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महाराष्ट्र पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

महाराष्ट्र्र पर सुप्रीम कोर्ट में 25 नवंबर यानी सोमवार को फिर से सुनवाई होगी. रविवार को सुनवाई में सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पार्टियों को नोटिस देकर जवाब मांगा है. अब सोमवार को साढ़े दस बजे मामले की फिर से सुनवाई होगी. कोर्ट ने कहा विधायकों और गवर्नर की चिट्ठी देखने के बाद ही इस मामले में आगे सुनवाई होगी.

इससे पहले शनिवार के दिन ही सरकार गठन के बाद शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसमें फडणवीस सरकार को बर्खास्त करके 24 घंटे के भीतर फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की गई थी. इस मामले में जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ मामले की सुनवाई की.

सुनवाई शुरू होते ही शिवसेना की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा-

हम माफी मांगते हैं कि आपको रविवार को बुलाना पड़ा. लेकिन महाराष्ट्र में सरकार गठन की प्रकिया में राज्याल ने दूसरी पार्टियों के साथ पक्षपात किया है. कोर्ट की तरफ से आज ही फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दिया जाए. हम बहुमत साबित होने को तैयार हैं.

इस पर जस्टिस रमन्ना ने कहा-

कोई बात नहीं. इसमें कोई दो राय नहीं है कि शक्ति परीक्षण बहुमत साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है. इस कोर्ट में कोई भी कुछ भी मांग सकता है. कोई भी व्यक्ति उसे प्रधानमंत्री बनाने के लिए कह सकता है.

कपिल सिब्बल की बातों पर जस्टिस भूषण ने भी महाराष्ट्र में जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराने पर सहमति जताई.

फिर कपिल सिब्बल ने कहा-

कल सुबह 5.17 मिनट पर राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया. 8 बजे 2 लोगों ने सीएम और डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ली. ये किस दस्तावेज के आधार पर हुआ?

इस पर बीजेपी की तरफ से कोर्ट में पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा-

मुझे नहीं पता कि रविवार को सुनवाई क्यों हो रही है, रविवार को कोई सुनवाई नहीं होनी चाहिए. मेरे अनुसार इस मामले में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को लिस्टेड ही नहीं किया जाना चाहिए.

फिर कपिल सिब्बल ने कहा-

महाराष्ट्र के लोगों को सरकार चाहिए. हम कह रहे हैं कि हमारे पास बहुमत है. हम इसे साबित करने के लिए तैयार हैं. हम कल बहुमत साबित कर देंगे. हमें मौका दिया जाए. हमने कर्नाटक में भी इसे देखा है. यदि बीजेपी के पास बहुमत है, तो उन्हें आज ही फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने दें.

बहुमत वाली बात पर मुकुल रोहतगी ने कहा-

कुछ चीजें ऐसी हैं जो राष्ट्रपति के पास हैं जिस पर न्यायिक हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं.

तमाम दलीलों के बाद कांग्रेस और एनसीपी की तरफ से पक्ष रख रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा-

जब शाम 7 बजे घोषणा की गई कि हम सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं और उद्धव ठाकरे सरकार का नेतृत्व करेंगे, तो क्या राज्यपाल इंतजार नहीं कर सकते थे? कल एनसीपी ने फैसला किया कि अजीत पवार विधायक दल के नेता नहीं हैं. ऐसे में उनकी अपनी पार्टी का समर्थन उनके पास नहीं है तो वह उपमुख्यमंत्री कैसे रह सकते हैं?

फिर बीजेपी की तरफ से पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कहा-

आज ही कोर्ट की तरफ से आदेश दिया जाए इसकी कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए. गवर्नर ने कोई गलत फैसला नहीं लिया है. क्या सुप्रीम कोर्ट फ्लोर टेस्ट आगे बढ़ाने का आदेश दे सकता है. वे सभी तीन सप्ताह से सो रहे थे. उनके पास उनके दावों का कोई डॉक्यूमेंट भी मौजूद नहीं है.

फिर मुकुल रोहतगी ने आगे कहा-

सदन कोर्ट का और कोर्ट सदन का सम्मान करता है. यही सत्य है. नहीं तो कहीं विधानसभा कल को पास कर दे कि सुप्रीम कोर्ट दो साल में सारे मामले निपटाए. दो-तीन दिनों का वक्त भी दिया जा सकता है. 

कोर्ट में तीनों दलों ने 144 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा किया. जिसके बाद जस्टिस एनवी रमन्ना, अशोक भूषण और संजीव खन्ना की पीठ ने तुरंत फ्लोर टेस्ट की मांग को खारिज करते हुए सभी पार्टियों को नोटिस भेजकर जवाब मांग लिया. अब इस मामले में सोमवार के दिन सुबह साढे़ 10 बजे यही बेंच सुनवाई करेगी.


Video: मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष रहे संजय निरूपम महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं पर क्या बोले?

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