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मसूद अज़हर के अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होने से भारत को क्या फर्क पड़ेगा?

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आखिरकार 1 मई, 2019 को आतंकवाद के खिलाफ भारत को एक बड़ी कामयाबी मिल ही गई. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भारत के सबसे बड़े खतरे मौलाना मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर ही दिया. इससे पहले भारत की ओर से मसूद अज़हर को कई बार अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने की कोशिश की गई थी, लेकिन हर बार चीन इसमें अडंगा लगाता रहता था.

भारत के लिए क्यों ज़रूरी थी ये घोषणा?

भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ा कोई खतरा है तो उसका नाम है मौलाना मसूद अज़हर. ये वही आतंकवादी है, जिसे छुड़ाने के लिए आतंकवादियों ने प्लेन तक को हाईजैक कर लिया था. मज़बूरी में भारत सरकार को इस आतंकी को छोड़ना पड़ा. उसके बाद से ही मसूद अज़हर भारत में कई आतंकी हमले करवा चुका है. संसद भवन पर हुए हमले से लेकर पठानकोट और पुलवामा हमले तक में मसूद अज़हर शामिल रहा है. अब जब सुरक्षा परिषद की ओर से मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया गया है, तो अब मसूद अज़हर पर पूरी दुनिया के देश ऐक्शन ले सकेंगे. मसूद अज़हर के साथ अब क्या-क्या हो सकता है, हम आपको बताते हैं-

मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया है
मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया है

# दुनियाभर के देशों में मसूद अज़हर की एंट्री पर बैन लग जाएगा.

# मसूद किसी भी देश में आर्थिक गतिविधियां नहीं चला पाएगा.

# संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश मसूद के बैंक अकाउंट्स और प्रॉपर्टी को फ्रीज कर देंगे.

# मसूद से संबंधित व्यक्तियों या उसकी संस्थाओं को कोई मदद नहीं मिलेगी.

# पाकिस्तान को भी मसूद अजहर के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने पड़ेंगे.

# बैन के बाद पाकिस्तान को मसूद अजहर के टेरर कैंप और उसके मदरसों को भी बंद करना पड़ेगा.

चीन चाहता, तो 2009 में ही हो गया होता फैसला

# भारत ने साल 2009 में ही मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ में दिया था. उस वक्त चीन ने अडंगा लगा दिया था.

# साल 2016 में भारत ने एक बार फिर अमेरिका, यूके और फ्रांस यानी पी-3 देशों के साथ मिलकर मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया. प्रस्ताव में कहा गया कि जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमले का मास्टरमाइंड अजहर ही था. पर चीन ने फिर रोड़ा लगा दिया.

# साल 2017 में पी-3 देशों ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में मसूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए प्रस्ताव दिया. चीन ने फिर से इसे रोक दिया.

# 27 फरवरी, 2019 को एक बार फिर से फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने मसूद अज़हर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने का प्रस्ताव रखा. समिति के सदस्यों को इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए 10 दिन का वक्त था. ये समय सीमा 13 मार्च, 2019 की रात 12.30 बजे खत्म हो रही थी. इससे पहले ही चीन ने प्रस्ताव को होल्ड कर दिया. चीन ने प्रस्ताव की समीक्षा और कुछ टाइम और देने की मांग की थी. चूंकि सुरक्षा परिषद को फैसला करने के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति लेनी थी, लिहाजा उस वक्त मसूद अज़हर पर फैसला नहीं हो सका.

#  अब 1 मई, 2019 को चीन ने अपना होल्ट हटा लिया, जिसके बाद सुरक्षा परिषद ने मसूद अज़हर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने का फैसला कर लिया.


 

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