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RSS के मुखपत्र पांचजन्य ने लिखा- इंफोसिस टुकड़े-टुकड़े गैंग का हिस्सा, ये राष्ट्र-विरोधी ताकतों के साथ

पांचजन्य. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुखपत्र है. पांचजन्य ने 4 पेज की एक कवर स्टोरी की है. हेडिंग है– साख और आघात. ये कवर स्टोरी दिग्गज IT कंपनी इंफोसिस पर है. इसमें इंफोसिस को टुकड़े-टुकड़े गैंग का हिस्सा बताया गया है. लिखा है कि इंफोसिस, राष्ट्रविरोध ताकतों के साथ है. इंफोसिस को नक्सल, वामपंथी और टुकड़े-टुकड़े गैंग का मददगार लिखा गया है. लेख में लिखा है –

“इंफोसिस पर नक्सलियों, वामपंथियों और टुकड़े-टुकड़े गैंग की सहायता करने के आरोप लगते रहे हैं. देश में चल रही कई विघटनकारी गतिविधियों को इंफोसिस का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोग मिलने की बात सामने आ चुकी है. दुष्प्रचार वेबसाइट्स के पीछे भी इंफोसिस की फंडिंग मानी जाती है. जातिवादी घृणा फैलाने में जुटे कई संगठन भी इंफोसिस की चैरिटी के लाभार्थी हैं.”

पांचजन्य के एडिटर हितेश शंकर ने ट्वीट किया –

“इंफोसिस ये बताए कि वो सॉफ्टवेयर बनाती है या सामाजिक आक्रोश की इंजीनियरिंग करती है.”

क्यों निशाने पर है इंफोसिस?

दरअसल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए सरकार ने एक ई-फाइलिंग पोर्टल तैयार कराया है. ये पोर्टल तैयार किया है इंफोसिस ने. लेकिन इस पोर्टल पर लोगों को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इसे लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 अगस्त को इंफोसिस के CEO और MD सलिल पारेख को तलब भी किया था.

इनकम टैक्स पोर्टल के जरिए रिटर्न भरने वालों का कहना रहा है कि या तो साइट चल ही नहीं रही है, और अगर चल रही है तो काफी स्लो. जून में ही सरकार की ओर से इस मामले को लेकर चिंता जताई गई थी. 7 जून को ये पोर्टल शुरू किया गया था और तभी से ही इसको लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं. 8 जून को निर्मला सीतारमण ने इन्फोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी को ट्विटर पर टैग करते हुए परेशानियों को लेकर शिकायत की थी. इस पर नंदन नीलकेणी ने कहा था कि हफ्ते भर में चीजें ठीक हो जाएंगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब सलिल पारेख से मुलाकात के बाद वित्त मंत्री ने कंपनी को सब कुछ सही करने के लिए 15 सितंबर तक की डेडलाइन दी है.

और क्या लिखा?

इन्हीं समस्याओं को लेकर पांचजन्य ने इंफोसिस को निशाना बनाया है. लिखा है कि क्या इंफोसिस इसी तरह की सेवाएं किसी विदेशी क्लाइंट को देता? लिखा है –

“इंफोसिस के प्रमोटर्स में से एक नंदन नीलकेणी कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. कंपनी के फाउंडर नारायण मूर्ति का सरकार विरोधी रवैया किसी से छिपा नहीं है. इंफोसिस अहम पदों पर उन्हीं लोगों की नियुक्ति करता है, जो एक ख़ास विचारधारा के हों. अगर ऐसी कंपनी को अहम सरकारी प्रोजेक्ट मिलेंगे तो चीन और ISI से प्रभावित होने की ख़तरा तो रहेगा ही.”

लेख में आरोप लगाया गया है कि इंफोसिस की इस तरह की सेवाएं असल में विपक्ष की साजिश हो सकती है ताकि ये काम विदेशी कंपनियों को सौंपा जा सके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की योजना को झटका लगे. हालांकि विवाद बढ़ता देख RSS की तरफ से इस पूरे मसले पर सफाई आ गई. RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने ट्वीट किया –

“भारतीय कंपनी के नाते इंफोसिस का भारत की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान है. इंफोसिस संचालित पोर्टल को लेकर कुछ मुद्दे हो सकते हैं परंतु पान्चजन्य में इस संदर्भ में प्रकाशित लेख, लेखक के अपने व्यक्तिगत विचार हैं तथा पांचजन्य संघ का मुखपत्र नहीं है. अतः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को इस लेख में व्यक्त विचारों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.”

इस पूरे प्रकरण पर अभी इंफोसिस की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है. आएगा तो वो भी आपको बताएंगे.


इंफोसिस वाले नारायण मूर्ति ने बताया धोनी से बिज़नेस लीडर्स ये सीख सकते हैं

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