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5 लोगों के हत्यारे बीजेपी विधायक चंदेल का हाईकोर्ट के आदेश के 25 दिन बाद सरेंडर

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पांच लोगों के हत्यारे भाजपा विधायक अशोक चंदेल ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया. विधायक फिल्मी स्टाइल में अपने हजारों समर्थकों के साथ हमीरपुर जिला अदालत पहुंचा. इस दौरान पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही. लगा कि सब कुछ प्लान के तहत हो रहा है. पुलिस विधायक को गिरफ्तार करने के बजाय उसके साथ कदमताल करती नजर आई. पुलिस ने विधायक को कोर्ट में सरेंडर से पहले गिरफ्तार करने की कोई कोशिश नहीं की. विधायक के साथ केस में सजायाफ्ता रघुवीर सिंह और आशुतोष सिंह उर्फ डब्बू ने भी आत्मसमर्पण कर दिया.
विधायक के सरेंडर से पहले नसीम अहमद और भान सिंह नाम के दो दोषी एडवोकेट की ड्रेस में आत्मसमर्पण करने पहुंचे. पुलिस ने तीन अन्य दोषी साहब सिंह, उत्तम सिंह और प्रदीप सिंह को अदालत के बाहर गिरफ्तार किया. मेडिकल कराने के बाद इनको भी कोर्ट में पेश किया गया. अदालत में जरूरी कार्यवाही के बाद सरेंडर करने वाले सभी 8 लोगों को जेल दिया.

इस पूरे घटनाक्रम पर एक सज्जन ने ट्वीट किया-

समर्थकों का जगह-जगह हुजूम
भाजपा विधायक और उसके समर्थकों के गिरफ्तारी वारंट में 13 मई तक का समय था. आखिरी दिन अशोक चंदेल के समर्थकों की शहर में कई जगह भीड़ दिखी. पुलिस ने सुरक्षा के इंतजाम पहले से कर रखे थे. सुबह छह बजे से शहर के प्रमुख चौराहों पर फोर्स लगा दी गई. दूसरे जिलों से भी पुलिस बुलाई गई थी. मगर ये दिखावे के लिए ही ज्यादा था. पुलिस की आंख में धूल झोंककर अदालत पहुंच गया.

इस रणनीति में उसके बेटे अभय राज सिंह ने भी साथ दिया. चर्चा रही कि विधायक को कानपुर से हमीरपुर आना है. इसके लिए विधायक का बेटा अभय और उसके सैकड़ों समर्थक कानपुर से हमीरपुर आने वाले यमुना पुल पर पहुंच गए. यहां पुलिस भी पहुंच गई थी. मगर ये सब नाटक किया गया.

विधायक कानपुर-मूसानगर के यमुना पुल से कुरारा होते हुए 11 बजे अदालत पहुंच गया. कोर्ट के बाहर भी विधायक के समर्थक मौजूद थे. विधायक को को देखते ही उन्होंने उसकी गाड़ी घेर ली. और नारेबाजी शुरू कर दी. विधायक के साथ समर्थकों की भारी भीड़ भी कचहरी में पहुंच गई. बाद में जिला जेल ले जाते वक्त समर्थकों ने हंगामा किया तो पुलिस को लाठी डंडे फटकारने पड़े.

तीन सौ लोगों पर मुकदमा
विधायक के सरेंडर करने की सूचना पर उनके समर्थकों की भीड़ मुख्यालय में इकट्ठा हुई. जिले में धारा 144 लगी हुई थी. इसके बाद भी विधायक के समर्थकों ने तहसील तिराहा और पोस्टमार्टम हाउस में लगे बैरियर पर हंगामा किया. इस पर हमीरपुर कोतवाली इंस्पेक्टर केपी सिंह ने करीब 300 लोगों पर दो अलग-अलग केस दर्ज कराए हैं.

उधऱ, हमीरपुर एसपी हेमराज मीना ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि ये सही नहीं है कि विधायक गाड़ियों और समर्थकों के साथ अदालत पहुंचे. ये संभव नहीं है. धारा 144 लगी हुई थी. ये सब अदालत के बाहर हो सकता है. अदालत के अंदर समर्थकों और सामान्य लोगों की पहचान करना मुश्किल है. तमाम लोग अदालत में अपने काम से भी आए थे.

मामला क्या है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 अप्रैल, 2019 को पांच लोगों की हत्या के मामले में अशोक चंदेल समेत 10 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद सेशन कोर्ट ने 6 मई को दोषियों की गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी किए थे. सभी अभियुक्तों को 13 मई तक गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए थे. इसके बाद से ही विधायक अशोक चंदेल सरेंडर करने की तैयारी में था.

करीब 22 साल पहले अशोक चंदेल और उसके साथियों ने पांच लोगों को सरेशाम गोली मारकर हत्या कर दी थी. मामले में कुल 12 आरोपी थे. रुक्कू नाम के एक युवक को स्थानीय अदालत से उम्रकैद की सजा हुई थी. इस वजह से उसके मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में अलग से होगी. एक अन्य आरोपी झंडू सिंह की मौत हो चुकी है. ये घटना 26 जनवरी, 1997 की है. अशोक चंदेल और उसके साथियों ने पांच लोगों को सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी. मरने वालों में एक बच्चा भी था.


वीडियोः भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

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