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कोर्ट के आदेश के बाद वो 3 मौके, जब योगी सरकार ने 'दंगाइयों' से जुर्माना नहीं वसूला

प्रदर्शन और विरोध चालू है. किसका? नए नागरिकता संशोधन क़ानून का. नए नागरिकता रजिस्टर यानी NRC का. कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार धर्म विशेष के खिलाफ काम कर रही है, धर्म विशेष को टार्गेट कर रही है. कयास तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि मुस्लिमों को देश से बाहर निकालने की कार्रवाई है. इस सबके दरम्यान यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार है और उनकी पुलिस है. जो प्रदर्शनकारियों को नोटिस भेज रही है. कह रही है कि प्रदर्शन में जितनी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई आरोपी करेंगे.

ऐसे में यूपी में हुई तीन बड़ी हिंसा की घटनाएं हैं, योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद की, जिसमें प्रशासन ने नुकसान की भरपाई के लिए कोई रिकवरी नहीं की. क्या हैं वे घटनाएं?

1. सहारनपुर हिंसा

साल 2017. योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बने कुछ ही समय बीता था. अप्रैल और मई का महीना. पश्चिमी यूपी के सहारनपुर में राजपूत और दलित समुदाय में हिंसा हुई. गांव शब्बीरपुर पूरी हिंसा के केंद्र की तरह सामने आया. यही वो समय था जब भीम आर्मी और चंद्रशेखर आज़ाद रावण प्रकाश में आए. हिंसा हुई. राजपूत समुदाय के एक व्यक्ति की मौत हुई. दलितों के 25 घर जलाए गए. सरकारी संपत्तियों को भी ख़ासा नुकसान पहुंचा. ये हिंसा इतनी भड़की कि दिल्ली तक पहुंच गयी. दिल्ली में जंतर-मंतर पर भीम आर्मी की कॉल पर प्रदर्शन हुए.

सहारनपुर में हुई हिंसा के बाद भी जानमाल की हानि हुई थी, लेकिन रिकवरी की लिए कोई नोटिस नहीं जारी की गयी थी.
सहारनपुर में हुई हिंसा के बाद भी जानमाल की हानि हुई थी, लेकिन रिकवरी की लिए कोई नोटिस नहीं जारी की गयी थी.

इस मामले में जितनी भी संपत्ति को नुकसान पहुंचा, उसका कोई सरकारी आकलन अब तक सामने नहीं आ सका है. सामने तब आता, जब सहारनपुर प्रशासन संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करने की कोई बात करता. न ऐसी कोई बात हुई, न ही रिकवरी करने की कोई नोटिस ही जारी हुई.

2. भारत बंद रैली

एससी/एसटी एक्ट. मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि अब इस एक्ट के तहत आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी. कोर्ट ने आदेश दिया कि पहले एसपी रैंक का अधिकारी पूरे मामले की जांच करेगा. जांच के बाद FIR दर्ज होगी. और FIR दर्ज होने के बाद ही गिरफ्तारी होगी. इसके पहले शिकायत पर FIR दर्ज होती थी, फिर आरोपी की गिरफ्तारी होती थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बसपा समेत दलित संगठनों ने इस घटना का विरोध शुरू किया. कुछ दिनों बाद ही “भारत बंद” रैली का आयोजन किया गया. यूं तो राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी भारत बंद रैली में हिंसा की भरपूर घटनाएं सामने आयीं. अकेले यूपी के मेरठ में एक पुलिस चौकी को जला दिया गया. UPSRTC की 6 बसों को आग लगा दी गयी. साथ ही 35 बाइकों और पुलिस की कई गाड़ियों में आग लगा दी गयी.

SC/ST ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बदलाव किए. इसके विरोध में 2 अप्रैल को एक भारत बंद बुलाया गया. दलित कोर्ट द्वारा किए गए इन बदलावों का विरोध करने के लिए जमा हुए. इस दिन काफी हिंसा भी हुई.
SC/ST ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बदलाव किए. इसके विरोध में 2 अप्रैल को एक भारत बंद बुलाया गया. दलित कोर्ट द्वारा किए गए इन बदलावों का विरोध करने के लिए जमा हुए. इस दिन काफी हिंसा भी हुई.

इन सभी घटनाओं में 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का ज़िक्र नहीं किया गया. कैसा फैसला? 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सामूहिक हिंसा के मामलों में सम्पति के नुकसान की भरपाई आरोपियों से की जाएगी. इसी आदेश का हवाला देकर यूपी पुलिस ने CAA के प्रदर्शंकारियों को नोटिस भेजा है. लेकिन भारत बंद रैली के दौरान न ऐसा विचार आया था, न ही ऐसा कवायद की नुकसान के भरपाई की नोटिस भेजी जाए, लिहाजा, कोर्ट के फैसले का ज़िक्र भी नहीं.

3. बुलंदशहर हिंसा और इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या

2018. पश्चिमी यूपी का ही शहर बुलंदशहर. यहां एक पुलिस जीप में आग लगा दी गयी. साथ ही एक पुलिसकर्मी इन्स्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या हुई. बहुत बवाल और बहुत प्रदर्शन हुए. काफी हिंसा. पुलिस चौकी फूंक दिए जाने की खबर भी आई थी. लेकिन इस समय बुलंदशहर प्रशासन या यूपी पुलिस ने उपद्रवी भीड़ को नुकसान की भरपाई के लिए कोई नोटिस जारी नहीं की थी. इस जानकारी की पुष्टि बुलंदशहर के एसएसपी संतोष कुमार सिंह भी करते हैं. सुबोध सिंह की हत्या और राज्य की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में 27 लोगों के नाम FIR में दर्ज किये गए. सभी को गिरफ्तार किया गया और केस अभी भी चल रहा है. लेकिन बुलंदशहर में (भी) कोई कार्रवाई नहीं.

ये हैं स्याना थाना के प्रभारी सुबोध कुमार सिंह. 3 दिसंबर को सुबोध भीड़ के हाथों कत्ल कर दिए गए. ये सारा मामला कथित गोकशी की अफवाह पर शुरू हुआ. पुलिस की शुरुआती जांच के हिसाब से जो गाय के टुकड़े उस दिन महाव गांव में मिले, वो ताज़ा कटी गाय के नहीं थे. पुराने थे.
ये हैं स्याना थाना के प्रभारी सुबोध कुमार सिंह. 3 दिसंबर को सुबोध भीड़ के हाथों कत्ल कर दिए गए. ये सारा मामला कथित गोकशी की अफवाह पर शुरू हुआ. पुलिस की शुरुआती जांच के हिसाब से जो गाय के टुकड़े उस दिन महाव गांव में मिले, वो ताज़ा कटी गाय के नहीं थे. पुराने थे.

यानी ये उत्तर प्रदेश में चौथी बड़ी घटना है. और पहली घटना, जब यूपी सरकार ने रिकवरी की नोटिस जारी किया है. सरकार का पक्ष जानने के लिए हमने सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा से बात करने की कोशिश की. पता चला कि वे मीटिंग में हैं. इसके बाद हमने अतिरिक्त प्रमुख सचिव गृह अवनीश अवस्थी से बात करने की कोशिश की. संदेश भी भेजे. सरकार की ओर से कोई जवाब आते ही हम उसे भी आपके सामने रखेंगे.


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