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कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पर मामा की संपत्ति हड़पने का आरोप, कोर्ट ने केस दर्ज करने के आदेश दिए

राजस्थान के बूंदी जिले में एक अदालत ने धोखाधड़ी के मामले में कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह और दो अन्य के खिलाफ वारंट जारी किया है. कोर्ट ने तीनों आरोपियों पर IPC की धारा 420 (बेईमानी), 467 (धोखाधड़ी), 468 (बेईमानी के उद्देश्य से धोखाधड़ी) और 120 B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया है. साथ ही उन्हें 6 जनवरी, 2022 से पहले कोर्ट के सामने पेश होने को कहा है.

कोर्ट को धोखा देने का प्रयास!

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जिंतेंद्र सिंह पर नकली हस्ताक्षर के जरिए अपने मामा की संपत्ति अपने नाम करने का आरोप है. रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जितेंद्र ने नकली कागजात को असली के तौर पर पेश करते हुए कोर्ट को धोखा देने का प्रयास किया.

क्या है मामला?

मामला बूंदी के पूर्व राजघराने से जुड़ा हुआ है. बूंदी के आखिरी राजा, महाराज बहादुर सिंह के दो बच्चे थे. रणजीत सिंह और महेंद्र कुमारी. रणजीत सिंह ने जहां बड़े बेटे के तौर पर अपने पिता की संपत्ति पर दावा पेश किया, वहीं महेंद्र कुमारी ने संपत्ति के बंटवारे के लिए बूंदी की एक अदालत में 1986 में मामला दाखिल कर दिया.

रणजीत सिंह ने शादी की. उनके बच्चे नहीं हुए. दूसरी ओर, महेंद्र कुमारी ने प्रताप सिंह से शादी की और भंवर जिंतेंद्र सिंह और मीनाक्षी को जन्म दिया. साल 2002 में महेंद्र कुमारी का निधन हो गया. इसके बाद उनके प्रतिनिधि के तौर पर जिंतेंद्र सिंह बूंदी कोर्ट का मामला लड़ने लगे.

एक कार्यक्रम के दौरान Jitendra Singh. (फोटो: ट्विटर)
एक कार्यक्रम के दौरान Jitendra Singh. (फोटो: ट्विटर)

साल 2005 में, एक अदालत ने रणजीत सिंह और जिंतेद्र सिंह के बीच संपत्ति को बराबर बांट दिया. हालांकि, बाद में इस आदेश पर रोक लग गई. साल 2010 में रणजीत सिंह का भी निधन हो गया. इसके बाद साल 2017 में दिल्ली के रहने वाले अविनाश चंद्र ने इस पूरे मामले में एक दावा किया. अविनाश ने दावा किया कि वो रणजीत सिंह और उनके परिवार के करीबी रहे हैं और रणजीत सिंह दिल्ली में उनके यहां रुकते थे. उनके ही घर पर रणजीत सिंह ने अंतिम सांस ली थी. यही नहीं, साल 2009 में रणजीत सिंह ने अपनी सारी संपत्ति अविनाश के नाम कर दी थी.

नकली ट्रस्ट से धोखाधड़ी!

अविनाश चंद्र ने आरोप लगाया कि रणजीत सिंह के निधन के बाद जितेंद्र सिंह ने एक ट्रस्ट बनाया. यह ट्रस्ट रणजीत सिंह के नकली हस्ताक्षर से बनाया गया. साथ ही साथ इसे साल 2008 की बैकडेट के साथ तैयार किया गया. आरोप के मुताबिक, जितेंद्र सिंह ने इस फर्जी ट्रस्ट के जरिए ये दिखाया कि रणजीत सिंह ने अपनी सारी संपत्ति कुल देवी आशापूरा माताजी के नाम एक ट्रस्ट के तौर पर कर दी है और जिंतेंद्र सिंह को इस ट्रस्ट का प्रमुख बनाया है.

अविनाश चंद्र ने आगे आरोप लगाया कि क्योंकि रणजीत सिंह की कोई संतान नहीं थी, ऐसे में जिंतेंद्र सिंह उनकी संपत्ति हड़पना चाहते थे. इस मामले में अविनाश चंद्र ने एक FIR भी दाखिल की. जितेंद्र सिंह ने इस आरोप के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की. हाई कोर्ट ने साल 2018 में उनकी याचिका खारिज कर दी. वहीं दूसरी तरफ CJM कोर्ट ने भी उनके खिलाफ आदेश जारी किया है.

हालांकि इस मामले में जिंतेंद्र सिंह की ओर से कोई बयान नहीं आया है.


वीडियो- रायबरेली में राहुल और सोनिया गांधी पर बहस गर्माई फिर अदिति सिंह का नाम आया

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