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छत्तीसगढ़: सुकमा में गांववालों का दावा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, पुलिस ने फिर भी चला दी गोली

छत्तीसगढ़ का नक्सल प्रभावित सुकमा जिला. यहां 17 मई को सुरक्षा बलों के नए कैंप को हटाने के विरोध में जमकर बवाल हुआ. सुरक्षाकर्मियों और ग्रामीणों के बीच झड़प भी हुई. फोर्स का कहना है कि नक्सलियों ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर दिया था. जवानों ने इसपर जवाबी कार्रवाई की थी. वहीं गांव वालों का कहना है कि पुलिस ने प्रदर्शन को बंद कराने के लिए गोलियां चलाईं. जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई. ऐसा बताया गया कि गुस्साए गांव वालों ने आसपास के कई पेड़ों को काटकर आग लाग दी है. जवानों की गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया है.

इसी दौरान जनजातीय समूहों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई. मगर इस मुठभेड़ पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं. गांववालों ने आरोप लगाया है कि फायरिंग जवानों ने की थी. वहां कोई नक्सली नहीं था. वहीं बस्तर के आईजी सुंदरराज पी. ने दावा किया है कि इस मुठभेड़ में नक्सली भी शामिल थे.

क्या है पूरा मामला

दरअसल  सुकमा जिले के सिलगेर गांव  में 12 मई को एक नया सीआरफीएफ कैंप खोला गया था. जिसके ठीक दो दिन बाद यानी 14 मई से ही इस कैंप का विरोध होना शुरू गया. आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि

‘इसके बनने के बाद नक्सलियों ने ग्रामीणों को भड़काकर इसका विरोध शुरू कर दिया. जब गांव वाले 17 मई को कैंप का विरोध करने पहुंचे, तो दोपहर 12 बजे के करीब नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी. इसी पर जवानों ने जवाबी कार्रवाई की गई. जिसमें तीन लोगों की जान चली गई. फायरिंग में मारे गए तीन लोगों की शिनाख्त नहीं हो पाई है.’

मतलब अभी तक ये नहीं पता चल पाया है कि मारे गए लोग नक्सली थे या ग्रामीण?

गांव वालों ने क्या आरोप लगाया है

इस मामले में गांव वालों का कुछ और ही कहना है. गांववालों ने सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि फोर्स ने उनके जल, जंगल, जमीन पर कब्ज़ा कर लिया है. इसे लेकर सभी के अंदर नाराज़गी है. उन्होंने कहा कि वो इस बात का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे. लेकिन प्रदर्शन खत्म करने के लिए जवानों ने गोलियां चलाईं. जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई. घटना से चार दिन पहले ही आस-पास के 30 गांवों से जनजातीय समूहों का जत्था कैंप के सामने प्रदर्शन कर रहा था. इस प्रदर्शन में करीब 5 हज़ार लोग मौजूद थे.

गोलीबारी में मरने वालों की संख्या को लेकर ग्रामीण और सुरक्षाबलों का एक मत नहीं है. ग्रामीण जहां 9 लोगों के मारे जाने की बात कह रहे हैं, वहीं आईजी सुंदरराज पी. ने  सिर्फ 3 लोगों की मौत की पुष्टि की है.

गांववालों का ये आरोप भी है कि जवान उन्हें शव नहीं दे रहे हैं. पुलिस ने जब लाठीचार्ज किया और गोलियां चलाईं तो इसमें 9 लोग मारे गए. इनमें से 3 शव सुरक्षाबल के जवान ले गए, जबकि 6 गांव वाले ले गए. उनका यह भी कहना है कि जब वे फोर्स के पास शव लेने गए तो उन्हें धमकाकर भगा दिया गया.

गांव के एक आदमी मंगू पोडियाम ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा,

“हमें पुलिस कैंप नहीं चाहिए और इसलिए हम विरोध कर रहे थे और यहां इकट्ठा हुए थे… उन्होंने पहले भी लाठीचार्ज किया था. सुरक्षा बलों की फायरिंग में 9 ग्रामीणों की मौत हो गई, 3 शव वो अपने साथ ले गये. छह ग्रामीण अभी भी लापता हैं, यहां 20 गांवों के करीब 5000 ग्रामीण आए थे.

वहीं राहुल मडवी ने कहा, “मारे गए लोगों में तीमापुरा के उइका पांडु, गुंडम के रहने वाले भीमा उर्सम और सुडवा गांव के कवासी वागा हैं.”

जहां मुठभेड़ हुई वो इलाका सालों से नक्सलियों के कब्ज़ें में बताया जाता है. ऐसे में ये बताया जा रहा है कि अगर सुरक्षा बलों का कैंप यहां बना तो नक्सलियों को ये जगह छोड़नी होगी. बस्तर के आईजी सुंदरराज पी. ने आरोप लगाया था कि नक्सली ही गांव वालों को सुरक्षा कैंप के खिलाफ भड़का रहे हैं. इसी के चलते गांव वाले भड़के और ये मुठभेड़ हुई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में पुलिस ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. जिसमें एक महिला भी शामिल है.

फिलहाल पूरे इलाके में तनाव की स्थिति है. इस पूरी घटना पर सरकार ने चुप्पी साध रखी है. छत्तीसगढ़ के किसी भी मंत्री का इस पर कोई बयान नहीं आया है. जैसे ही इस पर कोई आधिकारिक बयान आता है हम फौरन उसका अपडेट आप तक पहुचाएंगे.


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