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देश की हिस्ट्री में पहली बार लोकसभा में आतंकी के पिता का सम्मान हुआ

लोकसभा में आज गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ एनकाउंटर पर अपनी टिप्पणी दी. इसमें उन्होंने पहले एनकाउंटर के बारे में बताया. फिर उन्होंने कुछ एेसा कहा जो शायद कभी नहीं कहा गया है. ये पहली बार हुआ. उन्होंने कुछ यूं कहा कि “मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्ला के पिता पर सदन को और देश को गर्व है. सैफुल्ला के पिता ने बेटे की डेड बॉडी लेने से मना कर दिया था. उन्होंने कहा था कि उसने कोई सही काम तो किया नहीं है, मुझे उसका मरा हुआ मुंह नहीं देखना. जो देश का नहीं हुआ वो मेरा क्या होगा.”

राजनाथ सिंह के इस वक्तव्य ने कुछ चिंताओं को कम कर दिया है. किसी के परिवार का कोई सदस्य जब आतंकी करार दे दिया जाता है तो पूरा परिवार अपनी पूरी जिंदगी समाज की नफरत झेलता है. पर सैफुल्ला के पिता के साथ लोकसभा खड़ी हुई है. और शायद देश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी संदिग्ध आतंकी के पिता के सम्मान में लोकसभा में सदस्यों ने डेस्क थपथपाई.

अगर इस घटना को 2016 में कश्मीर में हुए बुरहान वानी एनकाउंटर से जोड़ कर देखें तो कुछ चीजें उलट नजर आती हैं. बुरहान के एनकाउंटर के बाद वहां के बहुत सारे लोगों ने उसे आतंकी माना ही नहीं था. उसकी शव-यात्रा में हजारों लोग इकट्ठा हुए थे. उसके मरने के बाद कश्मीर की स्थिति बहुत खराब हो गई थी. पर लखनऊ में हुआ एनकाउंटर कुछ और कहानी कहता है. यहां एक तरीके से संदिग्ध आतंकी को सरकार के साथ घरवालों ने भी डिसओन कर दिया. ये तगड़ा संदेश दिया गया है कि आतंक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

इसके बाद आजतक से बात करते हुए सैफुल्ला के पिता सरताज ने कहा:

# हम जैसे छोटे लोगों का ध्यान रखने के लिए शुक्रिया. देश के मंत्री हमारा सम्मान करते हैं, वो कितने महान आदमी होंगे.

# उनको भी समझने की जरूरत है. वो बच्चे के हक में सही नहीं कर रहे हैं. देश में ये चीजें खत्म नहीं हो रही हैं. उनको चाहिए कि जैसे भी हो सके, अपने बच्चों से ये सब खत्म करें.

# परिवार ने पूरा साथ दिया, कहा कि आपका फैसला सही है. जाहिर सी बात है कि औलाद की मुहब्बत होती है. हम भी बाप हैं, हमको भी मुहब्बत है. पर उसने ऐसा कदम उठाया गया कि क्या कहें. ऐसा कभी भी नहीं सोचा था कि ऐसा कोई वक्त आएगा.

# ये समझिए कि बिल्कुल आखिर आखिर तक हमको कोई उम्मीद नहीं थी कि उसका ब्रेनवॉश हो रहा है. मैंने डांटा था कि घर से भगा दूंगा, ताकि वो नाराज होकर कुछ करने लगे. पर पता चला कि वो सामान लेकर घर से चला गया है. मैंने अपने बेटों से कहा कि अब वो इस घर में नहीं आएंगे.

# आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता, चाहे वो हिंदू परिवार का हो चाहे मुस्लिम परिवार का हो. बचपने से ही देखते रहें तो इस बात से बचा जा सकता है. वॉट्सएप वगैरह की वजह से इधर-उधर की बातें सीख जाते हैं. आतंकी भी बन जाते हैं. सरकार से गुजारिश है कि इन चीजों को खत्म किया जाए.

# उसके पास ऐसा फोन था जिसमें बटन खूब थे पर कोई स्क्रीन था. बस फोन मिला लो.

सैफुल्ला और पकड़े गए दो संदिग्धों के घरवालों ने ये बातें कही हैंः

1. बुधवार को सरताज ने रिपोर्टर्स को बताया था कि उनका बेटा ढाई महीने पहले ही घर छोड़कर चला गया था. काम न करने के लिए उसे डांट पड़ी थी. सरताज के मुताबिक घर छोड़ने के एक दिन पहले उन्होंने उस पर हाथ भी उठाया था. सप्ताह भर पहले सैफुल्ला ने अपने परिवार से बात की थी और कहा था कि वो नौकरी करने सऊदी अरब जा रहा है.

2. सरताज ने कहा है, “एक देशद्रोही मेरा बेटा नहीं हो सकता. हम हिंदुस्तानी हैं. हम लोग यहां पैदा हुए हैं. हमारे पूर्वज यहां पैदा हुए हैं. जो देश के खिलाफ काम करेगा वो मेरा बेटा नहीं हो सकता. मैं उसे नौकरी करने के लिए कहता था, पर वो बात नहीं सुनता था.”

3. सैफुल्ला कॉमर्स ग्रेजुएट था. सरताज नाराज थे कि ये दिन रात वॉट्सएप में लगा रहता है और कुछ करता नहीं है. सैफुल्ला की मां की पिछले साल मौत हो गई थी. इसके बाद वो उदास रहने लगा था.

4. घरवालों से सैफुल्ला ने कह दिया था कि वो नई दिल्ली जाएगा और वहीं से काम करने दुबई चला जाएगा. उसी वक्त इसका दोस्त अातिफ अपनी मां पर प्रेशर बना रहा था कि उसे भी दिल्ली जाने दे. मां कहती थी कि वो भाई के साथ डेयरी के बिजनेस को संभाल ले, पर उसका मन नहीं लगता था.

5. आतिफ के पिता की 2015 में मौत हो गई थी. इसके बाद वो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छोड़कर डिप्लोमा करने लगा. उसके पिता मुस्लिम एसोशिएशन के अध्यक्ष थे. ये संगठन स्कूल-कॉलेज चलाता था.

6. दोनों दोस्तों ने कानपुर साथ में ही छोड़ा था. इनके एक दोस्त ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि सैफुल्ला, आतिफ और दानिश कानपुर में गंगा किनारे एक ढाबे में मिला करते थे. ढाबे के मालिक ने बताया कि ये लड़के चाय खूब पीते थे. पर फोन से नजर नहीं हटाते थे. खूब वीडियो देखते रहते थे.

7. मंगलवार को आतंकी मामले में संदेह के आधार पर गिरफ्तार दो अन्य लड़कों के पिता ने कहा है कि उनके बेटे निर्दोष हैं और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में ये बातें कही हैंः

1. कानपुर के सिटी एसपी सोमेन वर्मा ने कहा कि सरताज ने बेटे का शव लेने से इंकार कर दिया है लेकिन पुलिस उनको समझाने की कोशिश करेगी.

2. ADG दलजीत चौधरी ने ये भी कहा कि आईएस से सैफुल्ला को पैसे मिलने के कोई सबूत नहीं हैं. वो लोग खुद ही मोटिवेट हुए थे. ऐसे लोग सोशल मीडिया के माध्यम से आईएस के प्रोपगैंडा के शिकार बनते थे.

3. चौधरी ने ये भी कहा कि मध्य प्रदेश से गिरफ्तार अातिफ मुजफ्फर पर इस्लामिक स्टेट के मॉड्यूल को चलाने का आरोप है. यूपी और एमपी में इस मामले में छह लोग गिरफ्तार हुए हैं. सैफुल्ला पर इसी मॉड्यूल से जुड़े होने का संदेह है.

4. पुलिस ये भी कह रही है कि इस मामले से जुड़े छह आतंकी अभी भी फरार हैं. वो दिल्ली आ सकते हैं.

5. जानकारी के मुताबिक भोपाल ट्रेन ब्लास्ट से पहले आतंकियों ने बम की तस्वीरें सीरिया भेजी थीं. उनकी सैटेलाइट फोन से बात रही थी. तेलंगाना पुलिस ने इसे ट्रेस कर लिया. उन्होंने ही खबर दी कि यूपी और एमपी के आतंकियों के बीच ऑनलाइन लिंक है. इसी दौरान आतंकियों का नेटवर्क फेल हो गया. इसकी सूचना यूपी और एमपी पुलिस को दी गई. इसके बाद एटीएस ने लखनऊ, कानपुर और इटावा में तेलंगाना पुलिस के दिए लोकेशन पर धावा बोल दिया. कानपुर और इटावा से संदिग्धों को पकड़ लिया गया. पर लखनऊ में सैफुल्ला ने सरेंडर करने से मना कर दिया. इस कार्रवाई में चार राज्यों केरल, तेलंगाना, एमपी और यूपी की पुलिस ने साथ काम किया. केरल पुलिस तो आईएस से जुड़े मसलों पर लंबे समय से काम कर रही है. तेलंगाना पुलिस भी 2011 से ही आतंकियों को लेकर एक्टिव है. 2015 में इन लोगों ने 19 संदिग्धों को पकड़ा था. इसमें से काफी ऐसे थे जो सीरिया जाने की योजना बना रहे थे.

मुठभेड़ के बारे में पुलिस ने ये बातें कही थींः

1. लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में पुलिस के मुताबिक 12 घंटे तक मुठभेड़ चली. इसके बाद एक संदिग्ध आतंकी की डेड बॉडी मिली.

2. ADG दलजीत चौधरी ने कहा, “शुरू में ऐसी रिपोर्ट आईं कि मंगलवार को भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में हुए ब्लास्ट से कथित रूप से जुड़े दो आतंकी इस घर में छुपे हुए हैं, पर वो सही रिपोर्ट नहीं थी. इस घर में संदिग्ध हथियारों के साथ मरा हुआ पाया गया. ऑपरेशन के दौरान ऐसा लगा कि घर में एक से ज्यादा लोग थे. पर अब ये कन्फर्म हो गया है कि एक ही आदमी था. ऑपरेशन अब पूरा हो गया और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी.”

3. यूपी ATS के IG असीम अरुण ने कहा, “ये आदमी आतंकी था और इस्लामिक स्टेट के टेररिस्ट ग्रुप खोरासान से जुड़ा हुआ था. हमको सूत्रों से पता चला कि सैफुल्ला नाम का एक आदमी लखनऊ के इस रेजिडेंशियल एरिया में रह रहा है. वो आईएस से जुड़ा हुआ है.”

4. आठ ऑटोमेटिक पिस्टल, कारतूस, कुछ बारूदी सामान और IS का झंडा मिला है वहां से.

5. ये घर एक मस्जिद के बगल में था. पुलिस के मुताबिक पकड़ने गये लोगों पर फायरिंग हो रही थी. ये पता नहीं चल रहा था कितने लोग फायरिंग कर रहे हैं वहां से. ये घर मलीहाबाद के बादशाह खान का बताया जा रहा है. संदिग्ध इस घर में दो लोगों के साथ पिछले दो महीनों से रह रहा था. ये लोग स्टूडेंट बन के रहते थे और ज्यादा लोगों से मिलते-जुलते नहीं थे.

6. भोपाल से 80 किमी पश्चिम कालापीपल में पैसेंजर ट्रेन की आखिरी कोच में एक ब्लास्ट हुआ. इसमें 10 लोग घायल हो गए. पहले माना गया कि ये ट्यूब लाइट बर्स्ट है. पर बाद में पता चला कि ये कम तीव्रता का पाइप बम है. पुलिस के मुताबिक सैफुल्ला का इस धमाके में भी रोल था.

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