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प्रशांत भूषण ने कही ये बात, तो कोर्ट बोला- हजार अच्छे काम से गुनाह करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता

अदालत की अवमानना (contempt of court) के दोषी करार दिए जा चुके सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण की सजा पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धरती पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिससे गलती न हुई हो. व्यक्ति को दिल से अपनी गलती का अहसास होना चाहिए. अदालत ने  प्रशांत भूषण से कहा कि हम आपको दो-तीन दिन का वक्त देते हैं. आप अपने स्टेटमेंट में दोबारा विचार करें. कोर्ट का कहना था कि अगर कोई हजार अच्छे काम करता है तो उसे 10 गुनाह करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता. प्रशांत भूषण ने महात्मा गांधी के बयान कोट करते हुए कहा कि न मुझे दया चाहिए, न मैं इसकी मांग कर रहा हूं। कोर्ट जो सज़ा देगा, मैं तैयार हूं। इसके बाद भी कोर्ट ने उनसे कहा कि आप दो-तीन में सोचकर बताएं. इस बीच दिलचस्प बात ये हुई कि केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को भूषण को सजा न देने पर विचार करना चाहिए।

सज़ा पर बहस से एक दिन पहले प्रशांत भूषण ने कोर्ट में एक आवेदन दिया था और 20 अगस्त की सुनवाई टालने की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि वह इस केस में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे.

कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

  • प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीट्स को अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति बताया और माफी मांगने से इनकार कर दिया.
  • कोर्ट ने प्रशांत भूषण को दो-तीन दिन का वक्त दिया और कहा कि वह अपने स्टेटमेंट पर दोबारा विचार करें.
  • कोर्ट ने कहा, जब तक आपकी पुनर्विचार याचिका पर फैसला नहीं होता, सजा संबंधी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
  • अटॉर्नी जनरल (AG) के.के. वेणुगोपाल ने प्रशांत भूषण को सज़ा न देने की कोर्ट से अपील की. हालांकि कोर्ट ने उन्हें भी दो-तीन दिन का वक्त दिया, कहा कि वह इस दौरान केस को ठीक से देखें. फिर अपना फैसला बताएं.

अब सुनवाई पर विस्तार से बात.

‘बार एंड बेंच’ के मुताबिक, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच में प्रशांत भूषण का पक्ष वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने रखा. उन्होंने सुनवाई की शुरुआत में कोर्ट से सुनवाई टालने की अपील की. कहा कि वह 14 अगस्त के फैसले को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले हैं. इस पर जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि जो भी सज़ा सुनाई जाएगी, वो तब तक लागू नहीं होगी, जब तक पुनर्विचार पर फैसला न आ जाए.

कोर्ट ने ये भी कहा कि-

‘हम आपके साथ न्यायसंगत रहेंगे, तब भी, जब आप हमारे साथ न्यायसंगत नहीं हैं.”

कोर्ट ने दुष्यंत दवे से सवाल किया कि 17 अगस्त को राजीव धवन ने स्टेटमेंट दिया था कि पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे. अब तक इसे फाइल क्यों नहीं किया गया? जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि ऐसा लगता है कि रिव्यू पिटिशन तब फाइल की जाएगी, जब बेंच के एक जज रिटायर हो जाएंगे.

दरअसल, जस्टिस अरुण मिश्रा 2 सितंबर 2020 को रिटायर होने वाले हैं. खैर, जस्टिस गवई के कमेंट पर वापस आते हैं. जवाब में वकील दवे ने कहा-

“रिव्यू फाइल करने के लिए 30 दिन का वक्त होता है. ये धारणा मत जाने दीजिए कि जस्टिस मिश्रा के रिटायर होने तक रिव्यू फाइल नहीं होगा. और अगर रिव्यू फाइल करने तक जस्टिस मिश्रा रिटायर हो जाते हैं तो अच्छा ही होगा. तब जो भी आदेश जस्टिस मिश्रा ने दिया है, उस पर पुनर्विचार हो सकेगा. लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि जस्टिस मिश्रा के रिटायर होने के पहले रिव्यू फाइल कर ही दिया जाए. इसके लिए 30 दिन की वैधानिक सीमा है.”

इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वो आश्वस्त करते हैं कि जब तक पुनर्विचार याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक सजा पर अमल नहीं किया जाएगा.

प्रशांत भूषण अपनी बात पर अड़े 

कोर्ट में दिए अपने स्टेटमेंट में प्रशांत भूषण ने कहा कि मुझे दुख है कि कोर्ट ने मुझे दोषी ठहराया. मुझे पूरी तरह गलत समझा गया. कोई सबूत दिए बिना ही नतीजा तय कर दिया गया. मैं हैरान हूं कि कोर्ट ने मुझे वो शिकायत मुहैया नहीं कराई, जिसके आधार पर अवमानना की बात हुई. मैं इस बात से भी निराश हूं कि कोर्ट ने मेरे एफिडेविट पर विचार नहीं किया. उन्होंने कहा-

“मैं केवल ये दोहरा सकता हूं कि मेरे ट्वीट मेरे निष्कपट भावों का प्रतिनिधित्व हैं, जिसकी अभिव्यक्ति किसी भी लोकतंत्र में स्वीकार्य होनी चाहिए. मेरा मानना है कि संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए किसी भी लोकतंत्र में खुली आलोचना ज़रूरी है. मेरे ट्वीट्स मेरे सबसे बड़े कर्तव्य के पालन का एक छोटा-सा प्रयास थे. माफी मांगना भी मेरे कर्तव्य का अपमान होगा.

प्रशांत भूषण ने कहा कि मेरे ट्वीट्स को संस्थान की बेहतरी के लिए काम करने के प्रयास के तौर पर देखा जाना चाहिए. इसलिए मैं केवल ये बात कह सकता हूं, जो महात्मा गांधी ने अपने ट्रायल के वक्त कही थी कि-

“मैं दया नहीं मांगता. मैं उदारता के लिए अपील नहीं करता. कोर्ट मुझे जो भी सज़ा देगा, मैं उसे प्रसन्नतापूर्वक लेता हूं.”

इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि कई बार जोश में लक्ष्मण रेखा क्रॉस कर दी जाती है. उन्होंने कहा-

“आप सिस्टम का हिस्सा हैं. लेकिन जोश में कई बार लक्ष्मण रेखा क्रॉस हो जाती है. ये नहीं होना चाहिए. अच्छे काम करने का स्वागत होता है. आपने कुछ अच्छे केस फाइल किए, जिसकी हम तारीफ करते हैं. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ कुछ प्रतिबंध भी हैं, जिन्हें बैलेंस किया जाना होता है. मैंने अपने जूडिशियल करियर में, किसी भी व्यक्ति को अवमानना का दोषी करार नहीं दिया है. लेकिन देखिए, ये इंस्टीट्यूशन की छवि से जुड़ा मुद्दा है.

‘NDTV’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस मिश्रा ने कहा-

“धरती पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिससे गलती न हो. व्यक्ति को दिल से अपनी गलती का अहसास होना चाहिए. मैं कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हूं, जो किसी को भी इस तरह से सज़ा दे दे. 

इसके बाद जस्टिस मिश्रा ने प्रशांत भूषण को उनके स्टेटमेंट पर विचार करने के लिए दो-तीन दिन का वक्त दिया. उन्होंने कहा कि सवाल ये है कि आप स्टेटमेंट को जस्टिफाई कर रहे हैं, लेकिन सही या गलत, हमने दोषी करार दिया है. हमने आपका स्टेटमेंट सुना है

केंद्र ने किया प्रशांत भूषण का बचाव

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से अपील की कि इस मामले में प्रशांत भूषण को सजा न दी जाए। एनबीटी के मुताबिक, जस्टिस मिश्रा ने कहा-

“आप प्रशांत भूषण का जवाब देखे बिना ऐसी दलील न दें। देखिए, उन्होंने अपने जवाब में क्या कहा है। उनके जवाब में आक्रामकता झलकती है, बचाव नहीं। हम इन्हें माफ नहीं कर सकते। जब तक प्रशांत भूषण अपने स्टेटमेंट पर पुनर्विचार नहीं करते, तब तक यह संभव नहीं है।

जस्टिस मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वो 2-3 दिन का वक्त लें. पूरे केस को देखें, उस पर विचार के बाद अपना तर्क दें. जस्टिस मिश्रा ने ये भी कहा कि वो नहीं चाहते कि AG के मौजूदा तर्क से बेंच प्रभावित हो.

प्रशांत भूषण ने भी कोर्ट में कहा कि उन्होंने जो स्टेटमेंट दिया है, वो काफी सोच-समझकर दिया है. उसमें किसी तरह का बदलाव होना मुश्किल है. भूषण ने आगे कहा कि दो-तीन दिन में बदलाव के मुद्दे पर वो अपने वकील से बात करना चाहेंगे.

कैसे शुरू हुआ था मामला?

प्रशांत भूषण के खिलाफ ये मामला उनके दो ट्वीट्स को लेकर चल रहा है. इनमें एक ट्वीट चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) एसए बोबडे की सुपरबाइक वाली तस्वीर से जुड़ा था. दूसरे ट्वीट में उन्होंने देश के पिछले चार मुख्य न्यायाधीशों पर टिप्पणी की थी. इन ट्वीट्स पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी. 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण और ट्विटर को नोटिस जारी किया. नोटिस के बाद दोनों ट्वीट हटा दिए गए थे.

नोटिस का क्या जवाब दिया था प्रशांत भूषण ने?

प्रशांत भूषण ने नोटिस के जवाब में कहा था कि CJI की आलोचना सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को कम नहीं करता. बाइक पर सवार CJI के बारे में ट्वीट कोर्ट में सामान्य सुनवाई न होने को लेकर उनकी पीड़ा को दर्शाता है. चार CJI वाले दूसरे ट्वीट पर उन्होंने कहा था कि उसके पीछे उनकी सोच थी, जो भले ही अप्रिय लगे, लेकिन अवमानना नहीं है.


वीडियो देखें: चीफ जस्टिस पर प्रशांत भूषण की टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

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