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बीमार पिता को साइकिल पर बिठाकर लड़की ने जितनी दूरी तय की, वो जानकर आप भी उसे शाबाशी देंगे!

कोरोना और लॉकडाउन का दौर. भारत में लगातार मजदूरों के साइकिल, रिक्शा और यहां तक कि पैदल ही घर लौटने की खबरें आ रही हैं. इसी सिलसिले में दरभंगा की ज्योति की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं. ज्योति अपने पिता को साइकिल पर बैठाकर गुरुग्राम (हरियाणा) से दरभंगा (बिहार) तक आई है. उन्होंने कुल 1200 किलोमीटर की दूरी सात दिनों में तय की है.

पिता का जनवरी में हुआ था एक्सिडेंट 

ज्योति के पिता गुरुग्राम में किराए पर ई-रिक्शा चलाते हैं. लेकिन जनवरी में उनका एक्सिडेंट हो गया था. ज्योति अपनी मां और चार भाई-बहनों के साथ पिता के पास गई थी. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ज्योति की मां आंगनबाड़ी में हैं. काम के दबाव में ज्यादा दिन रुक नहीं सकीं, तो ज्योति को पिता के पास छोड़कर दरभंगा लौट आईं. इसी बीच लॉकडाउन की घोषणा हो गयी. पैसे भी धीरे-धीरे खत्म हो गए.

ज्योति के पिता मोहन ने बताया-

खाने-पीने में दिक्कत हो रही थी. मकान मालिक भी धमकी देता था. पहले सोचा कि लॉकडाउन के बाद कमा कर दे देंगे, लेकिन ये बढ़ता ही गया. मेरी दवा भी बंद हो गयी थी. राशन-पानी भी मिल नहीं रहा था. हमें लगा कि अब यहीं भूखों मर जाएंगे. लेकिन मेरी बेटी ने कहा कि पापा चलो, हम ले चलेंगे साइकिल से. मैंने मना किया. लेकिन फिर मेरी लड़की हिम्मत करके ले आयी. 

लॉकडाउन में यातायात के साधन नहीं होने की वजह से ज्योति ने दरभंगा तक का लंबा सफर अपनी साइकिल से ही पूरा किया. इसी बीच मोहन को 1000 रुपये की कोरोना सहायता राशि मिली. ज्योति ने अपने पिता की मदद से 1200 की सेकंड हैंड साइकिल खरीदी. ज्योति बताती है कि उनके पास इतने पैसे नहीं थे, लेकिन फिर उन्होंने साइकिल बेचने वाले शख्स को 500 रुपये देकर साइकिल ले लिया. बाकी के 700 रुपये गुरुग्राम लौटने के बाद देने का वादा किया, जिस पर वो राजी हो गया.

ज्योति कहती है-

 मैंने पापा को कहा कि साइकिल से चलिए. लेकिन वो मान नहीं रहे थे. फिर भी उन्हें मनाकर साइकिल से लेकर आई. आगे रास्ते में लोग मदद कर रहे थे. हम लोग दो दिन भूखे भी थे, लेकिन फिर कैसे भी करके आ गए. सात दिन में हम लोग घर आ गए हैं. 

 

 13 साल की ज्योति आठवीं क्लास में पढ़ती है.
13 साल की ज्योति आठवीं क्लास में पढ़ती है. तस्वीर साभार- इंडिया टुडे

60 हजार का कर्ज लेकर इलाज कराया है

मोहन की पत्नी बताती हैं कि उन पर 60 हजार का कर्ज है. एक्सिडेंट के बाद इलाज के लिए ये पैसे उधार लेकर उन्होंने अपने पति का ऑपरेशन कराया. मोहन की पत्नी को 2825 रुपए का मासिक मानदेय मिलता है. फिलहाल तो पति के घर आ जाने से खुशी है, लेकिन कर्ज और आमदनी के बारे में सोच-सोचकर परेशानी भी बढ़ जाती है. इसमें गुजारा संभव नहीं है.

सात दिन में 1200 किलोमीटर

ज्योति ने लगातार सात दिन साइकिल चलाई. वह रोज़ करीब 100 से 150 किलोमीटर की यात्रा करती थी. पिता साइकिल पर पीछे बैठे रहते थे. कहीं ज्यादा थकान होती, तो सड़क किनारे बैठ कर ही थोड़ा आराम कर लेती थी. ज्योति ने बताया कि वो रात में किसी पेट्रोल पम्प के आस पास रुकती थी और सुबह वहीं फ्रेश होकर निकलती थी. रास्ते में लोगों ने मदद भी की. फिलहाल ज्योति घर पहुंच चुकी है. लोग शाबाशी दे रहे हैं. लेकिन ये पूरा घटनाक्रम हर किसी को सोचने पर मजबूर करता है.



वीडियो देखें: लॉकडाउन 4.0 के दौरान एक राज्य से दूसरे राज्य जाने के लिए ई-पास कैसे बनवाएं?

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