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कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, अब आंदोलन करने वाले किसान क्या करेंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को बड़ा झटका दिया है. उन कृषि कानूनों पर रोक लगा दी है जिनके चलते किसान लंबे समय से दिल्ली की सीमाओं पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले को सुलझाने के लिए एक कमिटी बनाने के निर्देश भी दिए हैं. यह कमेटी सभी पक्षों से बात करने के बाद अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेगी.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और याचिका दायर करने वालों से तीखे सवाल पूछे. कोर्ट ने पूछा कि क्या वाकई में किसान आंदोलन में ऐसे संगठन घुसपैठ कर चुके हैं जो बैन हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा है.

कमेटी न सजा देगी न आदेश पारित करेगी – कोर्ट

किसान कानूनों को अच्छी तरह से समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जिस कमेटी को बनाने का प्रस्ताव कोर्ट ने दिया है उसके बारे में भी कोर्ट ने कई बातें साफ की हैं. चीफ जस्टिस ने कहा कि यह कमेटी सबकी सुनेगी. जिसे भी इस मुद्दे का समाधान चाहिए वह कमेटी के पास जा सकता है. न तो यह कमेटी कोई आदेश जारी करेगी और न ही यह किसी को सजा ही देगी. यह सिर्फ हमें अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. उन्होंने कहा कि हम इस कमेटी का गठन इसलिए कर रहे हैं कि ताकि हमारे पास एक साफ तस्वीर हो. हम यह नहीं सुनना चाहते हैं कि किसान कमिटी के पास नहीं जाएंगे. हम समस्या का समाधान करना चाहते हैं. अगर आप अनिश्चितकाल के लिए प्रदर्शन करना चाहते हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि कमेटी को भी अनिश्चित काल के लिए नहीं बनाया जा रहा है.

Supreme Court Article 32 And 226
सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल कमेटी बनाने के साथ यह भी साफ कर दिया कि यह कमेटी काम कैसे करेगी.

ये लोग हो सकते है कमेटी में शामिल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कमेटी के मेंबर्स के नामों पर भी विचार करने की बात कही गई. कुछ नामों की चर्चा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे ने भी की. इन नामों में एग्रीकलचर इकॉनमिस्ट अशोक गुलाटी, हरसिमरत मान, अनिल धनवत और नेशनल अकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च मैनेजमेंट के पूर्व डायरेक्टर प्रमोद जोशी के नाम शामिल हैं. कोर्ट ने 11 जनवरी की सुनवाई में भी किसान संगठनों और सरकार से कमेटी के लिए मेंबर्स और मुखिया का नाम सुझाने के लिए कहा था.

‘पीएम बात क्यों नहीं करते’

किसान संगठनों की तरफ पेश हुए वकील एमएल शर्मा ने कोर्ट के सामने पीएम के किसान आंदोलन को अनदेखा करने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि किसानों ने कहा है कि कई लोग बातचीत के लिए आए, लेकिन मुख्य व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं आए. इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम पीएम को बातचीत करने के लिए नहीं कह सकते हैं. वह इस मामले में पार्टी नहीं हैं. एमएल शर्मा ने सुनवाई के दौरान ही चीफ जस्टिस बोबडे की तारीफ करते हुए कहा कि आप तो जीवित भगवान हैं.

Pm Narendra Modi 2
किसान पक्ष के वकील ने कोर्ट में कहा कि पीए मोदी प्रदर्शन कर रहे किसानों से बात ही नहीं कर रहे.

प्रदर्शन कहां हो इससे हमें मतलब नहीं – कोर्ट

सुनवाई के दौरान जब प्रदर्शन करने की जगह को लेकर सवाल उठा तो कोर्ट ने इससे खुद को अलग कर लिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा मसला है इसे सरकार ही समझे.तो किसान संगठनों के वकील विकास सिंह ने कहा कि किसान प्रदर्शन स्थल से उस जगह जा सकते हैं जहां से प्रदर्शन दिखे. वरना प्रदर्शन करने का मतलब ही क्या रह जाएगा. रामलीला मैदान को प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराया जाए. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रामलीला मैदान या कहीं और पर प्रदर्शन के लिए पुलिस कमिश्नर से किसान इजाजत के लिए आवेदन दे सकते हैं. इसके लिए हम कोई ऑर्डर नहीं दे सकते.

‘आंदोलन में खालिस्तानी कर रहे हैं मदद’

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बोबडे ने पूछा कि हमारे पास एक आवेदन है जिसमें कहा गया है कि कुछ प्रतिबंधित संगठन इस प्रदर्शन में मदद कर रहे हैं. क्या अटॉर्नी जनरल इसे मानेंगे या इस बात से इनकार करेंगे. इसपर अटॉर्नी जनरल जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा हमने पहले ही कहा था कि प्रदर्शन में खालिस्तानियों की घुसपैठ है. इसपर कोर्ट ने कहा कि ऐसा है तो केंद्र सरकार कल तक हलफनामा दे. जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि हम हलफनामा देंगे और उससे साथ खूफिया एजेंसी आईबी के रेकॉर्ड भी देंगे.

अब किसान क्या करेंगे?

प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. हालांकि, उनकी मांग किसान कानूनों को पूरी तरह रद्द करने की है, उनके मुताबिक सिर्फ रोक लगाना काफी नहीं है. ऐसे में किसानों ने प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया है.


वीडियो – सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- किसान आंदोलन को लेकर सरकार इतने दिनों से आखिर कर क्या रही है?

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