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31 दिन बाद बाड़े से बाहर निकले कांग्रेसी विधायक, गाया रंग और नूर की बारात किसे पेश करूं

राजस्थान में सियासी ड्रामा समाप्त हो गया है. सचिन पायलट और उनके साथी बगावत खत्म कर राजस्थान आ चुके हैं. इसके बाद अब सीएम अशोक गहलोत गुट ने भी अपनी बाड़ेबंदी खत्म कर दी है. गहलोत गुट के 100 विधायक जैसलमेर से जयपुर जा चुके हैं. खुद गहलोत ने भी कह दिया है कि जो कुछ भी हुआ वह समाप्त हो चुका है. अब सब मिलकर काम करेंगे. सचिन पायलट ने भी जयपुर पहुंचने के बाद कहा कि गहलोत उनके वरिष्ठ साथी हैं. अब सबका ध्यान 14 अगस्त पर है जब विधानसभा का सत्र होना है.

31 दिन बाद कांग्रेस विधायक बाड़ेबंदी से बाहर

इसी कड़ी में गहलोत गुट के कांग्रेस विधायकों की 31वें दिन बाड़ाबंदी खत्म हो गई. 12 अगस्त को सभी विधायक जैसलमेर की सूर्यगढ़ होटल से एयरपोर्ट पहुंचे. यहां से चार्टर विमान के जरिए जयपुर के लिए रवाना हुए. जैसलमेर में करीब 13 दिन से कांग्रेस विधायक एक होटल में थे. इससे पहले ये सभी जयपुर की फेयरमोंट होटल में ठहरे हुए थे. होटल से जाते समय विधायक काफी खुश और रिलैक्स नज़र आ रहे थे. बस में विधायकों ने गाने भी गाए.

मुख्य सचेतक महेश जोशी के गाना गाते हुएवीडियो भी सामने आया. वे मोहम्मद रफी का ‘रंग और नूर की बारात किसे पेश करूं, ये मुरादों की हंसी रात किसे पेश करूं’ और पंकज उधास की गजल ‘ला पिला दे साकिया पैमाना पैमाने के बाद, होश की बातें करूंगा, होश में आने के बाद’ गाते सुनाई दिए.

जैसलमेर से जयपुर आने के बाद गहलोत गुट के विधायकों की खुशी कुछ इस तरह नज़र आई.
जैसलमेर से जयपुर आने के बाद गहलोत गुट के विधायकों की खुशी कुछ इस तरह नज़र आई.

गहलोत बोले- फॉर्गेट एंड फॉरगिव

सियासी संकट समाप्त होने पर सीएम गहलोत ने कहा कि अब यह प्रकरण मामला हो चुका है. सब मिलकर काम करेंगे. उन्होंने सचिन पायलट का नाम लिए बिना कहा,

फॉर्गेट एंड फॉरगिव. आपस में भूलो, माफ करो और आगे बढ़ो. देश के हित में, प्रदेश के हित में, प्रदेशवासियों के हित में और लोकतंत्र के हित में.

उन्होंने आगे कहा कि डेमोक्रेसी खतरे में है. ये लड़ाई डेमोक्रेसी को बचाने की है, उसमें 100 से अधिक विधायकों का एक साथ इतने लंबे समय तक साथ रहना अपने आप में बहुत बड़ी बात है. ऐसा हिंदुस्तान के इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा. ये डेमोक्रेसी को बचाने की लड़ाई है, आगे भी जारी रहेगी. प्रदेशवासियों ने विश्वास करके सरकार बनाई थी. उस विश्वास को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है.

पायलट के आने से गहलोत गुट में नाराजगी

सचिन पायलट और उनके साथी विधायकों की वापसी को लेकर गहलोत गुट में नाराजगी की खबरें भी हैं. इस बारे में गहलोत ने कहा कि जो नाराजगी हैं उसे दूर किया जाएगा. उन्हे समझाया जाएगा. उनकी नाराजगी वाजिब है. वे एक महीने तक डेमोक्रेसी बचाने के लिए घर परिवार से दूर रहे. उन्हें समझाया है कि देश-प्रदेश, प्रदेशवासियों और लोकतंत्र को बचाने के लिए कई बार सहन करना पड़ता है. जो साथी चले गए थे वे भी वापस आ गए हैं.

सचिन पायलट.
सचिन पायलट.

घाव पर बस मरहम लगा है, घाव नहीं भरा

हालांकि सब कुछ अभी भी सही नहीं हुआ. दबी जुबान में पायलट खेमे की ओर से अभी भी शिकायत जारी है. बता दें कि गहलोत ने पायलट के लिए ‘निकम्मा’ और ‘नाकारा’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए थे. इस बारे में सचिन पायलट के करीबी और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने 12 अगस्त को कहा कि सीएम गहलोत ने पायलट के लिए जो शब्द कहे, वे दुर्भाग्यजनक थे. पायलट ने भी इस बारे में कहा कि अगर उन्होने किसी को ऐसा कहा होता तो वे माफी मांग लेते.

गहलोत खेमा भी तंज कसने में पीछे नहीं

गहलोत खेमा भी पायलट गुट पर ताने मारने में पीछे नहीं है. जैसलमेर से जयपुर आने के बाद निवाई विधायक प्रशांत बैरवा ने कहा कि गहलोत के साथ रहने वाले विधायक दूध हैं. पायलट के साथ रहने वाले विधायक पानी हैं. मजेदार बात यह है कि बैरवा हालिया सियासी ड्रामे से पहले तक सचिन पायलट के दोस्त थे. वही गहलोत खेमे के ही विधायक संयम लोढ़ा ने कहा कि सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों को आलाकमान ने कोई वादा नहीं किया है. जो कुछ मीडिया में चल रहा है वह सब गलत है.

इससे साफ दिखा है कि दोनों के समर्थकों के बीच तलवारें अभी खींची हुई है. प्रियंका गांधी का समझौता जमीन पर नहीं दिख रहा है. लग रहा है कि आने वाले समय में गहलोत-पायलट की लड़ाई में नए रंग उभर सकते हैं.


Video: सचिन पायलट की बगावत खत्म, अशोक गहलोत और बीजेपी के हाथ क्या लगा?

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