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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- IAS उम्मीदवारों को उनका मनपसंद कैडर चुनने का अधिकार नहीं

UPSC परीक्षा पास करने वाले IAS उम्मीदवारों को उनका मनपसंद कैडर चुनने का अधिकार नहीं है. शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया. जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की बेंच ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज करते हुए ये बात कही. केरल हाईकोर्ट ने केंद्र से IAS अधिकारी ए शाइनामोल को केरल काडर देने को कहा था. केंद्र ने शाइनामोल को हिमाचल प्रदेश कैडर आवंटित किया था.

क्या है मामला?

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ए. शाइनामोल ने 2007 में UPSC परीक्षा पास की. उन्हें 20वीं रैंक मिली. शाइनामोल मूल रूप से केरल की रहने वाली हैं. उन्होंने ये परीक्षा जनरल कैटेगरी से पास की थी. हालांकि वो अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय से आती हैं, जिस कारण उनके पास ओबीसी आरक्षण का विकल्प भी था, लेकिन उन्होंने आरक्षण का इस्तेमाल नहीं किया.

आयोग ने उनकी पहली नियुक्ति हिमाचल प्रदेश कैडर में की. लेकिन शाइनामोल को ये पसंद नहीं आया. वे चाहती थीं कि उन्हें केरल में ही नियुक्त किया जाए. इसलिए वे केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण यानी Central Administrative Tribunal की एर्णाकुलम बेंच पहुंच गईं ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाते हुए कहा,

“महाराष्ट्र कैडर में पहले से नियुक्त हुए अधिकारी की जगह शाइनामोल को उनकी मेरिट को ध्यान में रखते हुए आउटसाइडर ओबीसी कैटिगरी के तहत नियुक्त किया जाए”.  

ट्रिब्यूनल के इस फैसले से भी शाइनामोल संतुष्ट नहीं हुई. इसके बाद वे केरल हाई कोर्ट पहुंची. केरल हाईकोर्ट ने फैसला उनके पक्ष में सुनाते हुए कहा कि शाइनामोल को उनके गृह राज्य केरल में ही नियुक्त किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

केरल हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद शाइनामोल तो संतुष्ट हो गईं, लेकिन केंद्र ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हेमंत गुप्ता और वी रामासुब्रमण्यम की बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा,

“जब शाइनामोल ने ओबीसी कोटा नहीं चुना है तो उन्हें ओबीसी कोटे के तहत महाराष्ट्र में किस आधार पर नियुक्ति दी गई. ट्रिब्यूनल और केरल हाई कोर्ट दोनों को ही फैसले सुनाने से पहले इस पहलू पर भी ध्यान देना चाहिए था. एक बार उन्होंने आरक्षण छोड़ दिया तो वे जनरल केटेगरी के अंदर आ गई हैं”.

शाइनामोल का कहना ये था कि हिमाचल प्रदेश कैडर में नियुक्त करने से पहले आयोग ने उनके राज्य केरल से इसकी इजाजत नहीं ली. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि

“एक केन्द्रीय कर्मचारी के तौर पर नियुक्त होने के नाते आपको देश में हर जगह काम करना होगा. शाइनामोल का पूरा केस ही इस तर्क पर आधारित है कि उनके राज्य से नियुक्ति के लिए इजाजत नहीं ली गई, उनका ये तर्क ही निराधार है”.

इसके बाद 1995 में भारत गणराज्य बनाम आईएएस राजीव यादव वाले केस का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा,

“ये बात सोचने वाली है कि आयोग को किस राज्य से इजाजत लेनी चाहिए, जिस राज्य में नियुक्ति होनी है या उम्मीदवार के गृह राज्य से. उम्मीदवारों को कैडर आयोग देगा और उम्मीदवारों के पास कैडर चुनने का कोई अधिकार नहीं है”.

1995 में आईएएस राजीव यादव वाले केस में तीन जजों की एक बेंच ने भी यही कहा था कि कैडर चुनने का अधिकार उम्मीदवारों के पास नहीं है.


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