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औरत ने भरी सभा में पीएम मोदी पर फेंका जूता, क्या है सच?

दो दिन से खुसुर-पुसुर चल रही है. क्या, उसके लिए गूगल पर जाकर ‘पीएम जूता’ सर्च कीजिए. आपको ऐसी खबरें मिलेंगी जिनमें दावा किया गया है कि एक मीटिंग के दौरान एक औरत ने प्रधानमंत्री मोदी की तरफ जूता उछाल दिया. वाकये की तारीख बताई जा रही है 28 अप्रैल. इसकी ‘फुटेज’ भी शेयर की जा रही है.

 

 

कहा जा रहा है कि जूता मोदी को लगा नहीं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री की ओर जूता उछाला जाना ही अपने आप में पर्याप्त बड़ी खबर है. इसलिए इस वायरल हो रही खुसुर-पुसुर पर खुल कर बात होना बहुत ज़रूरी है. और उतना ही ज़रूरी ये जानना है कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं है. 

कहा जा रहा है कि औरत ने अपने गांव से जुड़ा एक सवाल राज्य सभा में पूछा था जिसकी कोई सुनवाई नहीं हुई. इसी से चिढ़ कर उसने पीएम पर जूता उछाला. 

स्क्रीनशॉट्स में दिख रहे लिंक्स को क्लिक करने पर जो खबरें खुलती हैं उनमें ‘जूता कांड’ की आधी अधूरी डीटेल है. प्रस्तुति खबर वाली है, लेकिन खबर लिखने के बुनियादी नियमों का ध्यान नहीं रखा गया है. वाकया 28 अप्रैल का बताया जाता है लेकिन कहीं नहीं बताया जाता कि जिस मीटिंग में जूता चला वो हुई कहां थी. ना ही घटना का वक्त बताया गया है. ऐसी खबरों के साथ जो वीडियो लगाया जा रहा है, उसमें जूता फेंकने जैसी कोई बात नहीं है.

सबसे ज़्यादा ध्यान ये बात खींचती है कि एक प्रधानमंत्री पर जूता चलाने वाली औरत का नाम ही रिपोर्ट से गायब है. अगर ऐसा सच में होता तो ये औरत एक तरह की सेलेब्रेटी बन चुकी होती. लेकिन यहां नाम के अते-पते नहीं हैं. इसलिए ये खबरें यकीन के लायक नहीं लगतीं.

तो वीडियो कहां से आया?

'जूता कांड' के सबूत के तौर पर ये फुटेज शेयर की जा रही है.
जूता कांड’ के सबूत के तौर पर ये फुटेज शेयर की जा रही है. (यूट्यूब स्क्रीनग्रैब)

अब आप पूछेंगे कि अगर ऐसा कुछ हुआ ही नहीं तो वाकये की फुटेज कहां से आई?  तो इसका जवाब ये है कि ज़्यादातर खबरों में जिस फुटेज का हवाला दिया जा रहा है, वो है तो असली, लेकिन उसे फर्जी खबर के साथ जोड़ कर दिखाया जा रहा है. ये फुटेज समाचार चैनल ‘एबीपी अस्मिता’ की है. इसे 8 मार्च को रिकॉर्ड किया गया था जब पीएम मोदी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर गांधीनगर में एक कार्यक्रम में शरीक हुए थे. इस कार्यक्रम में गुजरात की  महिला सरपंचों का सम्मान किया जाना था. तभी ग्रेटर नोएडा में रहने वाली एक औरत शालिनी ने नारे लगाते हुए मोदी के मंच की ओर जाने की कोशिश की. लेकिन उसे रोक लिया गया और ऑडिटोरियम से बाहर कर दिया गया. उस दिन इस वाकये की खबरें छपी थीं, जिसमें जूता उछालने जैसी कोई बात नहीं थी. इन खबरों को कोई भी सर्च करके देख सकता है.

एबीपी अस्मिता के आधिकारिक यूट्यूब चैनल की फुटेज को यहां देखेंः

इस फुटेज को शेयर करते वक्त एबीपी ने साफ लिखा है कि घटना गांधीनगर की है जिसमें गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की एक औरत प्रदर्शन कर रही है.

तो कुल जमा बात ये है बंधुओं, कि भटसप-यूट्यूब-ट्विटर पर फैलाई जाने वाले धमाकेदार  खबरों को शेयर करने से पहले थोड़ा रिसर्च कर लें. कुछ नहीं तो थोड़ा गूगला ही लें. कृपा होगी.


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