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'थैंक्यू केजरीवाल, आपसे ही लड़ना सीखा है, अब आप पर तीर छोड़ने जा रहा हूं'

अरविंद केजरीवाल पर दो करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाने के बाद विधायक कपिल मिश्रा ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वह केजरीवाल के खिलाफ FIR दर्ज कराने जा रहे हैं. कपिल ने मंत्रीपद से हटाए जाने के बाद केजरीवाल पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था और 8 मई को उन्हें ‘आप’ की PAC मीटिंग के बाद पार्टी से भी निकाल दिया गया. इसी के बाद कपिल ने FIR कराने की बात कही है.

9 मई की सुबह अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कपिल ने कहा,

‘अब मैं वही करने जा रहा हूं, जो अरविंद केजरीवाल अब तक करते आ रहे हैं. मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूं. मैंने केजरीवाल से ही लड़ना सीखा है और मैं उनकी हर चाल जानता हूं. वॉटर टैंकर घोटाले की जानकारी मैंने ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) को दी है और उनके रिश्वत लेने के सबूत मैं CBI को दूंगा. मैं केजरीवाल को चैलेंज देता हूं कि अगर वह ईमानदार हैं, तो अपनी या मेरी, किसी भी सीट पर मेरे खिलाफ चुनाव लड़ लें. मैं सबूत सिर्फ CBI को दूंगा, इसीलिए मैंने उन्हें सार्वजनिक नहीं किया है. केजरीवाल वही सबूत निकलवाना चाहते हैं. मैं अकेला उनसे लड़ने जा रहा हूं, तो उन्हीं से आशीर्वाद मांगता हूं.’

इससे पहले 8 मई को सत्येंद्र जैन ने कपिल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने की बात कही थी. इस सवाल पर मिश्रा ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़कर अब वह वही कर रहे हैं, जो अब तक केजरीवाल करते आए हैं और उनके ऊपर मानहानि का मुकदमा करके सत्येंद्र जैन और केजरीवाल वही करेंगे, जो अब तक अरुण जेटली और नितिन गडकरी जैसे नेता करते आए हैं.


कहां से हुई इस विवाद की शुरुआत

मंत्रीपद छीने जाने के अगले ही दिन 7 मई को कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे. राजघाट पर महात्मा गांधी की स्मारक के सामने कपिल ने मीडिया को बताया कि उन्होंने केजरीवाल पर आंख मूंद कर भरोसा किया था कि ये आदमी भ्रष्टाचार नहीं करेगा, लेकिन वाटर टैंकर घोटाले के मामले में सत्येंद्र जैन ने अरविंद केजरीवाल को दो करोड़ रुपए कैश में रिश्वत दी.

दोपहर करीब 12 बजे ये खुलासा करने से पहले कपिल 7 मई को ही सुबह साढ़े दस बजे दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मिलने पहुंचे थे और मीटिंग के बाद उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘चुप रहना असंभव था. कुर्सी क्या, प्राण भी जाएं तो जाएं.’

इसके बाद कपिल साढ़े ग्यारह बजे राजघाट पहुंचे. वहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और फिर मीडिया के सामने अरविंद केजरीवाल को सीधे कटघरे में खड़े करने वाले बेहद गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा,

‘मैंने अपनी आंखों से देखा केजरीवाल के घर पर. स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने केजरीवाल को दो करोड़ रुपए नकद दिए. मैंने पूछा कि ये क्या है, तो केजरीवाल ने जवाब देने से मना कर दिया और कहा कि राजनीति में कुछ बातें होती हैं, जो बाद में बताई जाती हैं. मैं रात भर सो नहीं सका. ये पैसा सत्येंद्र जैन के पास कहां से आया और उन्होंने ये पैसा केजरीवाल को क्यों दिया. इसका जवाब दिया जाना चाहिए. केजरीवाल भी इंसान हैं और गलती किसी से भी हो सकती है, लेकिन उन्हें सभी विधायकों को बुलाकर इसकी सफाई देनी चाहिए. सत्येंद्र जैन ने मुझे खुद बताया कि उन्होंने केजरीवाल जी के किसी रिश्तेदार को जमीन दिलवाने के लिए 50 करोड़ की डील कराई थी.’

कपिल मिश्रा ने ‘आप’ के पिछले मामलों को लपेटते हुए कुछ और बातें कही थीं,

‘लंबे समय से भ्रष्टाचार के कई मामलों की चर्चा चल रही थी. पंजाब चुनाव और दिल्ली सरकार पर आरोप थे. हमने कई चीजें अपने सामने होते हुए देखीं. ये हमारी भी गलती रही कि हमने सिर्फ केजरीवाल से बात की. हमें यकीन था कि अरविंद केजरीवाल से कोई बेइमानी नहीं करवा सकता. हम हर बात उन्हें बताकर अलग हो जाते थे. मनी लॉन्ड्रिंग, CNG फिटनेस स्कैम और लग्जरी बस स्कैम के मामलों में हमें लगता था कि उनके आसपास के चार-पांच लोग गलत काम कर रहे हैं और जब केजरीवाल को इस बारे में पता चलेगा, वो सब ठीक कर देंगे.

कपिल के आरोप लगाने के बाद उसी दिन केजरीवाल के बचाव में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए दिल्ली सरकार के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने मिश्रा के आरोपों को बेहद हल्के अंदाज में खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, ‘इसके बारे में अब मैं क्या कहूं. ऐसे आरोपों पर कुछ नहीं कहा जा सकता. कपिल मिश्रा के आरोप बेबुनियाद हैं. कोई इस पर यकीन नहीं कर सकता. इस बारे में इतना ही कहा जा सकता है कि इसका कोई जवाब नहीं है.’

इसके बाद 8 मई को पार्टी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए ‘आप’ नेता संजय सिंह ने केजरीवाल का बचाव करते हुए कपिल मिश्रा पर जोरदार हमला बोला था. संजय ने कहा,

‘कपिल मिश्रा एक मोहरा हैं, जिनके जरिए बड़ा खेल खेला जा रहा है. वह जो भी कह रहे हैं, वह उनसे मंत्रीपद छीने जाने की बौखलाहट का नतीजा है. कपिल मिश्रा वही बोल रहे हैं, जो बीजेपी ‘आप’ से कहना चाहती है. बीजेपी सरकार को सिर्फ ‘आप’ को खत्म करने की चिंता है. इन्हीं कपिल मिश्रा ने कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी ISI एजेंट हैं, वो क्यों नहीं मान लिया.’

आम आदमी पार्टी में कपिल मिश्रा को कुमार विश्वास के खेमे का माना जाता है. हालांकि, कुछ मौकों पर उन्हें ऐसे भी पेश किया गया, जैसे वह केजरीवाल के सबसे विश्वस्त हों. लेकिन मिश्रा के आरोपों पर विश्वास की प्रतिक्रिया चौंकाने वाली रही. कुमार ने कहा,

‘केजरीवाल कभी रिश्वत नहीं ले सकते. उन ऊपर लगे आरोपों को तो दुश्मन भी नहीं मानेंगे. मैं इन चीजों से बेहद दुखी हूं. कपिल मिश्रा पर PAC फैसला करेगी. ये दिन भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के लिए बेहद बुरा दिन है.  इस तरह से बेबुनियाद आरोप लगाना गलत बात है.’

पार्टी में कुमार और केजरीवाल के खेमों के बीच पिछले कई दिनों से कलह दिख रही है. मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने के बाद मिश्रा ने कहा था कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वह चुप नहीं बैठेंगे और उन्हें पार्टी से कोई बाहर नहीं कर सकता. हालांकि, यह कहने के दो दिन बाद ही वह पार्टी से निकाल दिए गए. दूसरी तरफ कुमार विश्वास ही नहीं, बल्कि केजरीवाल से बहुत दूर हो चुके उनके राजनीतिक गुरु अन्ना हजारे और पुराने साथी योगेंद्र यादव ने भी केजरीवाल का पक्ष लेते हुए कहा कि केजरीवाल पर तानाशाही जैसे दूसरे आरोप तो माने जा सकते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप पर यकीन नहीं किया जा सकता.

बीते दिनों कुमार विश्वास और अमानतुल्लाह खान के विवाद में कपिल ने खुलकर विश्वास का साथ दिया था. माना गया कि केजरीवाल और सिसोदिया इससे खासे नाराज हुए और इसी वजह से उन्हें मंत्रीपद से हटाया गया. इस पूरे विवाद के दौरान कुमार विश्वास भी मुखर रहे. ट्विटर और मीडिया के जरिए वह लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने और नया आंदोलन शुरू करने की बात करते रहे. हाल ही में विश्वास ने दो टीवी चैनलों को इंटरव्यू भी दिए थे, जिनमें वो पार्टी को खरी-खोटी सुना रहे थे.

कपिल मिश्रा के आरोप लगाने के बाद दूसरी राजनीतिक पार्टियों ने केजरीवाल को कोसना शुरू कर दिया है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने तो उनके इस्तीफे का मांग करते हुए कपिल के आरोप को गवाही बताया और जांच की मांग की.

कपिल मिश्रा दिल्ली के चौथे ऐसे मंत्री बन गए हैं, जिन्हें पिछले दो साल में पद से हटाया गया है. उनसे पहले जितेंद्र सिंह तोमर, असीम अहमद खान और संदीप कुमार को अलग-अलग विवादों में पद से हटाया गया था. इससे पहले कपिल मिश्रा से शीला दीक्षित सरकार के दौरान हुए टैंकर घोटाले मामले में विवाद के बाद कानून मंत्री के पद से हटा दिया गया था. माना गया कि इस मामले में अपनी जल्दबाजी से कपिल का नुकसान हुआ और अब जलमंत्री के पद से भी वह हाथ धो चुके हैं. बहरहाल, इस राजनीतिक हलचल के बीच ‘आप’ रविवार शाम विधायकों की बैठक बुला सकती है.

क्या है वाटर टैैंकर घोटाला

2012 में जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं, तब ये बात सामने आई थी कि दिल्ली सरकार ने पानी के टैंकर उनकी असल कीमत से कहीं ज्यादा कीमत में किराए पर लिए थे. तब पानी मंत्रालय शीला के ही पास था. केजरीवाल ने इसके आधार पर शीला की खूब आलोचना की थी, लेकिन सरकार बनने के बाद चुप्पी साध ली थी. कपिल इस मसले पर शीला के खिलाफ हमेशा मुखर रहे और अब वह केजरीवाल को भी इस मुद्दे पर लपेटे में ले चुके हैं.


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