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महबूबा मुफ्ती की पार्टी में क्यों पड़ गई फूट, मामला देशभक्ति से जुड़ा है

महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के तीन नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है. इन नेताओं का कहना है कि महबूबा मुफ्ती की हालिया टिप्पणी ने उनकी ‘देशभक्ति की भावनाओं को आहत’ किया है. 26 अक्टूबर, सोमवार को पीडीपी के टीएस बाजवा, वेद महाजन और हुसैन ए वफा ने मुफ्ती को अपना इस्तीफा भेज दिया. इतना ही नहीं, पीडीपी की सहयोगी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी मुफ्ती के बयान से खुद को अलग कर लिया है. हाल ही में मुफ्ती ने तिरंगे को लेकर एक बयान दिया था, जिसके बाद बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस ने भी बयान की निंदा की थी.

अपने इस्तीफे की चिट्ठी में इन नेताओं ने लिखा कि वो महबूबा मुफ्ती के कामकाज और बयानों के कारण काफी असहज महसूस कर रहे हैं. खास तौर पर ऐसे बयान, जो देशभक्ति की भावनाओं को चोट पहुंचाते हैं.

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नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बयान से खुद को अलग किया

फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने महबूबा मुफ्ती के बयान की निंदा की है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता देवेंद्र सिंह राणा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं के लिए राष्ट्र की एकता और संप्रभुता सर्वोपरि है, हम राष्ट्र की संप्रभुता और एकता से समझौता नहीं करेंगे. देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि उनकी पार्टी के नेताओं ने आश्वासन दिया है कि गुपकार का कोई नेता ऐसा बयान नहीं देगा, जिससे राष्ट्र का हित प्रभावित हो.

महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा था

दरअसल, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वो भारतीय झंडा तब फहराएंगी, जब जम्मू-कश्मीर का झंडा वापस मिलेगा. उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव लड़ने और भारतीय झंडा फहराने में तब तक कोई दिलचस्पी नहीं है, जब तक कि 5 अगस्त, 2019 से पहले वाली स्थिति को दोबारा लागू न कर दिया जाए. उन्होंने कहा-

“मेरा झंडा ये है (सामने मेज पर रखे जम्मू-कश्मीर के झंडे की ओर इशारा करते हुए). जब यह ध्वज वापस आएगा, हम उस ध्वज (तिरंगा) को भी ऊपर उठाएंगे. जब तक हमें अपना झंडा वापस नहीं मिल जाता, हम किसी और झंडे को नहीं उठाएंगे. इस देश के ध्वज के साथ हमारा संबंध इस ध्वज (जम्मू और कश्मीर के ध्वज) से स्वतंत्र नहीं है. जब यह झंडा हमारे हाथ में आएगा, हम उस झंडे को भी उठाएंगे.”

PDP प्रवक्ता फिरदौस टाक ने न्यूज़ चैनल ‘आजतक’ के एक कार्यक्रम में कहा-

“आप जबरदस्ती किसी से तिरंगा नहीं उठवा सकते. आप हमें गोली मारेंगे या फिर लिंचिंग करेंगे. यही तो हो सकता है इस सरकार में.”

बीजेपी का विरोध

महबूबा मुफ्ती की टिप्पणियों के विरोध में जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने ‘तिरंगा यात्रा’ का आयोजन किया. एक यात्रा जम्मू में और दूसरी श्रीनगर में निकाली गई. बुलेटप्रूफ गाड़ियों में भारतीय झंडे लहराते हुए इस यात्रा को निकाला गया. इस दौरान पुलिस की जीपें भी साथ थीं. बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जम्मू में पीडीपी ऑफिस पर भी भारतीय झंडा फहरा दिया.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने कहा-

“मैं एलजी मनोज सिन्हा जी से निवेदन करता हूं कि महबूबा मुफ्ती के बयान को संज्ञान में लें. मुफ्ती पर देशद्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए और उन्हें सलाखों के पीछे होना चाहिए.”

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने महबूबा मुफ्ती के बयान पर कड़ा एतराज जाहिर किया. उन्होंने कहा-

जिस तरह मुफ्ती ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है, इससे आपत्तिजनक कुछ नहीं हो सकता. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. 370 का हटाया जाना संवैधानिक प्रक्रिया थी. हम उनके बयान की निंदा करते हैं. तथाकथिक सेक्युलर लॉबी उनके इस एंटीनेशनल बयान पर क्यों चुप है?

कांग्रेस भी बयान के विरोध में

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी मुफ्ती के इस बयान पर असहमति जताई. JKPCC प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा कि इस तरह के बयान समाज में स्वीकार करने योग्य नहीं हैं. उन्हें इस तरह के बयानों से बचना चाहिए था. कांग्रेस ने कहा कि इस बयान से लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है. तिरंगा देश की अखंडता का प्रतीक है और ये याद दिलाता है कि किस तरह सभी ने एक साथ मिलकर आजादी हासिल की थी.

गुपकार के अध्यक्ष बने फारूक

इस पूरे विवाद के बीच महबूबा मुफ्ती को गुपकार संगठन का उपाध्यक्ष और फारूक अब्दुल्ला को अध्यक्ष चुना गया. दरअसल जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर एक संगठन बनाया है, जिसे गुपकार संगठन नाम दिया गया है. संगठन ने जम्मू-कश्मीर के पुराने झंडे को अपना लिया है और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन को अपना प्रवक्ता नियुक्त किया है. ऐसा माना जा रहा है कि ये गठबंधन को औपचारिक रूप देने की कोशिश है.


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