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राहुल गांधी के पत्र की चार ख़ास बातें, तीसरी वाली में सारे देश की दिलचस्पी है

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राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा तो चुनाव परिणाम के बाद ही दे दिया था. लेकिन उनके इस्तीफे पर घमासान मचा हुआ है. कांग्रेस के नेता और कांग्रेसशासित राज्यों के मुख्यमंत्री राहुल गांधी से मिलकर उनसे इस्तीफा वापिस लेने की मांग कर रहे है, लेकिन राहुल गांधी अपने फैसले पर अडिग हैं. वे चाहते हैं कि कांग्रेस का नया अध्यक्ष गांधी परिवार के बाहर का हो.

लेकिन आज यानी 3 जुलाई को राहुल गांधी ने ट्विटर पर एक पत्र लिखा है. चार पेजों के इस पत्र में बहुत सारी बातें है. इन बहुत सारी बातों को हम चार बिन्दुओं में निचोड़कर ला रहे हैं. निचोड़ ये कि राहुल गांधी क्या कह रहे हैं? उनका इशारा क्या है? कांग्रेस और गांधी परिवार का संबंध कैसा होगा? और कांग्रेस पार्टी किस ओर जाएगी?

1. राहुल गांधी ने इस्तीफ़ा क्यों दिया?

पत्र की शुरुआत में ही राहुल गांधी ने बतौर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली है. लेकिन उसके ठीक बाद राहुल गांधी ने कहा है कि हमारी पार्टी के विकास के लिए जवाबदेही सबसे ज्यादा ज़रूरी है. 

इसके बाद राहुल गांधी ने जो लिखा है, उससे कामराज प्लान की बात हो आती है.

कौन कामराज और कैसा प्लान?

कुमारस्वामी कामराज. मद्रास स्टेट (अब तमिलनाडु) के मुख्यमंत्री बने 1954 में. फिर से मुख्यमंत्री बने 1957 में और तीसरी बार बने 1962 में. क्या है कामराज प्लान? 1963 में कांग्रेस को फिर से जिलाने के लिए कामराज ने नेहरू को कहा कि सभी वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को अपनी पोस्ट से इस्तीफा दे देना चाहिए और पार्टी को फिर से जिलाने के लिए काम करना चाहिए. ये घोषणा इतनी बड़ी थी कि लालबहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई, जगजीवन राम और बीजू पटनाइक जैसे नेताओं ने इस्तीफ़ा दिया. नेहरू इस फैसले से बड़े प्रभावित हुए. उन्होंने कामराज को बुलाया दिल्ली और कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया.

जवाहरलाल नेहरू के साथ के. कामराज
जवाहरलाल नेहरू के साथ के. कामराज

अपने लेटर में राहुल गांधी ने कहा है कि पार्टी को फिर से बनाने के लिए कथीर निर्णयों की ज़रुरत है. और कई सारे लोगों को 2019 में हुई हार के लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा है कि लेकिन ये अन्याय होगा कि बाकी लोग जवाबदेह रहें, जबकि वे कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर अपनी ही जिम्मेदारी से मुकरते रहें.

एक तरह से देखें तो राहुल गांधी अपने साथ-साथ कांग्रेस के कई नेताओं को अपने साथ लेकर जाना चाह रहे हैं. उन्हें जवाबदेह ‘बनाया जाएगा‘, ऐसा कह रहे हैं. इसे एक ‘नए कामराज प्लान’ की तरह देख सकते हैं. वरिष्ठ नेताओं को लेकर कामराज गए थे, तभी कांग्रेस कुछ खड़ी हो सकी थी. साथ-साथ हफ्ते भर से ये खबर भी चल रही है कि प्रियंका गांधी ने यूपी की सभी जिला यूनिटों के अध्यक्षों की आयु 40 साल तक सीमित कर दी है. कांग्रेस कार्यसमिति की मीटिंग में भी वरिष्ठों के कार्यों पर चर्चा हुई ही थी. ऐसे में संकेत तो यही बता रहे कि राहुल ‘Neo-Kamraj’ की ओर बढ़ रहे हैं.

2. सीधी जिम्मेदारी से बच रहे हैं राहुल गांधी 

राहुल गांधी ने पत्र लिखकर इस्तीफ़ा तो कन्फर्म तो कर ही दिया है. लेकिन वे किसी भी हाल में कोई भी जिम्मेदारी लेने से बचना चाह रहे हैं, चाहे वह जिम्मेदारी नए कांग्रेस अध्यक्ष का नाम सुझाने की ही क्यों न हो. पत्र में राहुल गांधी ने कहा है,

“मेरे सहयोगी मुझसे कह रहे हैं कि अगले कांग्रेस अध्यक्ष को मैं नामित करूं.”

लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि किसी नए व्यक्ति को कांग्रेस को आगे लेकर चलना चाहिए, लेकिन यह सही नहीं है कि राहुल गांधी उस व्यक्ति का चुनाव करें.

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी. इस्तीफे की पेशकश हुई. वो मंज़ूर नहीं होना था, नहीं हुआ. (Twitter|INC)

गांधी परिवार की कांग्रेस में अभी भी चलती है. और चलती ही क्या? गांधी परिवार कांग्रेस को चला ही रहा. कई जानकार मानते हैं कि कांग्रेस को बनाए-बचाए रखने में – चाहे वह जिस भी हाल में बची हुई हो – गांधी परिवार का बड़ा हाथ है. लेकिन फिलहाल राहुल गांधी नाम लेने से बच रहे हैं. कह रहे हैं कि पार्टी चुन ले, उन्हें पार्टी पर भरोसा है कि वह सबसे अच्छा निर्णय लेगी लेकिन वे खुद किसी सदस्य को नामित नहीं करेंगे.

3. नया अध्यक्ष कैसे चुना जाएगा?

सिर्फ इसी काम के लिए एक ग्रुप होगा. ग्रुप नए कांग्रेस अध्यक्ष को ढूंढने का काम करेगा. ऐसा पत्र में मिले संकेत कहते हैं. राहुल ने कांग्रेस कार्यसमिति में भी इस बात को रखा है, ऐसा उन्होंने खुद बताया भी. राहुल गांधी ने पत्र में लिखा है,

“इस्तीफा देने के बाद मैंने कांग्रेस वर्किंग कमिटी के अपने साथियों को सुझाव दिया कि कांग्रेस के नए अध्यक्ष की खोज का काम एक ग्रुप की देखरेख में हो. मैंने उन लोगों को इस काम के लिए मजबूत किया है. मैंने वादा किया है कि इस काम में पूरा सहयोग करूंगा.”

यानी राहुल गांधी खुद नाम नहीं सुझाएंगे, लेकिन एक काम ज़रूर करेंगे कि प्रक्रिया में सहयोग करेंगे. इसे ऐसे भी देखा जा सकता है कि इस्तीफे के बाद भी राहुल गांधी एक प्रभाव की स्थिति में मौजूद रहेंगे.

4. “मैं वापिस आऊंगा” और बाकी भाषण 

इस पत्र में भारत के कांसेप्ट, और भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई का लंबा चौड़ा ज़िक्र है. उन्होंने कहा है कि मौजूदा सरकार किसानों, बेरोज़गारों, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए चुनौती की तरह आई है. इससे हमारे आर्थिक हालातों और देश की छवि पर बुरा असर पड़ेगा. प्रधानमंत्री जीत जाते हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी खारिज हो जाते हैं, राहुल गांधी ने ऐसा भी कहा है.

लेकिन चलते-चलते राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी और देश के प्रति अपनी वफादारी की बात की है और ये भी कहा है कि “जब-जब ज़रुरत होगी, मैं पार्टी के लिए अपनी सेवाओं, इनपुट और सुझावों के साथ मौजूद रहूंगा.”


लेकिन इन सबके बीच सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि महासचिव केसी वेणुगोपाल ने CWC की मीटिंग बुलाई है. मीटिंग की अध्यक्षता मुकुल वासनिक और मोतीलाल वोरा करेंगे. इस मीटिंग में राहुल गांधी का इस्तीफा स्वीकार किया जाए या नहीं, इस पर विचार किया जाएगा. और तुरंत नए कांग्रेस अध्यक्ष को नियुक्त करने, या पार्टी का नेतृत्त्व करने वाले एक समूह को नियुक्त करने या इस मामले को सुलझाने के लिए एक समिति का गठन करने पर विचार किया जाएगा.

P.S. 

और अंत में. जय श्री राम. दत्तात्रेय कौल गोत्र के राहुल गांधी को स्मृति ईरानी ने कहा. अमेठी की नवनिर्वाचित सांसद.


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