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राम मंदिर ट्रस्ट की पहली मीटिंग में पता चल गया कि मंदिर कैसा दिखेगा?

बात श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की. 19 फरवरी को ट्रस्ट की पहली मीटिंग हुई. मीटिंग के ठीक पहले दो नाम ट्रस्ट में शामिल किए गए. महंत नृत्य गोपाल दास और चंपत राय. कौन हैं ये दो लोग?

नृत्य गोपाल दास

राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष. अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन से जुड़े साधुओं के एक बहुत बड़े तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं. जब तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बना और सदस्यों की घोषणा हुई, नृत्य गोपाल दास का नाम गायब था. नाम गायब तो आपत्तियां हुईं. बात होने लगी. कहा जाने लगा कि नृत्य गोपाल दास का नाम CBI की जांच में है. क्यों? क्यों वो बाबरी मस्ज़िद विध्वंस के कई आरोपियों में से एक हैं. इस वजह से ट्रस्ट में नाम शामिल नहीं किया गया था. अयोध्या के हनुमानगढ़ी इलाके में बवाल शुरू हुआ. नृत्य गोपाल दास का नाम न शामिल किये जाने के बाद साधुओं में रोष उपजा. जनवरी की एक शाम प्रेस कान्फ्रेंस बुलाई गई. लेकिन इसी समय एक खबर आई. कहा गया कि गृहमंत्री अमित शाह ने नृत्य गोपाल दास को फोन किया. कहा कि ट्रस्ट में शामिल करेंगे. प्रेस कांफ्रेंस कैंसिल.

नृत्य गोपाल दास को राम मंदिर ट्र्स्ट का अध्यक्ष चुना गया है. (Photo: PTI)
नृत्य गोपाल दास को राम मंदिर ट्र्स्ट का अध्यक्ष चुना गया है. (Photo: PTI)

दूसरा नाम आया चंपत राय. विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री हैं. वो भी बाबरी विध्वंस में आरोपी हैं. दावा करते आए हैं कि राम मंदिर विश्व हिन्दू परिषद् वाले मॉडल पर ही बनेगा. उन्हें भी ट्रस्ट में नृत्य गोपाल दास के साथ जगह दी गई है. इन सभी लोगों को ट्रस्ट में जगह देने के साथ ये बात साफ़ नहीं हो पाया था कि इन्हें किस भूमिका में रखा जाएगा. जैसे ही राम मंदिर ट्रस्ट की मीटिंग अपने आखिरी मोड़ पर पहुंची, तब साफ़ हुआ. नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया. इसके साथ ही चंपत राय को दिया गया ट्रस्ट में राष्ट्रीय महासचिव का पद.

खबरें चलीं. बाबरी मस्ज़िद विध्वंस के केस में शामिल आरोपियों को मंदिर के निर्माण के ट्रस्ट की कमान दी गई. ट्रस्ट की पहली मीटिंग में यही नहीं हुआ. बरसों से राम मंदिर का मॉडल के नाम पर भी विश्व हिन्दू परिषद को ख़ुशी हुई. मीटिंग के बाद नृत्य गोपाल दास ने जानकारी दी. कहा, विहिप के मॉडल के आधार पर ही राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा. लेकिन थोड़े बड़े स्तर का. ऐसे में कहा गया कि नरेंद्र मोदी सरकार की देखरेख में मंदिर के निर्माण की कमान, फिर से, विश्व हिन्दू परिषद को दे दी गई है. इसके पहले ‘रामलला विराजमान’ और ‘रामजन्मभूमि न्यास’ के साथ-साथ राम मंदिर आन्दोलन की कमान विश्व हिन्दू परिषद के हाथ में रही थी. और अब ये.

विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल
विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल.

लेकिन इस दावे से विश्व हिन्दू परिषद ने इंकार किया है. प्रवक्ता विनोद बंसल से लल्लनटॉप ने बात की. उन्होंने कहा-

ट्रस्ट में नृत्य गोपाल दास और चंपत राय का नाम शामिल किया जाना बेहद सराहनीय कार्य है. जहां तक ट्रस्ट की कमान विहिप को दिए जाने की बात है, मैं कहूंगा की ट्रस्ट की कमान उन हिन्दुओं के हाथ में दी गयी है, जिन्होंने राम मंदिर के निर्माण के लिए सतत संघर्ष किया है.

मंदिर के नक़्शे और मॉडल के पास होने की बात हुई. विनोद बंसल ने कहा-

वो तो होना ही था. वो नक्शा इतने समय तक राम मंदिर का प्रतीक रहा है. उस मॉडल को ही राम मंदिर के रूप में लिया जाना चाहिए था, वही हुआ है.

# राम मंदिर का नक्शा कहां से आता है?

जो राम मंदिर का मॉडल हम देखते हैं, उसे बनवाने की ज़िम्मेदारी विहिप ने गुजरात के चंद्रकांत सोमपुरा को दी. चंद्रकांत सोमपुरा ने प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल बनाया.

अयोध्या के कारसेवकपुरम में रखा राम मंदिर का मॉडल
अयोध्या के कारसेवकपुरम में रखा राम मंदिर का मॉडल.

इसे विष्णु मंदिर के अष्टकोणीय भवन के आधार पर बनाया गया. मतलब, वो भवन जिसमें आठ कोने होते हैं. चंद्रकांत सोमपुरा के परिवार को ही गुजरात के सोमनाथ मंदिर का मॉडल बनाने की ज़िम्मेदारी दी गई थी. परिवार ने मॉडल बनाया. और इधर ट्रस्ट के तहत मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ. निर्माण हुआ.

# और मीटिंग में क्या हुआ?

मीटिंग में राम मंदिर निर्माण के लिए राम मंदिर कॉम्प्लेक्स विकास कमिटी का गठन किया गया. इसकी कमान रोचक तरीके से नृपेन्द्र मिश्रा को दी गई. वही नृपेन्द्र मिश्रा, जो पहले मोदी के प्रमुख सचिव थे. इस सबके अलावा आपत्ति भी आई. हिन्दू महासभा की तरफ से. कहा गया कि RSS, विहिप और BJP सरकार ने ट्रस्ट पर कब्जा कर लिया है. हिन्दू महासभा के स्वामी चक्रपाणि ने कहा-

हम 1949 से लड़ रहे हैं, अब किनारे कर दिया तो आहत हैं

संत, महंत और मठों का अपना भी झगड़ा है. स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के रामालय ट्रस्ट ने स्वर्णदान अभियान शुरू किया है, हर गांव से एक ग्राम सोना लाने में लगे हैं. इसके बाद साधुओं का एक धड़ा इस कवायद को गैरकानूनी और स्वरूपानंद सरस्वती को कांग्रेसी बताने लग गया. विरोध शुरू हो गया. और खबर भी आई. कि राम नवमी यानी 2 अप्रैल और अक्षय तृतिया यानी 26 अप्रैल के बीच किसी वक्त मंदिर का शिलान्यास किया जा सकता है.


लल्लनटॉप वीडियो : अयोध्या में राम मंदिर तो बन जाएगा, पर इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

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