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यूपी के जिला पंचायत चुनाव में ऐसा क्या हुआ कि सपा एकदम से किनारे लग गई?

उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत चुनाव के लिए नामांकन हो चुके हैं और नामांकन वापस लेने की तारीख़ भी निकल चुकी है. 3 जुलाई को वोटिंग होगी और उसी दिन नतीजे आएंगे. लेकिन इससे पहले ही समाजवादी पार्टी (सपा) इस चुनाव में एकदम से किनारे लगती नज़र आ रही है. पार्टी इसके लिए ज़िम्मेदार ठहरा रही है भाजपा को. सपा मुकाबले से बाहर क्यों मानी जा रही है? उनका भाजपा पर क्या आरोप है? आइए समझते हैं.

नामांकन के दिन का विवाद

दरअसल चुनाव के लिए 26 जून को नामांकन होना था. सपा के कई प्रत्याशी नामांकन नहीं करा सके और पार्टी ने इसका आरोप भाजपा पर लगाया. कहा कि भाजपा ने उनके प्रत्याशियों का अपहरण करके और तमाम दूसरे हथकंडों से सपा प्रत्याशियों को नामांकन कार्यालय तक पहुंचने ही नहीं दिया. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बारे में ट्वीट किया. लिखा,

“गोरखपुर व अन्य जगहों पर जिस तरह भाजपा सरकार ने पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को नामांकन करने से रोका है, वो हारी हुई भाजपा का चुनाव जीतने का नया प्रशासनिक हथकंडा है. भाजपा जितने पंचायत अध्यक्ष बनायेगी, जनता विधानसभा में उन्हें उतनी सीट भी नहीं देगी.”

इस बीच सपा ने 11 जिलों के जिलाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया. इन इलाकों में उसके प्रत्याशी नामांकन नहीं कर सके. ये 11 जिले हैं- गोरखपुर, मुरादाबाद, झांसी, आगरा, गौतमबुद्धनगर, मऊ, बलरामपुर, श्रावस्ती, भदोही, गोंडा और ललितपुर. लेकिन इन जिलों में ऐसा हुआ क्या कि सपा के प्रत्याशी नामांकन भी नहीं कर पाए.

गोरखपुर

भाजपा ने अपने विधायक और पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह की पत्नी साधना सिंह को प्रत्याशी बनाया. वहीं सपा से आलोक गुप्ता को टिकट मिला. 26 जून को भाजपा समर्थक बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद थे और इस बीच साधना सिंह का नामांकन हो भी गया. लेकिन गहमा-गहमी तब शुरू हुई, जब सपा प्रत्याशी आलोक गुप्ता नामांकन भरने नहीं आए और न ही उनका कुछ अता-पता चल रहा था. सपा नेताओं का उनसे संपर्क भी नहीं हो पा रहा था. ऐसे में आनन-फानन में सपा ने जितेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाकर नामांकन कराना चाहा. सपा जिलाध्यक्ष नगीना साहनी जब जितेंद्र यादव को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे तो भाजपा समर्थकों से उनकी कहासुनी शुरू हो गई. झड़प के कारण जितेंद्र यादव भी नामांकन नहीं कर सके.

मुरादाबाद

मुरादाबाद में भाजपा ने डॉ शेफाली सिंह को उम्मीदवार घोषित किया था. 26 जून को शेफाली सिंह ने तो नामांकन कर दिया लेकिन सपा प्रत्याशी अमीरन जहां अपना नामांकन नहीं करा सकीं. 3 बजे का वक्त तय था और ये वक्त निकल गया. सपा को मुरादाबाद में इससे खासी निराशा हुई क्योंकि मुरादाबाद हमेशा से उनका गढ़ रहा है. 2017 में मुरादाबाद के 6 विधायकों में से 4 सपा के ही बने थे.

झांसी

झांसी में भी भाजपा प्रत्याशी पवन गौतम ने 26 जून को पर्चा भर दिया. सामने सपा से प्रत्याशी बनाया गया आशा गौतम को. उनका प्रस्तावक बनाया गया जिला पंचायत सदस्य हेमंत आर्य को. लेकिन हेमंत आर्य 3 बजे तक पहुंच ही नहीं सके और आशा गौतम का नामांकन नहीं हो सका. सपा ने इसके बाद ट्वीट किया –

“झांसी में भाजपा ने लोकतंत्र को किया हाईजैक! झांसी में सपा प्रत्याशी का नामांकन रोक दिया गया, शर्मनाक! प्रशासन और पुलिस ने सपा प्रत्याशी के पास बहुमत होने के बावजूद भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं करने दिया. संज्ञान ले कार्रवाई करे चुनाव आयोग.”

बलरामपुर

बलरामपुर से सपा ने किरन यादव को प्रत्याशी बनाया था. लेकिन वो भी 26 तारीख़ को नामांकन नहीं कर सकीं. इसके बाद जिले के सपा नेता और पूर्व मंत्री एसपी यादव ने भी भाजपा पर वही आरोप लगाया, जो अन्य जिलों में लगा है.

आगरा

आगरा से भी भाजपा प्रत्याशी मंजू भदौरिया की जीत तय हो गई है. इसी तरह गौतमबुद्ध नगर, मऊ, श्रावस्ती, भदोही, गोंडा और ललितपुर से भी सपा प्रत्याशी नामांकन नहीं कर सके.

सपा, भाजपा का क्या कहना है?

भाजपा के कुल 21 उम्मीदवार निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए, वहीं सपा का गढ़ कहे जाने वाले इटावा से अखिलेश यादव के भाई अभिषेक यादव निर्विरोध चुने जा चुके हैं.

इस पूरे प्रकरण के बाद अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा ने जिस तरह से जिलों में पंचायत अध्यक्षों के नामांकन अलोकतांत्रिक तरीके से रोके हैं उससे इन चुनाव की निष्पक्षता एवं पवित्रता नष्ट हुई है. यह लोकतंत्र की हत्या की साजिश है. वहीं भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला का कहना है-

“अगर प्रशासन ने जोर-जबरदस्ती करके सपा के प्रत्याशियों को नामांकन से रोक दिया तो सपा ने अपने 11 जिलाध्यक्ष क्यों बदल दिए? इस तरह के आरोप लगाना दिखा रहा है कि अखिलेश यादव फिर हारने वाले हैं. वैसे भी वो 2014 लोकसभा में हारे, 2017 विधानसभा में हारे तो अब पंचायत चुनाव हार जाएंगे तो कौन सी बड़ी बात है!”

हमने जब सपा से जानना चाहा कि इस पूरे मसले पर उसका आगे क्या स्टैंड रहेगा, तो पार्टी के प्रवक्ता नावेद सिद्दकी ने कहा कि 1 जुलाई को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश जी का जन्मदिन है तो वो इस मसले पर बाद में बात करेंगे. प्रवक्ता जूही सिंह का फोन रिसीव नहीं हुआ.


यूपी पंचायत चुनाव में ऐसा क्या हुआ कि BJP सांसद ने धांधली के आरोप लगा दिए?

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