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अहमदाबाद के SVP अस्पताल में 'कोरोना वॉरियर्स' हड़ताल पर चले गए, लगाया बड़ा आरोप

कोरोना महामारी से लड़ रहे डॉक्टर, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ को पूरा देश धन्यवाद दे रहा है. लेकिन पेट भरने के लिए केवल शाबाशी से काम नहीं चलता. उसके लिए सैलरी की जरूरत पड़ती है. अहमदाबाद के एसवीपी अस्पताल में मेडिकल कर्मियों की सैलरी काटने का मामला सामने आया है, जिससे खफा होकर वे हड़ताल पर बैठ गए हैं.

‘आज तक’ की पत्रकार गोपी मणियार ने यूट्यूब चैनल ‘गुजरात तक’ के माध्यम से इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने यह वीडियो ट्विटर पर भी शेयर किया:

अस्पताल का पूरा नाम है – सरदार वल्लभभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ एंड रिसर्च. यह अस्पताल पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के मॉडल पर चलता है. एक तरफ अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) और साथ में प्राइवेट कंपनी अपडेटर सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड (UDS). रिपोर्ट के मुताबिक़, इस अस्पताल में अभी 500 से ज़्यादा कोरोना मरीज दाखिल हैं. लेकिन 2400 से ज़्यादा मेडिकल वर्कर अस्पताल के बाहर हड़ताल पर बैठे हुए हैं.

क्या है पूरा मामला

पिछले दो महीने से ये लोग कोरोना महामारी से लड़ने में दिन-रात लगे हुए थे. बिना अपनी जान की परवाह किए हुए. अचानक इन लोगों के पास एक ईमेल आया, जिनमें इनकी सैलरी में कटौती करने के बारे में जानकारी दी गई. हड़ताल पर बैठी हुई एक मेडिकल कर्मी ने बताया कि जो 32,000 कमाते हैं, उनकी सैलरी 10 से 12 हज़ार कम कर दी गई है. जिन्हें नौकरी करते हुए एक साल हो गया, उन्हें कोई इन्क्रीमेंट भी नहीं दिया गया है. कोरोना की स्पेशल ड्यूटी पर होने के नाते इन्हें हर रोज़ 250 रुपए AMC से, और 250 रुपए UDS से मिलने थे. लेकिन 50 दिन से इन 500 रुपए का भी कोई अता-पता नहीं.

कुछ अन्य कर्मचारियों ने बताया कि जब उन्होंने मैनेजमेंट से सैलरी और अलाउंस की बात कही, तो उन्हें नौकरी छोड़ देने के लिए कह दिया गया. कुछ लोगों को ड्यूटी से निकाला भी गया है. आरोप है कि कुछ लोगों को सीटीसी, यानी कुल तनख्वाह के कागज़ पर ज़बरदस्ती साइन करने को कहा गया.

मैनेजमेंट ने कहा कि UDS कंपनी घाटे में जा रही है. लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि UDS को AMC से अच्छा-ख़ासा पैसा मिल रहा है.

कर्मचारियों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है, जब उन्हें ऐसी समस्या झेलनी पड़ी हों. UDS कभी समय पर वेतन नहीं देती. बहुत से लोगों की तनख्वाह अभी भी रुकी हुई है. कर्मचारियों को छुट्टी भी नहीं दी जाती है.

दूसरों की जान बचाने वाले खुद खतरे में! 

हड़ताल पर बैठे लोगों से पूछा गया कि क्या उनकी कोरोना की जांच हुई है? इस पर वहां बैठे सभी लोगों ने बताया कि उनकी ऐसी कोई भी जांच नहीं हुई है. कोविड की जांच तो दूर की बात है, उनकी कोई स्क्रीनिंग तक नहीं हुई है. इन लोगों ने बताया कि कोरोना वॉर्ड में काम करते हुए कुछ लड़कों को संक्रमण हो गया. उनकी पहली कोरोना जांच हुई. दूसरी जांच अभी तक नहीं हुई है. इतना ही नहीं, वे कोरोना पॉज़िटिव लड़के बाहर खुले में घूम रहे हैं. उनके क्वारंटीन के लिए कोई इंतज़ाम नहीं किया गया. बहुत से स्टाफ के लोग इकट्ठे रहते हैं. उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह से तो वे सभी लोग कोरोना संक्रमित हो जाएंगे.


वीडियो देखें: कोरोना वायरस को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने पहले राज्य सरकार की आलोचना की और अब तारीफ?

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