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तीन कृषि कानूनों में से कौन सा एक है, जिसे सभी पार्टियां तुंरत लागू करवाना चाहती हैं?

केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि तीनों कानून रद्द किए जाएं. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल किसानों की इस मांग का समर्थन कर रहे हैं. लेकिन संसद में राजनीतिक पार्टियों का अलग रुख देखने को मिला. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण पर संसद की स्थायी समिति का कहना है कि सरकार को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 2020 (Essential Commodities (Amendment) Act, 2020) लागू कर देना चाहिए.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, शुक्रवार, 19 मार्च को लोकसभा में पेश की गई खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण पर बनी स्थायी समिति (Standing Committee on Food, Consumer Affairs and Public Distribution) की रिपोर्ट में इस कानून को लागू करने की सिफारिश की गई है. इस समीति में बीजेपी, कांग्रेस, TMC, AAP, NCP और शिवसेना सहित 13 दलों के सदस्य हैं. बीजेपी को छोड़कर ये सभी दल तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं. TMC सांसद सुदीप बंधोपध्याय इस समीति को हेड कर रहे हैं.

क्या है रिपोर्ट में?

समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में अधिकतर कृषि वस्तुओं का जरूरत से अधिक उत्पादन होता है, लेकिन कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, प्रोसेसिंग और निर्यात में कम निवेश के चलते किसानों को उनकी फसलों के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं. पुराने कानून के प्रावधानों के चलते इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए थे. इसकी वजह से किसानों को बंपर पैदावार के चलते भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में उम्मीद जताई है कि यह कानून निवेश का माहौल बनाएगा और कृषि क्षेत्र में उचित और लाभकारी प्रतिस्पर्धा लाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी. इसलिए समिति सरकार से यह कानून लागू करने की सिफारिश करती है. सरकार को बिना देरी या किसी बाधा के यह कानून लागू करना चाहिए ताकि किसानों और कृषि क्षेत्र के दूसरे हितधारकों को इस कानून के फायदे मिल सकें. समिति की यह सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के 12 जनवरी के उस आदेश के बाद आई है, जिसमें उसने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कानूनों के अमल पर रोक लगा दी थी.

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम, 2020?

50 के दशक में सूखे और अकाल जैसे हालात थे. तब 1955 में आया आवश्यक वस्तु कानून. आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए. उनके प्रोडक्शन, सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए. समय के साथ इस कानून में कई बदलाव हुए. आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट में कई चीज़ें जोड़ी गईं. कई हटाई गईं. किसी सामान को आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट में जोड़ने का मतलब है कि सरकार उस वस्तु की कीमत, उसका उत्पादन, उसकी सप्लाई को कंट्रोल कर सकती है. साथ ही उस वस्तु के स्टॉक की सीमा तय कर सकती है.

सरकार ने इसमें बदलवा किया. इसे कहा गया Essential Commodities (Amendment) Act, 2020. इस कानून के मुताबिक, सरकार के पास ये अधिकार होगा कि वो ज़रूरत के हिसाब से चीज़ों को आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट से हटा सकती है या उसमें शामिल कर सकती है. अध्यादेश में लिखा हैः–अनाज, दलहन, आलू, प्याज़, तिलहन और तेल की सप्लाई पर अति-असाधारण परिस्थिति में ही सरकार नियंत्रण लगाएगी. अति असाधारण परिस्थितियां क्या होंगी? युद्ध, अकाल, कीमतों में अप्रत्याशित उछाल या फिर गंभीर प्राकृतिक आपदा. इन चीज़ों और किसी भी कृषि उत्पाद की जमाखोरी पर कीमतों के आधार पर ही एक्शन लिया जाएगा. इसे नियंत्रित करने के आदेश कब जारी किए जाएंगे? जब सब्ज़ियों और फलों की कीमत में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी. या फिर जब खराब न होने वाले खाद्यान्नों की कीमत में 50 प्रतिशत तक का इज़ाफा होगा.

किसानों का कहना है कि इससे जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ेंगी इसलिए यह कानून रद्द होना चाहिए.


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