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जामिया और AMU में पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी. दोनों यूनिवर्सिटीज़ के कैम्पस में पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ आई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 17 दिसंबर को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में उसे हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है. ये कानून व्यवस्था की दिक्कत है, कैसे बसें जल सकती हैं? हाईकोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाते? आप हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को इस मामले में ज़रूरी कदम उठाने दें.

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक इंदिरा जयसिंह, जो स्टूडेंट्स का पक्ष रख रही हैं, उन्होंने कहा,

‘ये स्थापित कानून है कि पुलिस यूनिवर्सिटी के वीसी की परमिशन के बिना कैंपस में प्रवेश नहीं कर सकती. एक आदमी की आंखों की रोशनी चली गई. कुछ स्टूडेंट्स के पैर टूट गए. ये क्रॉस स्टेट का मामला है और इसकी जांच के लिए SIT की जरूरत है. कोर्ट इस मुद्दे से अपने हाथ कैसे धो सकता है. कोर्ट ने तेलंगाना एनकाउंटर का केस सुना. हम भी इसी तरह के ऑर्डर की अपील कर रहे हैं. पूरे देश में स्टूडेंट्स के खिलाफ FIR दर्ज की जा रही हैं. अगर आप शांति चाहते हैं तो प्लीज़ निर्दोष स्टूडेंट्स के खिलाफ FIR दर्ज करके उन्हें जेल में न फेंका जाए. मैं चाहती हूं कि स्टूडेंट्स के खिलाफ कोई भी बलपूर्वक एक्शन न लिया जाए.’

इस तर्क पर सॉलिसिटर जनरल टी मेहता ने जवाब दिया कि किसी भी स्टूडेंट की आंखों की रोशनी नहीं गई है. बार एंड बेंच के मुताबिक, CJI ने कहा,

‘हाई कोर्ट के सामने फैक्ट्स रखे जाएं. सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जरूरी एक्शन लेंगे और फिर अगर आपको कोई दिक्कत लगे, तो आप हमारे पास आ सकते हैं. पहले हाई कोर्ट का ऑर्डर आने दें.’

बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने सारी बहस होने के बाद कहा-

इस मुद्दे के नेचर के बारे में अगर देखें, तो ये बड़े हिस्से में फैला हुआ है. हमें नहीं लगता कि केवल एक कमिटी अपॉइंट कर देना ठीक होगा. सुप्रीम कोर्ट निर्देश देता है कि याचिकाकर्ता पहे हाई कोर्ट्स जाएं. उस हाई कोर्ट में जाएं, जिसके क्षेत्राधिकार का मामला हो. यानी जिसके क्षेत्राधिकार में ये घटना घटी हो. हमें यकीन है कि जरूरी जांच की जाएगी. हाई कोर्ट अगर चाहे तो सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व जज को जांच के लिए नियुक्त कर सकता है.

क्या है मामला?

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी इस वक्त खबरों में बनी हुई है. वहां के स्टूडेंट्स नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) का विरोध कर रहे हैं. 15 दिसंबर को प्रदर्शन हिंसक हो गया. पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. और इसी दौरान पुलिस और स्टूडेंट्स के बीच झड़प हो गई. रिपोर्ट्स आईं कि पुलिस ने यूनिवर्सिटी के अंदर घुसकर स्टूडेंट्स को पीटा.

जामिया की वीसी नजमा अख्तर ने 16 दिसंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि पुलिस बिना परमिशन के अंदर घुसी थी. और लाइब्रेरी के अंदर घुसकर तोड़-फोड़ की थी. इस बात पर दिल्ली पुलिस के PRO एमएस रंधावा ने कहा कि वो प्रदर्शनकारियों को पीछे की तरफ पुश कर रहे थे, तब प्रदर्शनकारी यूनिवर्सिटी गेट के अंदर घुस गए. उन्हें बाहर निकालने के लिए पुलिस को भी अंदर जाना पड़ा.


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