूल ओएमआर शीट में अंतर का मतलब है कि भर्ती में गड़बड़ी हुई है. आरोप सीधे आयोग पर लगे तो आयोग ने प्रारंभिक जांच कराई.

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राजेंद्र सिंह ने सीएम योगी आदित्यनाथ को रिजल्ट आने के अगले ही दिन चिट्ठी लिख शिकायत की थी..

प्राथमिक जांच हुई. इस जांच में ओएमआर शीट में अंतर मिलने पर मेरिट में आए 136 अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया और लखनऊ के विभूति खंड थाने में इनके खिलाफ एक FIR दर्ज की गई थी. इतनी बड़ी संख्या में लोग मिले तो जांच अधिकारियों को लगा कि इस संख्या में इज़ाफ़ा हो सकता है. जांच का दायरा बढ़ा दिया गया और SIT का गठन किया गया और 24 मार्च को लिखित परीक्षा रद्द कर दी गई.

SIT ने क्या खुलासा किया?

SIT के DG आर पी सिंह ने बताया कि परीक्षा में धांधली के लिए व्यापक तरीके से प्लानिंग की गई. दलालों ने पहले परीक्षा कराने वाली कंपनी के कर्मचारियों से सांठगांठ की और फिर इसके बाद अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनसे लाखों रुपए वसूले. लिखित परीक्षा की जिम्मेदारी TCS कंपनी को दी गई थी. TCS ने SRN कंपनी को स्कैनिंग का काम दिया था. SRN कंपनी ने ये काम केडी इंटरप्राइजेज से करवाया था.

परीक्षा कराने वाली कंपनी के सदस्यों से दलालों ने सांठगांठ कर ऐसे अभ्यर्थियों से संपर्क साधा, जिन्होंने ओएमआर शीट को खाली छोड़ दिया था. ऐसे अभ्यर्थियों की शीट आयोग के स्कैनिंग रूम से निकालकर लखनऊ के थाना मड़ियांव निवासी कोमल कमलेश सिंह को उपलब्ध कराई गई. कमलेश ने ये ओएमआर शीट मऊ के अतुल कुमार राय, अयोध्या के दीपक वर्मा, लखनऊ के राजीव जोसेफ और जालौन के महेंद्र सिंह को दी. इन लोगों ने ओएमआर शीट भरकर वापस कमलेश सिंह को दे दी. इसके बाद स्कैनिंग टीम के सदस्यों ने मार्कशीट को वापस रूम में रख दिया.

SIT को इस मामले में लखनऊ के आरपी यादव के पास से 19 लाख और रामवीर सिंह के पास से 17 लाख रुपए बरामद किए हैं. जबकि सतपाल सिंह के पास से 8 लाख रुपए मिले हैं. कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. फिलहाल SIT की जांच जारी है.

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परीक्षा में धांधली को लेकर छात्रों में बहुत रोष है.

SIT की जांच में हुए खुलासे उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के उन दावों पर सवाल उठाते हैं, जिनमें सरकार पूरी पारदर्शिता के सात समयबद्ध और निष्पक्ष भर्तियां कराने का दावा करती है. UPSSSC जिन लोगों को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी देता है, वही लोग गड़बड़ी करते हैं, आयोग के स्कैनिंग रूम में पड़ी कॉपियों के साथ खेल हो जाता है और आयोग को पता तक नहीं चलता. जब पता चलता है तो सालों-साल भर्ती लटकी रहती है और एक दिन अचानक से रद्द कर दी जाती है.

इन सालों में अभ्यर्थी पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ धरना प्रदर्शन भी करते रहे. सोशल मीडिया से लेकर कोर्ट कचहरी तक हर जतन कोशिश करते रहे. इसी उम्मीद में कि मेहनत से पढ़ाई-लिखाई की है, परीक्षा पास कर लिया है अब नौकरी मिल जाएगी. लेकिन एक झटके में सब खत्म हो गया. मेहनत से पढ़ाई-लिखाई कर परीक्षा पास करने वाले युवाओं की उम्मीदें भर्ती आयोगों में व्याप्त भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई. हमें उम्मीद है कि सही तरीके से यूपी सरकार दोबारा इस परीक्षा को जल्द कराएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.


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वीडियो- योगी सरकार की छह महीने में नियुक्ति पत्र देने वाली बात, क्यों नहीं मान रहा भर्ती बोर्ड?

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