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एयरपोर्ट से उड़ने के मिनटों बाद ईरान में प्लेन क्रैश, 176 लोग थे, एक भी नहीं बचा

यूक्रेन का एक विमान ईरान की राजधानी तेहरान में क्रैश हो गया. प्लेन में सवार सभी 176 लोग मारे गए. मरने वालों में ज़्यादातर ईरान के नागरिक हैं.

ख़बरों के मुताबिक, टेक-ऑफ के समय ही प्लेन के एक इंजन में आग लग गई. इसके बाद पायलट अपना नियंत्रण खो बैठा. विमान आउट ऑउ कंट्रोल हो गया. इसी वजह से टेक-ऑफ के कुछ ही मिनटों बाद जलता हुआ विमान हवा से ज़मीन पर गिर गया. गिरने के साथ ही विमान के अंदर ज़ोरदार धमाका हुआ.

8 जनवरी की सुबह Ukraine International Airline के इस विमान ने तेहरान के ख़ौमैनी एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी. हादसे से जुड़े एक विडियो में दिखता है कि विमान जब हवा में था, तब ही उसमें आग लग गई थी. पहले ख़बर आई कि विमान के अंदर यात्रियों और चालक दल को मिलाकर 180 लोग थे. मगर बाद में पुष्टि हुई कि कुल 176 लोग थे प्लेन में. ‘ईरानियन एविएशन ऑर्गनाइज़ेशन’ के प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है.

 

दुर्घटना का एक विडियो शेयर हो रहा है
ये बोइंग जेट 737 का विमान ‘यूक्रेन इंटरनैशनल एयरलाइन’ का था. फ्लाइट नंबर 752. विमान के तेहरान से उड़ान भरने का समय सुबह के सवा पांच बजे का था. मगर विमान करीब एक घंटे की देरी से सुबह 06:12 मिनट पर उड़ा. तेहरान से चलकर ये विमान यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित ‘बोरिस्पिल इंटरनैशनल एयरपोर्ट’ जा रहा था. दुर्घटना के पीछे तकनीकी वजहें बताई जा रही हैं. सोशल मीडिया पर एक विडियो काफी शेयर हो रहा है. ये इसी विमान हादसे का बताया जा रहा है. ईरान की ISNA न्यूज़ एजेंसी ने भी इसे शेयर किया है.

 

ईरान की हर ख़बर पर दुनिया की नज़र है
इस प्लेन ऐक्सिडेंट से पहले 8 जनवरी को ही एक और ख़बर आई. ईरान ने इराक स्थित अमेरिका के दो मिलिटरी बेस पर मिसाइल दागे. ईरान ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है.

ईरान की रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स की मुख्य न्यूज़ वेबसाइट ‘मसरिग़’ के मुताबिक, पश्चिमी इराक के अनबर प्रांत स्थित अल-असद मिलिटरी बेस पर 30 से भी ज़्यादा बलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं. ईरान की इस्लामिक रेवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का कहना है कि ये तो बस बदला लेने की शुरुआत है. IRGC की ओर से जारी बयान में कहा गया है-

रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से ज़ोरदार बदला लेने की शुरुआत हो गई है.

ये जिस ‘बदले’ का ज़िक्र किया गया है, उसकी वजह से मिडिलईस्ट में करीब-करीब एक और जंग की शुरुआत हो गई है. 3 जनवरी को मुंह अंधेरे अमेरिका ने ईरान की कुद्स फोर्स के चीफ मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी को मार डाला. अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस हमले की जिम्मेदारी भी ली. ईरान ने इसे ‘ऐक्ट ऑफ वॉर’ माना भी. अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक भी ये ‘ऐक्ट ऑफ वॉर’ ही है. इसके बाद ईरान ने कहा कि मेजर जनरल सुलेमानी की हत्या का ज़ोरदार बदला लिया जाएगा. इसी बदले के क्रम में ईरान ने ये हमला किया है.

ट्रंप ने ट्वीट किया- ऑल इज़ वेल
अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय ‘पेंटागन’ ने भी हमले की पुष्टि की है. इनकी ओर से बताया गया कि ईरान ने एक दर्ज़न से ज़्यादा बलिस्टिक मिसाइलें दागीं. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का भी ट्वीट आ गया है इस हमले पर. उन्होंने लिखा है-

ऑल इज़ वेल! इराक के दो सैन्य ठिकानों पर ईरान ने मिसाइल दागे. कितना और क्या नुकसान हुआ, हम इसका जायज़ा ले रहे हैं. अब तक तो सब ठीक है. हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर, सबसे ज़्यादा संसाधनों से लैस सेना है. मैं कल सुबह एक बयान जारी करूंगा. 

1988 में अमेरिका ने ईरान का एक विमान गिराया था
ईरान द्वारा किए गए हमले और अमेरिका-तनाव के बीच बने तनाव के बीच जब विमान हादसे की ख़बर आई, तो सबसे पहले सोशल मीडिया पर यही अंदेशा लगाया गया. कई लोग लिखने लगे कि क्या ये अमेरिका की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई है.

1988 में अमेरिका ने ईरान के एक विमान को गिरा दिया था. इस घटना में 290 लोग मारे गए थे. अमेरिका ने कहा, ये ग़लती से हुआ. मगर इस बात की मुआफ़ी नहीं मांगी उसने कभी ईरान से. ईरान इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ले गया था. वहां अमेरिका से कहा गया कि वो यात्रियों के परिवार को मुआवज़ा दे. अमेरिका ने मुआवज़ा तो दिया, लेकिन मुआफ़ी फिर भी नहीं मांगी.

कई देशों ने ईरान और इराक न जाने की अडवाइज़री जारी की है
मगर तेहरान में हुई इस विमान दुर्घटना के पीछे अमेरिका का हाथ होने की आशंका कम है. वजह ये कि यूक्रेन अमेरिका के पाले का देश है. चूंकि विमान कीव जा रहा था, तो इसके अंदर यूक्रेन के भी कई नागरिक होने का अनुमान है. वैसे ईरान और अमेरिका के तनाव को देखते हुए कई देशों ने अपने नागरिकों से ईरान और इराक जाने से बचने की सलाह दी है. भारत ने भी ऐसी ही एक अडवाइज़री जारी की है. ख़बरों के मुताबिक, कई देशों के विमान ईरान के एयरस्पेस में घुसने से बच रहे हैं.


इराक में ऐसा क्या हुआ कि ईरान समर्थक भीड़ अमेरिकी दूतावास में घुस गई?

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